Axis Bank Share: मुनाफा 38% बढ़ा, फिर भी 4% से ज्यादा क्यों टूट गया शेयर? जानिए पूरी वजह

संदीप शर्मा

• 02:31 PM • 19 Oct 2026

एक्सिस बैंक का दूसरी तिमाही में मुनाफा 38 फीसदी बढ़कर 7,003 करोड़ रुपये रहा, फिर भी शेयर 4 फीसदी से ज्यादा टूटा. जानिए NIM में गिरावट, नतीजों, ब्रोकरेज टारगेट और शेयर के आउटलुक की पूरी जानकारी

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न्यूज़ हाइलाइट्स

नतीजे अनुमान से कमजोर, शेयर 4% से ज्यादा टूटा

मुनाफा 38% बढ़कर 7,003 करोड़ रुपये रहा

Jefferies की खरीदारी की सलाह, 1,700 रुपये

Centrum ने टारगेट घटाकर 1,530 रुपये किया

Axis Bank Q2 Results: एक्सिस बैंक का सितंबर तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 38 फीसदी बढ़कर 7,003 करोड़ रुपये रहा. इसके बावजूद सोमवार को बैंक के शेयर में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई. नेट इंटरेस्ट मार्जिन यानी NIM में कमी, अनुमान से कमजोर मुनाफा और बढ़ते खर्च ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई. हालांकि, बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला है. ऐसे में सवाल है कि क्या शेयर में गिरावट निवेशकों के लिए चिंता की बात है या आगे रिकवरी की गुंजाइश है?

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शेयर का प्रदर्शन कैसा रहा?

सोमवार को एक्सिस बैंक के शेयर में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. पिछले छह महीनों में शेयर करीब 9 फीसदी टूट चुका है. हालांकि, एक साल के दौरान इसमें करीब 2.25 फीसदी की तेजी रही है. वहीं, तीन साल में शेयर ने करीब 26 फीसदी का रिटर्न दिया है.लंबी अवधि के रिटर्न के बावजूद हालिया प्रदर्शन कमजोर रहा है. सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद शेयर पर दबाव बढ़ने की प्रमुख वजह मुनाफे का बाजार के अनुमान से कम रहना और मार्जिन को लेकर चिंता रही.

गिरावट की क्या रही वजह?

एक्सिस बैंक ने सितंबर तिमाही में मुनाफे में अच्छी सालाना बढ़ोतरी दर्ज की, लेकिन नेट प्रॉफिट बाजार के अनुमान से कम रहा. बैंक का मुनाफा 7,003 करोड़ रुपये रहा, जबकि LSEG के अनुमान के मुताबिक यह करीब 7,124 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद थी.शेयर पर दबाव की दूसरी बड़ी वजह नेट इंटरेस्ट मार्जिन यानी NIM में गिरावट रही. यह बताता है कि बैंक कर्ज से मिलने वाले ब्याज और जमा पर दिए जाने वाले ब्याज के बीच कितना अंतर कमाता है. दूसरी तिमाही में बैंक का NIM घटकर 3.36 फीसदी रह गया, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 10 बेसिस पॉइंट कम है. NIM में गिरावट के पीछे FCNR(B) डिपॉजिट का भी असर रहा. ये विदेशी मुद्रा में रखी जाने वाली जमा राशि होती है. ऐसी जमा पर ब्याज और मुद्रा जोखिम से बचाव की लागत बैंक के मार्जिन को प्रभावित कर सकती है. हालांकि, बैंक के मार्जिन पर इसका वास्तविक असर लागत और जमा के इस्तेमाल पर निर्भर करता है. इसके अलावा, बैंक का मुनाफा पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 1.5 फीसदी घटा. कमजोर ट्रेजरी कमाई और बढ़ते ऑपरेटिंग खर्च भी निवेशकों की चिंता की वजह रहे.

मुनाफा 38% बढ़ा, NPA में भी सुधार

एक्सिस बैंक के दूसरी तिमाही के नतीजों में सालाना आधार पर अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 38 फीसदी बढ़कर 7,003 करोड़ रुपये रहा. नेट इंटरेस्ट इनकम सालाना आधार पर 12 फीसदी बढ़कर 15,371 करोड़ रुपये रही. ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना आधार पर 6 फीसदी बढ़कर 11,083 करोड़ रुपये रहा. ग्रॉस NPA: पिछली तिमाही के 1.28 फीसदी से घटकर 1.16 फीसदी पर आ गया. नेट NPA पिछली तिमाही के 0.39 फीसदी से घटकर 0.35 फीसदी पर आ गया. बैंक की एसेट क्वालिटी यानी कर्ज की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है. ग्रॉस और नेट NPA में कमी इस बात का संकेत है कि खराब कर्ज से जुड़ी स्थिति बेहतर हुई है. बैंक के कर्ज डिस्ट्रीब्यूशन में भी मजबूती बनी हुई है. हालांकि, मुनाफे में सालाना बढ़ोतरी के बावजूद मार्जिन और खर्च से जुड़ी चिंताएं शेयर पर दबाव बना रही हैं.
 

ब्रोकरेज की क्या है राय?

  • Jefferies: ब्रोकरेज ने एक्सिस बैंक पर Buy रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,700 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है. Jefferies के मुताबिक, बेहतर आय, कम प्रोविजन और एसेट क्वालिटी में सुधार बैंक के लिए सकारात्मक संकेत हैं. मार्जिन में सुधार और क्रेडिट लागत कम रहने से अगले साल बैंक के रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) को सहारा मिल सकता है.
  • Centrum Broking: ब्रोकरेज ने Buy रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस 1,630 रुपये से घटाकर 1,530 रुपये कर दिया है. मार्जिन में गिरावट, कमजोर ट्रेजरी कमाई और बढ़ते खर्च को लेकर चिंता जताई गई है. आगे मार्जिन में सुधार के लिए रिटेल लोन की ग्रोथ अहम हो सकती है.
  • 360 One WAM: ब्रोकरेज ने Buy रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस बढ़ाकर 1,590 रुपये कर दिया है. इसके मुताबिक, दूसरी छमाही में अतिरिक्त लिक्विडिटी का बेहतर इस्तेमाल और ब्याज दरों में बदलाव बैंक के मार्जिन को सुधारने में मदद कर सकते हैं. ब्रोकरेज ने बैंक की एसेट क्वालिटी को भी नियंत्रण में बताया है.

डिस्क्लेमर: ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस संभावनाओं पर आधारित अनुमान हैं, गारंटी नहीं. किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले कंपनी के नतीजों, वैल्यूएशन, जोखिम और अपनी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखें. जरूरत पड़ने पर अपने निवेश सलाहकार से सलाह लें.