Crude Oil Price: ट्रंप की धमकी और तेल सस्ता होने की भविष्यवाणी के बीच नीचे आया ब्रेंट क्रूड

तनीषा त्यागी

• 10:36 AM • 23 Sep 2026

अमेरिका-ईरान बातचीत के संकेत, ट्रंप के बयान और होर्मुज पर राहत की उम्मीद के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से नीचे आया. अब बाजार अगली दिशा के संकेत देख रहा है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की खबर से बाजार नरम पड़ा

ब्रेंट क्रूड फिसलकर 100 डॉलर से नीचे करीब 98 डॉलर पर आया

डब्ल्यूटीआई क्रूड भी गिरा और लगभग 89 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा

Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है. अमेरिका-ईरान तनाव के चलते लंबे समय से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा ब्रेंट क्रूड अब इस स्तर के नीचे आ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तेल की कीमतों में जल्द बड़ी गिरावट आने की भविष्यवाणी और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला है. एक तरफ ट्रंप ने ईरान को समझौता नहीं होने की स्थिति में कड़े परिणाम भुगतने की चेतावनी दी. वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अमेरिका और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच हुई अहम बैठक को सकारात्मक बताया. इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जल्द तेज गिरावट आने का दावा किया. इन घटनाक्रमों का असर तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया.

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ट्रंप ने तेल की कीमतों पर क्या कहा

डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरान और चल रहे संघर्ष को लेकर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने ईरान को एक बेहतर देश बनने का मौका देने की बात कही, लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं होता है तो अमेरिका की कार्रवाई बेहद सख्त हो सकती है. इसके कुछ ही समय बाद ट्रंप की ओर से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए. उन्होंने बताया कि अमेरिकी अधिकारियों और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच एक अहम बैठक हुई है. ट्रंप के मुताबिक, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने ईरान डील को लेकर मध्यस्थों के साथ बैठक की. उन्होंने इस बातचीत को करीब तीन घंटे तक चलने वाली बैठक बताया और कहा कि कई चीजें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही हैं. यानी एक ही घटनाक्रम में ईरान को कड़ी चेतावनी और बातचीत की संभावना, दोनों संकेत सामने आए.

तेल की कीमतों में जल्द गिरावट का दावा

ईरान के साथ तनाव और ऊर्जा बाजार में बनी अनिश्चितता के बीच ट्रंप ने कच्चे तेल की कीमतों को लेकर भी बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि तेल की कीमतें जल्द तेजी से नीचे जाएंगी. यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई थी. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों की वजह से तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही थी. ट्रंप के इस बयान के बाद बाजार में यह उम्मीद मजबूत हुई कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है और बातचीत आगे बढ़ती है, तो कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बनी चिंता भी कम हो सकती है.

Brent Crude 100 डॉलर के नीचे

ट्रंप के बयान और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की खबरों का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में दिखाई दिया. बुधवार को खबर लिखे जाने तक Brent Crude करीब 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया. यानी लंबे समय से 100 डॉलर के ऊपर बना हुआ ब्रेंट क्रूड इस अहम स्तर के नीचे फिसल गया. इसके अलावा WTI Crude भी गिरकर करीब 89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. वहीं Murban Crude की कीमत भी कमजोर हुई और यह करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करती नजर आई. इस तरह तीनों प्रमुख क्रूड बेंचमार्क में दबाव देखने को मिला.

अमेरिका-ईरान बातचीत से क्यों बदला बाजार का मूड

कच्चे तेल की कीमतों पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का सीधा असर पड़ रहा है. संघर्ष बढ़ने की स्थिति में बाजार को सप्लाई बाधित होने का डर रहता है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है. इसके उलट अगर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है और तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं, तो सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता घट सकती है. यही वजह है कि ट्रंप के बयान के बाद तेल बाजार में गिरावट देखने को मिली. एक तरफ अमेरिका की ओर से ईरान पर दबाव बनाए रखने की बात सामने आई, तो दूसरी तरफ उच्चस्तरीय बातचीत की खबर ने बाजार को एक संभावित राजनयिक समाधान का संकेत दिया. इसके साथ ही ट्रंप का यह दावा कि तेल की कीमतें जल्द तेजी से गिरेंगी, बाजार की धारणा पर असर डालता हुआ नजर आया.

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान की बड़ी शर्त

इस पूरे घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दों में से एक बना हुआ है. ईरान की ओर से इसे खोलने को लेकर भी एक शर्त सामने आई है. मंगलवार को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया गया कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकता है. ईरान की ओर से यह भी कहा गया कि अमेरिका को आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह राजनयिक समाधान चाहता है. इसके साथ ही बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए एक समयसीमा तय करने की बात भी सामने आई. इसका मतलब साफ है कि होर्मुज को लेकर स्थिति सिर्फ सैन्य तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बातचीत और कूटनीतिक समाधान से भी जोड़ा जा रहा है.

Hormuz Strait इतना महत्वपूर्ण क्यों है

होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी किसी भी खबर का असर कच्चे तेल के बाजार पर तुरंत पड़ सकता है. अगर इस रास्ते से तेल की आवाजाही सामान्य रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता अपेक्षाकृत कम रहती है. लेकिन अगर यहां किसी तरह की रुकावट की आशंका बढ़ती है, तो बाजार में सप्लाई बाधित होने का डर पैदा होता है. यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी हर खबर पर तेल बाजार की नजर बनी हुई है. अगर ईरान और अमेरिका के बीच कोई समझौता होता है और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की स्थिति बनती है, तो बाजार में सप्लाई को लेकर बनी चिंता कम हो सकती है. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है.

पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने तेल सस्ता होने का दावा किया

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इस तरह का बयान पहली बार नहीं आया है. इससे पहले भी वह ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ने, संघर्ष खत्म होने या ईरान पर कड़ा दबाव बनाने के बीच तेल की कीमतों में गिरावट के संकेत देते रहे हैं. इस बार भी उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है. फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत वास्तव में किस दिशा में आगे बढ़ती है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान की शर्त पर कोई प्रगति होती है या नहीं.

अब आगे तेल की कीमतों के लिए क्या अहम होगा

कच्चे तेल के बाजार के लिए आने वाले समय में अमेरिका-ईरान बातचीत सबसे अहम संकेतों में से एक होगी. अगर बातचीत आगे बढ़ती है और तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं, तो तेल की सप्लाई को लेकर बनी चिंता घट सकती है. इससे कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बन सकता है. दूसरी तरफ अगर बातचीत विफल होती है या सैन्य तनाव फिर बढ़ता है, तो सप्लाई को लेकर चिंता दोबारा बढ़ सकती है. ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण रहेगी. फिलहाल तस्वीर यह है कि कुछ समय पहले 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा Brent Crude अब करीब 98 डॉलर के स्तर पर आ चुका है. WTI करीब 89 डॉलर और Murban करीब 108 डॉलर के आसपास है. यानी ट्रंप की चेतावनी, अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत और तेल की कीमतों में गिरावट, तीनों घटनाक्रम एक ही समय पर सामने आए हैं. अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि ये बातचीत आगे कितनी सफल होती है और इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर कितने समय तक बना रहता है.

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