Stock Market Crash: रिजल्ट अच्छे, ब्रोकरेज बुलिश... फिर भी बैंकिंग शेयरों में बड़ी बिकवाली, जानिए बाजार में गिरावट की पूरी कहानी

तनीषा त्यागी

• 10:56 AM • 20 Jul 2026

Share Market : अच्छे तिमाही नतीजों और ब्रोकरेज के भरोसे के बावजूद बैंकिंग शेयर क्यों टूटे. जानिए मुनाफावसूली, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक तनाव से बाजार पर कितना दबाव बढ़ा.

NewsTak
Google CTA

न्यूज़ हाइलाइट्स

शुरुआती पांच मिनट में सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा लुढक गया.

बैंक निफ्टी एक फीसदी टूटा, एक्सिस बैंक में सबसे ज्यादा कमजोरी रही.

एचडीएफसी बैंक का मुनाफा बढ़ा, लेकिन एनआईआई अनुमान से नीचे रही.

नतीजों के बाद मुनाफावसूली ने निजी बैंक शेयरों पर दबाव बढ़ाया.

अमेरिका ईरान तनाव और महंगे तेल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई.

Share Market : भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बेहद कमजोर शुरुआत की. कारोबार शुरू होने के कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में आ गए. सबसे ज्यादा असर बैंकिंग शेयरों पर देखने को मिला, जहां HDFC Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे बड़े निजी बैंक तेज गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए. दिलचस्प बात यह रही कि इन बैंकों के तिमाही नतीजे पूरी तरह निराशाजनक नहीं थे और कई बड़े ग्लोबल ब्रोकरेज अब भी इन शेयरों पर सकारात्मक रुख बनाए हुए हैं. इसके बावजूद बाजार में तेज बिकवाली ने निवेशकों को हैरान कर दिया.

Read more!

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अच्छे नतीजों और सकारात्मक ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के बावजूद बैंकिंग शेयरों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई. आइए इसे विस्तार से समझते हैं.

खुलते ही दबाव में आया शेयर बाजार

सोमवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 78,151.45 के मुकाबले लगभग सपाट स्तर पर खुला, लेकिन शुरुआती मिनटों में ही बिकवाली तेज हो गई. महज पांच मिनट के भीतर सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा टूटकर 77,542 के स्तर तक पहुंच गया. सुबह करीब 10 बजे यह 77,575 के आसपास कारोबार कर रहा था.

दूसरी ओर, एनएसई निफ्टी भी अपने पिछले बंद 24,334.30 के मुकाबले कमजोरी के साथ 24,190 पर खुला. शुरुआती कारोबार में इसमें भी दबाव बढ़ता गया और सुबह करीब 10 बजे यह 150 अंकों से ज्यादा गिरकर 24,188 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया.

बैंकिंग शेयर बने गिरावट की सबसे बड़ी वजह

सोमवार की गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग सेक्टर पर देखने को मिला. Bank Nifty कारोबार के दौरान 1 फीसदी से ज्यादा टूट गया, जिससे पूरे बाजार का मूड कमजोर पड़ गया. निजी बैंकों के शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट Axis Bank में दर्ज की गई, जहां शेयर 4.86 फीसदी तक फिसल गया. HDFC Bank का शेयर 4.56 फीसदी टूट गया, जबकि Kotak Mahindra Bank में 2.94 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. मिडकैप बैंकिंग शेयर भी बिकवाली से नहीं बच सके. Yes Bank 2.37 फीसदी नीचे कारोबार करता दिखा. AU Small Finance Bank में 1.56 फीसदी और Federal Bank में 0.74 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. बैंकिंग शेयरों में आई इस तेज बिकवाली ने पूरे बाजार पर दबाव बढ़ा दिया.

HDFC Bank के नतीजे खराब नहीं थे, फिर शेयर क्यों टूटा?

HDFC Bank ने अप्रैल-जून तिमाही में 19,059.72 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा दर्ज किया. यह पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले करीब 4.98 फीसदी अधिक रहा. बैंक की Net Interest Income यानी NII भी 6.7 फीसदी बढ़कर 33,535.95 करोड़ रुपये रही. वहीं एसेट क्वालिटी भी मजबूत बनी रही. 30 जून 2026 तक बैंक का Gross NPA 1.17 फीसदी और Net NPA 0.41 फीसदी रहा.

इन आंकड़ों से साफ है कि बैंक का प्रदर्शन कमजोर नहीं था. हालांकि बाजार की उम्मीदें इससे भी ज्यादा थीं. विश्लेषकों का अनुमान था कि NII करीब 34,353 करोड़ रुपये रह सकती है, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे थोड़ा कम रहा. यही अंतर निवेशकों की उम्मीदों पर भारी पड़ा और शेयर में बिकवाली देखने को मिली.

