बैंक ऑफ बड़ौदा और NMC हेल्थकेयर के संस्थापक बी.आर. शेट्टी के बीच कानूनी विवाद अब 15 अरब डॉलर यानी करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग तक पहुंच गया है. शेट्टी ने बैंक के कुछ अधिकारियों पर कथित वित्तीय गड़बड़ियों में भूमिका निभाने और विवादित गारंटियों के आधार पर रकम वसूलने की कोशिश करने के आरोप लगाए हैं. वहीं, बैंक भी शेट्टी से करीब 2,800 करोड़ रुपये की बकाया रकम वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई कर रहा है.
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क्या है पूरा मामला?
बैंक ऑफ बड़ौदा और बी.आर. शेट्टी के बीच विवाद को समझने के लिए NMC Healthcare के वित्तीय संकट को जानना जरूरी है. UAE की ये कंपनी अस्पतालों और मेडिकल सेंटरों का संचालन करती थी. कंपनी के फाउंडर बी.आर. शेट्टी है और एक समय कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा था. हालांकि, 2020 में कंपनी की वित्तीय स्थिति को लेकर बड़ा खुलासा हुआ. सामने आया कि NMC हेल्थकेयर पर जितना कर्ज बताया गया था, वास्तविक देनदारी उससे कहीं ज्यादा थी. कंपनी के करीब 6.6 अरब डॉलर के कर्ज का मामला सामने आने के बाद उसके वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू हुई. इसके बाद कंपनी को प्रशासनिक नियंत्रण और पुनर्गठन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा.
विवाद में BoB की एंट्री कैसे हुई?
NMC हेल्थकेयर के वित्तीय संकट के बाद कंपनी के फाउंडर ने बैंक ऑफ बड़ौदा के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए. आरोप लगाया गया कि संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को रोकने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए. इसी विवाद के बीच NMC हेल्थकेयर के संस्थापक बी.आर. शेट्टी ने भी बैंक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. शेट्टी का आरोप है कि बैंक के कुछ अधिकारियों ने कंपनी के पूर्व अधिकारियों के साथ मिलकर कथित तौर पर संदिग्ध लेनदेन में मदद की. शेट्टी ने ये भी दावा किया कि बैंक ने ऐसी गारंटियों के आधार पर उनसे रकम वसूलने की कोशिश की, जिन पर उनके मुताबिक फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे. उनका कहना है कि बैंक की कार्रवाई और उनके खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और उनकी प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा. हालांकि, ये शेट्टी की ओर से लगाए गए आरोप हैं. इन पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है.
1.44 लाख करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग कैसे बनी?
बी.आर. शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा और दूसरे पक्षों के खिलाफ करीब 15 अरब डॉलर यानी 1.44 लाख करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है. ये रकम तीन हिस्सों में बांटी गई है. 5 अरब डॉलर सीधे आर्थिक नुकसान के लिए. 5 अरब डॉलर: अन्य आर्थिक नुकसान के लिए और 5 अरब डॉलर: प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए मांगे गए हैं यहां ध्यान देने वाली बात है कि 1.44 लाख करोड़ रुपये हर्जाने की मांग है, न कि अदालत की ओर से तय की गई देनदारी. इसका मतलब है कि बैंक को इतनी रकम चुकाने का कोई अंतिम आदेश इस मांग से अपने आप नहीं हो जाता.
बैंक ऑफ बड़ौदा का पक्ष
बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा है कि वो इस मुकदमे में अपना बचाव करेगा. बैंक खुद भी बी.आर. शेट्टी से करीब 2,800 करोड़ रुपये की बकाया रकम वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई कर रहा है. इस तरह दोनों पक्षों के बीच विवाद दोतरफा हो गया है. एक तरफ शेट्टी बैंक और अन्य संबंधित पक्षों से भारी हर्जाना मांग रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ बैंक अपनी बकाया रकम की वसूली की कोशिश कर रहा है.
5,700 करोड़ रुपये का समझौता
इस विवाद में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम जुलाई 2026 में सामने आया था. बैंक ऑफ बड़ौदा ने NMC ग्रुप के अधिकारियों के साथ पुराने विवादों को निपटाने के लिए 600 मिलियन डॉलर यानी करीब 5,700 करोड़ रुपये के समझौते पर सहमति जताई थी. हालांकि, इस समझौते में बैंक ने अपनी गलती स्वीकार नहीं की थी. साथ ही, NMC ग्रुप के प्रशासकों के साथ हुआ ये समझौता बी.आर. शेट्टी की ओर से दायर मौजूदा मुकदमे से अलग है. इसलिए इस समझौते को शेट्टी के दावों का अंतिम निपटारा नहीं माना जा सकता.
निवेशकों के लिए क्यों अहम है मामला?
इस कानूनी विवाद पर निवेशकों की नजर रहने की वजह हर्जाने की बड़ी रकम के अलावा बैंक की कानूनी स्थिति और संभावित वित्तीय जोखिम भी हैं. सिर्फ हर्जाने की मांग के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बैंक को इतनी रकम का भुगतान करना पड़ेगा.आगे इस मामले में अदालत की कार्यवाही, दोनों पक्षों की दलीलें और कानूनी फैसले अहम होंगे. फिलहाल, बैंक ऑफ बड़ौदा और बी.आर. शेट्टी के बीच यह विवाद कथित वित्तीय अनियमितताओं, विवादित गारंटियों और जिम्मेदारी तय करने की कानूनी लड़ाई बन गया है.
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