बैंकिंग सेक्टर में बड़े सुधार की तैयारी, जल्द बनेगी हाई-लेवल कमेटी, वित्त मंत्री ने दिया बड़ा अपडेट

तनीषा त्यागी

• 12:43 PM • 17 Aug 2026

सरकार जल्द बैंकिंग सेक्टर के लिए हाई-लेवल कमेटी बना सकती है. यह समिति 2047 के लक्ष्य, कर्ज, बैंक सुधार, एनपीए और पीएसबी की आगे की भूमिका पर अहम सुझाव देगी.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

समिति 2047 तक विकसित भारत में बैंकों की भूमिका परखेगी

बजट 2026-27 में व्यापक बैंकिंग समीक्षा का प्रस्ताव पहले रखा गया

सरकार रिपोर्ट मिलते ही सुझावों पर तेज नीतिगत कार्रवाई कर सकती है

बैंकिंग सेक्टर में बड़े सुधारों की दिशा में केंद्र सरकार जल्द ही एक अहम कदम उठाने जा रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय पीएसबी कॉन्क्लेव 2026 के पहले दिन बताया कि सरकार जल्द ही बैंकिंग सेक्टर पर बनने वाली हाई-लेवल कमेटी की घोषणा करेगी. वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस कमेटी का गठन इसी महीने किए जाने की संभावना है. यह कमेटी भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य यानी विकसित भारत के विजन में बैंकों की भूमिका की समीक्षा करेगी. सरकार का फोकस इस बात पर रहेगा कि बैंकिंग सेक्टर देश की लंबी अवधि की आर्थिक जरूरतों और विकास लक्ष्यों के साथ किस तरह बेहतर तालमेल बना सकता है.

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बजट में किया गया था कमेटी का ऐलान

बैंकिंग सेक्टर के लिए इस हाई-लेवल कमेटी का प्रस्ताव वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में रखा गया था. वित्त मंत्री ने बजट में विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग सेक्टर की व्यापक समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने की घोषणा की थी. हालांकि, बजट घोषणा के बाद से अब तक इस कमेटी का औपचारिक गठन नहीं हुआ है. अब वित्त मंत्री के ताजा बयान से संकेत मिल रहा है कि सरकार जल्द ही समिति के सदस्यों और इसकी संरचना का ऐलान कर सकती है. वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कमेटी का गठन इसी महीने होने की संभावना है. इसके बाद बैंकिंग सेक्टर से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर समीक्षा और सुझाव देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

2047 के लक्ष्य में बैंकों की क्या भूमिका होगी?

वित्त मंत्री के मुताबिक, प्रस्तावित समिति का सबसे अहम काम यह देखना होगा कि भारत के विकसित देश बनने के लक्ष्य में बैंकिंग सेक्टर किस तरह योगदान कर सकता है. भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश, उद्योगों को वित्तीय सहायता, बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार सृजन के लिए मजबूत वित्तीय व्यवस्था जरूरी होगी. ऐसे में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका सिर्फ जमा लेने और कर्ज देने तक सीमित नहीं रहेगी. बैंकों को अर्थव्यवस्था की बढ़ती जरूरतों के मुताबिक पूंजी उपलब्ध कराने, कारोबार और उद्योगों को समर्थन देने तथा आर्थिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभानी होगी. इसी व्यापक भूमिका को ध्यान में रखते हुए हाई-लेवल कमेटी बैंकिंग सेक्टर की मौजूदा स्थिति और भविष्य की जरूरतों की समीक्षा करेगी.

रिपोर्ट आते ही तेजी से लागू होंगी सिफारिशें

वित्त मंत्री ने यह भी संकेत दिया है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार उसकी सिफारिशों पर तेजी से कार्रवाई करेगी. यानी सरकार का इरादा सिर्फ बैंकिंग सेक्टर की समीक्षा तक सीमित नहीं है. समिति की ओर से जो सुझाव दिए जाएंगे, उन पर आगे नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं. इससे बैंकिंग सेक्टर में आने वाले समय में संरचनात्मक बदलाव और सुधारों की संभावना बढ़ सकती है. हालांकि, इन बदलावों की वास्तविक दिशा समिति की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों के बाद ही स्पष्ट होगी.