बाजार उम्मीदों पर चलता है, सिर्फ नतीजों पर नहीं

शेयर बाजार में कई बार किसी कंपनी के अच्छे नतीजे भी उसके शेयर को गिरने से नहीं बचा पाते. इसकी सबसे बड़ी वजह होती है बाजार की अपेक्षाएं. अगर किसी कंपनी से बहुत मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद होती है और नतीजे उन उम्मीदों से थोड़ा भी कम रहते हैं, तो निवेशक मुनाफावसूली शुरू कर देते हैं. HDFC Bank के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला. बैंक का प्रदर्शन सकारात्मक रहा, लेकिन बाजार उससे बेहतर आंकड़ों की उम्मीद लगाए बैठा था.

ब्रोकरेज अब भी क्यों हैं सकारात्मक?

शेयर में तेज गिरावट के बावजूद बड़े ग्लोबल ब्रोकरेज HDFC Bank को लेकर अपना भरोसा बनाए हुए हैं.

Jefferies ने बैंक पर Buy रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,050 रुपये का लक्ष्य दिया है. Bernstein ने Outperform रेटिंग के साथ 1,150 रुपये का टारगेट बनाए रखा है. वहीं Nomura ने भी Buy रेटिंग दोहराते हुए 950 रुपये का लक्ष्य रखा है. ब्रोकरेज का मानना है कि बैंक की बैलेंस शीट मजबूत है, लोन और डिपॉजिट ग्रोथ में सुधार दिखाई दे रहा है और एसेट क्वालिटी अभी भी मजबूत बनी हुई है. ऐसे में मौजूदा गिरावट को वे लंबी अवधि के नजरिए से बड़ी कमजोरी नहीं मान रहे हैं.

Profit Booking ने बढ़ाया दबाव

बैंकिंग सेक्टर पिछले कई महीनों से बाजार की तेजी का प्रमुख आधार रहा है. ऐसे में जब तिमाही नतीजे सामने आए, तो कई निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया. बाजार में इस रणनीति को अक्सर "Buy the Rumour, Sell the News" कहा जाता है. यानी नतीजों से पहले खरीदारी और नतीजे आने के बाद मुनाफा वसूलना. सोमवार को बैंकिंग शेयरों में यही ट्रेंड साफ दिखाई दिया.

मिडिल ईस्ट का तनाव भी बना बड़ा कारण

घरेलू कारणों के अलावा वैश्विक घटनाक्रम ने भी बाजार की कमजोरी में अहम भूमिका निभाई. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. इस तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया और Brent Crude 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मतलब आयात बिल बढ़ना, महंगाई का दबाव बढ़ना और कंपनियों की लागत में इजाफा होना है. यही वजह है कि निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी.

एशियाई बाजारों की कमजोरी का भी पड़ा असर

भारतीय बाजार अकेला नहीं था जहां गिरावट देखने को मिली. एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी सोमवार को दबाव बना रहा. जापान का Nikkei इंडेक्स 4 फीसदी से ज्यादा टूट गया, जबकि दक्षिण कोरिया का Kospi इंडेक्स 3 फीसदी से अधिक फिसल गया. Gift Nifty भी कारोबार शुरू होने से पहले 100 अंकों से ज्यादा नीचे कारोबार कर रहा था. इन वैश्विक संकेतों ने भारतीय बाजार की शुरुआत से पहले ही निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया.

गिरावट के बीच एक सकारात्मक आंकड़ा भी आया सामने

हालांकि शुरुआती कारोबार में बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली, लेकिन कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन के आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं. 17 जुलाई 2026 को बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,80,82,764.49 करोड़ रुपये था. 20 जुलाई को यह बढ़कर 4,80,97,497.56 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि कुल मिलाकर निवेशकों की संपत्ति में करीब 14,733 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इससे संकेत मिलता है कि शुरुआती गिरावट के बावजूद पूरे बाजार में व्यापक स्तर पर नुकसान नहीं हुआ.

आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर

आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तीन बड़े कारक तय कर सकते हैं.

  • पहला, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव किस दिशा में जाता है.
  • दूसरा, Brent Crude Oil की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं या उनमें नरमी आती है.
  • तीसरा, बैंकिंग शेयरों में जारी गिरावट सिर्फ Profit Booking तक सीमित रहती है या आगे भी बिकवाली का दबाव बना रहता है.

अगर वैश्विक तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है. वहीं अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ते हैं, तो निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.