Stock Market Update : शेयर बाजार पर बड़ा अलर्ट, बैंक ऑफ अमेरिका इंडिकेटर 9.6 पर, मचने वाला है तांडव!

सौरभ दीक्षित

• 01:52 PM • 25 Jul 2026

बैंक ऑफ अमेरिका का बुल एंड बियर इंडिकेटर 9.6 पर है. यह तुरंत गिरावट का संकेत नहीं, लेकिन शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और एसआईपी निवेशकों के लिए बढ़ते जोखिम की साफ चेतावनी जरूर है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

बड़े फंड मैनेजरों के पास अब सिर्फ 3.6 प्रतिशत नकद बचा

खराब खबर आते ही नीचे खरीदारी के लिए पैसा कम पड़ सकता है

6 में 5 संकेत जरूरत से ज्यादा तेजी की तरफ इशारा कर रहे

शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच अब एक बड़ा चेतावनी संकेत सामने आया है. अमेरिका के बड़े निवेश बैंक बैंक ऑफ अमेरिका का बुल एंड बियर इंडिकेटर 9.6 पर पहुंच गया है. बाजार जानकारों के मुताबिक 8 से ऊपर का स्तर एक्सट्रीम बुलिश माना जाता है. इसका मतलब है कि निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ चुका है और जोखिम भी बढ़ सकता है.

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यह संकेतक यह नहीं कहता कि बाजार तुरंत गिरने वाला है. लेकिन यह जरूर दिखाता है कि इस समय बाजार में उम्मीदें बहुत ऊंचे स्तर पर हैं. ऐसे में अगर कोई बड़ी नकारात्मक खबर आती है, तो बिकवाली तेज हो सकती है. यही वजह है कि शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और एसआईपी में पैसा लगाने वालों के लिए यह संकेत अहम माना जा रहा है.

मुख्य बातें

बुल एंड बियर इंडिकेटर 9.6 पर पहुंचा है.8 से ऊपर का स्तर एक्सट्रीम बुलिश माना जाता है.बड़े फंड मैनेजरों के पास सिर्फ 3.6 प्रतिशत नकद हिस्सा बचा है.6 में से 5 संकेत जरूरत से ज्यादा तेजी वाले दिख रहे हैं.यह पक्की गिरावट का संकेत नहीं है, लेकिन जोखिम बढ़ने की चेतावनी जरूर है.

यह संकेतक क्या है

आसान भाषा में समझें तो बुल एंड बियर इंडिकेटर बाजार का डर और लालच मापने वाला मीटर है. बाजार जानकारों के मुताबिक, जब यह नीचे रहता है तो इसका मतलब होता है कि निवेशक डरे हुए हैं और वे पैसा नकद, सरकारी बॉन्ड या दूसरी सुरक्षित जगहों पर रख रहे हैं. जब यह ऊपर जाता है, तो इसका मतलब होता है कि लोग बिना ज्यादा डर के शेयर खरीद रहे हैं और उन्हें लग रहा है कि बाजार आगे भी ऊपर जा सकता है.

3.6 प्रतिशत नकद क्यों अहम है

रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के बड़े फंड मैनेजरों के पास अब सिर्फ 3.6 प्रतिशत नकद बचा है. आसान शब्दों में कहें तो अगर किसी फंड के पास 100 रुपये हैं, तो उसमें सिर्फ 3.6 रुपये ही नकद हैं. बाकी पैसा शेयर, बॉन्ड और दूसरे निवेश में लगाया जा चुका है.

इसका असर यह हो सकता है कि अगर बाजार में अचानक कोई बुरी खबर आती है, तो नीचे के स्तर पर खरीदारी के लिए उनके पास ज्यादा पैसा नहीं होगा. वहीं अगर निवेशक पैसा निकालना शुरू कर देते हैं, तो फंड मैनेजरों को मजबूरी में शेयर बेचने पड़ सकते हैं. ऐसी स्थिति में बिकवाली और तेज हो सकती है.

