शेयर बाजार में गुरुवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब 2 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए. सेंसेक्स 1,500 अंक से ज्यादा उछलकर 78,800 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी ने 400 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाकर 24,400 का स्तर पार कर लिया. बाजार की इस तेजी से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 8 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया.
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कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है. ब्रेंट क्रूड का भाव 94 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है, जबकि अमेरिकी क्रूड यानी WTI भी 87 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा है. एक ही दिन में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 9 से 10 फीसदी की गिरावट आई है.भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में तेल सस्ता होने से भारत का आयात बिल घट सकता है. इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होने की उम्मीद है. तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा एयरलाइन, ऑटो और पेंट कंपनियों को भी मिल सकता है.
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव का असर
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजे भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आए हैं. इन चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ी बढ़त मिली है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगा है.अमेरिका में ईरान के साथ जारी संघर्ष और महंगे तेल को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ी है. चुनावी नतीजों के बाद अब मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने और युद्ध खत्म होने की उम्मीदें बढ़ी हैं. अगर ऐसा होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और राहत मिल सकती है.इसके अलावा, ट्रंप की नीतियों और टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता कम होने की उम्मीद भी बाजार को सहारा दे रही है. इससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में भारत की स्थिति मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट
कच्चे तेल की कीमतें घटने के साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई है. अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड घटकर करीब 4.8 फीसदी और 30 साल की बॉन्ड यील्ड 5.2 फीसदी पर आ गई है.बॉन्ड यील्ड में गिरावट से शेयर बाजार में निवेश का आकर्षण बढ़ता है. इसकी वजह यह है कि जब बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न कम होता है, तो निवेशक बेहतर रिटर्न की उम्मीद में शेयर बाजार का रुख कर सकते हैं.
रुपये को मिली मजबूती
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में भी सुधार देखने को मिला. रुपया करीब 0.3 फीसदी मजबूत होकर 94.35 के स्तर पर खुला. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रुपये के लिए राहत की खबर है, क्योंकि इससे भारत को तेल आयात करने के लिए कम डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं.
विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी
बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की खरीदारी भी तेजी की एक बड़ी वजह है. NSE के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने एक ही दिन में 7,284 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे हैं. विदेशी निवेशक इस हफ्ते लगातार भारतीय बाजार में पैसा लगा रहे हैं.विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार में भरोसा बढ़ा है और बड़ी कंपनियों के शेयरों को खरीदारी का सहारा मिला है.
AI शेयरों की तेजी पर ब्रेक, भारतीय बाजार को फायदा
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के बाद दुनियाभर के AI और सेमीकंडक्टर शेयरों में दबाव देखने को मिला है. दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4 फीसदी से ज्यादा टूट गया, जबकि जापान और ताइवान के बाजारों में भी गिरावट आई.AI कंपनियों के शेयरों में तेजी को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ रही है. ऐसे में भारतीय बाजार को कुछ राहत मिल रही है, क्योंकि भारतीय शेयर बाजार में AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों का दबदबा अमेरिकी और कुछ एशियाई बाजारों के मुकाबले कम है.
किन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी?
गुरुवार को सेंसेक्स के ज्यादातर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली. इंडिगो का शेयर 6 फीसदी से ज्यादा उछलकर सबसे बड़े गेनर्स में शामिल रहा. मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, L&T, अल्ट्राटेक सीमेंट, HDFC बैंक और ICICI बैंक जैसे शेयरों में भी 2 से 4 फीसदी तक की तेजी रही.सेक्टर के लिहाज से ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी देखने को मिली. वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी रही.
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