बैंकों की वित्तीय स्थिति में आया सुधार

सरकार ने ऐसे समय में बैंकिंग सुधारों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है, जब भारतीय बैंकों की वित्तीय स्थिति पहले के मुकाबले मजबूत हुई है. वित्त मंत्री ने बैंकिंग सेक्टर की बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता यानी एसेट क्वालिटी का भी उल्लेख किया. बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां यानी एनपीए लंबे समय के निचले स्तर पर हैं. इससे बैंकों की बैलेंस शीट पर दबाव कम हुआ है और वित्तीय व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में दिखाई दे रही है. वित्त मंत्री ने इसी सुधार को बैंकिंग सेक्टर में आगे के सुधारों के लिए अनुकूल स्थिति बताया है.

सरकारी बैंकों का मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानी पीएसबी के प्रदर्शन में भी हाल के वर्षों में सुधार देखने को मिला है. वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों का कुल शुद्ध मुनाफा रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा. मुनाफे में यह मजबूती और बेहतर एसेट क्वालिटी बैंकिंग सेक्टर की वित्तीय स्थिति में सुधार की ओर संकेत करती है. ऐसे में सरकार अब बैंकिंग व्यवस्था को अगले चरण के लिए तैयार करने पर जोर दे रही है.

बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या बदल सकता है?

हाई-लेवल कमेटी का गठन होने के बाद बैंकिंग सेक्टर से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार हो सकता है. इनमें बैंकों की भविष्य की भूमिका, आर्थिक विकास के लिए कर्ज की उपलब्धता, बैंकिंग व्यवस्था की क्षमता और देश की दीर्घकालीन वित्तीय जरूरतों के साथ बैंकों का तालमेल जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं. खास तौर पर विकसित भारत के लक्ष्य को देखते हुए बैंकों से उम्मीद होगी कि वे उद्योग, बुनियादी ढांचा, छोटे कारोबार और नए आर्थिक क्षेत्रों को पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभाएं. हालांकि, इन क्षेत्रों में किसी खास बदलाव या नीति को अभी अंतिम नहीं माना जा सकता. वास्तविक दिशा समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी.

सरकार के लिए यह समय क्यों अहम है?

भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार के बढ़ने के साथ बैंकिंग सेक्टर पर भी बड़ी जिम्मेदारी आ रही है. आने वाले वर्षों में कंपनियों, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और अलग-अलग कारोबारों को बड़ी मात्रा में वित्त की जरूरत होगी. ऐसे में मजबूत बैंकिंग व्यवस्था आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. दूसरी तरफ बैंकों की वित्तीय स्थिरता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा. सरकार की प्रस्तावित कमेटी इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग सेक्टर के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे बड़ा अपडेट यही है कि सरकार बैंकिंग सेक्टर पर हाई-लेवल कमेटी के गठन की तैयारी में है और इसके इसी महीने घोषित होने की संभावना है. कमेटी बनने के बाद वह बैंकिंग सेक्टर की मौजूदा स्थिति, उसकी चुनौतियों और विकसित भारत के लक्ष्य में उसकी भूमिका की समीक्षा करेगी. इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंपेगी. वित्त मंत्री के मुताबिक, रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार सिफारिशों पर तेजी से कार्रवाई करेगी. ऐसे में आने वाले महीनों में बैंकिंग सेक्टर में नीतिगत बदलावों और सुधारों को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है. फिलहाल कम एनपीए, बेहतर एसेट क्वालिटी और सरकारी बैंकों के रिकॉर्ड मुनाफे ने बैंकिंग सेक्टर को सुधारों के लिए अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित कमेटी 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के लिए भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को लेकर क्या सिफारिशें देती है.