डर किस बात का है

शेयर बाजार में अक्सर सबसे बड़ा जोखिम तब बनता है, जब ज्यादातर लोग पहले ही खरीदारी कर चुके होते हैं. ऐसी हालत में नए खरीदार कम बचते हैं. फिर बाजार को ऊपर ले जाने के लिए लगातार अच्छी खबरों की जरूरत पड़ती है. अगर इस बीच सिर्फ एक बड़ी खराब खबर भी आ जाए, तो खरीदने वाले कम और बेचने वाले ज्यादा हो सकते हैं.

यह संकेतक किन बातों को देखता है

बैंक ऑफ अमेरिका का यह संकेतक सिर्फ नकद हिस्से को नहीं देखता. इसमें फंड मैनेजरों की पोजिशन, शेयरों में आने वाला पैसा, बॉन्ड बाजार, हेज फंड, क्रेडिट मार्केट और बाजार की चौड़ाई यानी मार्केट ब्रेड्थ जैसे कई संकेत शामिल होते हैं. इस समय इनमें से 6 में से 5 संकेत जरूरत से ज्यादा तेजी वाले बताए जा रहे हैं.

हालांकि बाजार की चौड़ाई पूरी तरह मजबूत नहीं दिख रही है. इसका मतलब यह है कि कुछ बड़े शेयर या बड़े सूचकांक बाजार को ऊपर खींच रहे हैं, लेकिन सभी शेयरों में वैसी मजबूती नहीं है. जानकारों के मुताबिक ऐसी स्थिति में गिरावट अचानक तेज हो सकती है.

क्या बाजार अब पक्का गिरेगा

इस सवाल का सीधा जवाब नहीं है. बाजार जानकारों का कहना है कि कोई भी संकेतक यह नहीं बता सकता कि बाजार कल गिरेगा या अगले हफ्ते. कई बार बाजार महीनों तक ऐसे ही एक्सट्रीम बुलिश दायरे में बना रहता है. अगर कंपनियों के नतीजे अच्छे आते रहें, अर्थव्यवस्था मजबूत रहे और बाजार में पैसा आता रहे, तो तेजी आगे भी चल सकती है. लेकिन जोखिम पहले से ज्यादा हो जाता है और गलती की गुंजाइश कम बचती है.

कौन सी बातें गिरावट की वजह बन सकती हैं

कंपनियों की कमाई उम्मीद से कमजोर रहना.कच्चे तेल की कीमत अचानक बढ़ना.अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहना.बॉन्ड यील्ड बढ़ना.दुनिया में बड़ा युद्ध, टैरिफ या भू-राजनीतिक संकट खड़ा होना.

जानकारों के मुताबिक अगर ऐसी कोई स्थिति बनती है, तो बाजार में एक साथ मुनाफावसूली शुरू हो सकती है. और जब ज्यादातर निवेशक पहले ही खरीदारी कर चुके हों, तब गिरावट सामान्य से ज्यादा तेज हो सकती है.

इतिहास क्या बताता है

रिपोर्ट के मुताबिक 2004, 2006, 2010, 2017, 2018, 2020 और दिसंबर 2020 में भी यह संकेतक एक्सट्रीम बुल जोन में पहुंचा था. हर बार बाजार तुरंत नहीं गिरा. लेकिन जोखिम जरूर बढ़ा था. यानी यह संकेतक गिरावट की तारीख नहीं बताता, लेकिन खतरे की घंटी जरूर बजाता है.

भारत पर क्या असर हो सकता है

अगर विदेशी निवेशकों का भरोसा बना रहता है, तो भारत में विदेशी पैसा आता रह सकता है. लेकिन अगर दुनिया के बाजारों में बिकवाली शुरू होती है, तो उसका असर भारत पर भी पड़ सकता है. खासकर उन शेयरों में दबाव ज्यादा दिख सकता है, जहां कीमतें कमाई से काफी आगे निकल चुकी हैं.

कुल मिलाकर बैंक ऑफ अमेरिका का 9.6 वाला बुल एंड बियर इंडिकेटर यह नहीं कह रहा कि शेयर बाजार कल ही टूट जाएगा. लेकिन यह जरूर बता रहा है कि इस समय बाजार उम्मीदों के बहुत ऊंचे स्तर पर खड़ा है और जोखिम बढ़ा हुआ है. यह खबर सिर्फ जानकारी के लिए है. किसी भी शेयर को खरीदने या बेचने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से बात करना जरूरी है.