BRICS का नया Payment Network तैयार! UPI से Digital Currency तक, अब बदलेगा Payment का खेल

चिराग ठाकुर

• 02:12 PM • 14 Sep 2026

iBRICS 2026 में DART चार्टर साइन होने के बाद BRICS देशों ने स्थानीय मुद्रा भुगतान, तेज डिजिटल नेटवर्क और नए निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने का संकेत दिया.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

चार्टर का लक्ष्य BRICS देशों के बीच भुगतान सस्ता और तेज बनाना

स्थानीय मुद्रा में लेनदेन बढ़ाकर डॉलर पर निर्भरता घटाने पर जोर

वर्किंग ग्रुप उद्योग स्तर पर भुगतान तालमेल के लिए सचिवालय बनेगा

BRICS देशों के बीच कारोबार, निवेश और सीमा पार भुगतान को आसान बनाने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है. iBRICS 2026 शिखर सम्मेलन में iBRICS DART चार्टर पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इसका मकसद डिजिटल एसेट्स, फास्ट-पेमेंट नेटवर्क और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन को बढ़ावा देना है.

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इस पहल के जरिए BRICS देशों के बीच पूंजी के प्रवाह को तेज करने, भुगतान की लागत घटाने और डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम करने की कोशिश की गई है.

डिजिटल भुगतान को लेकर बड़ा कदम

iBRICS DART चार्टर के तहत BRICS DART वर्किंग ग्रुप की स्थापना की गई है. इसे BRICS भुगतान कार्य बल के लिए उद्योग स्तर के सचिवालय के तौर पर काम करने की दिशा में तैयार किया गया है.

चार्टर में सीमा पार भुगतान से जुड़ी लागत को कम करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक संप्रभुता को बनाए रखते हुए स्थानीय मुद्रा में भुगतान और गैर-डॉलर भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है.

मुख्य फोकस में शामिल हैं:

स्थानीय मुद्राओं में सीमा पार भुगतान. गैर-डॉलर भुगतान नेटवर्क को मजबूत करना. डिजिटल एसेट्स और वास्तविक संपत्तियों का टोकनाइजेशन. सोने और तेल जैसी वास्तविक संपत्तियों को डिजिटल ढांचे से जोड़ना. सीमा पार लेन-देन की लागत और समय कम करना.

UPI और Pix जैसे नेटवर्क को जोड़ने पर जोर

सम्मेलन में अलग-अलग देशों के फास्ट-पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी चर्चा हुई. भारत के UPI और ब्राजील के Pix जैसे सिस्टम को CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी के साथ जोड़कर सीमा पार भुगतान को ज्यादा सहज बनाने की संभावनाओं पर विचार किया गया.

अगर ऐसी व्यवस्था बड़े स्तर पर लागू होती है, तो भविष्य में अलग-अलग देशों के बीच छोटे और बड़े भुगतान के लिए पारंपरिक मध्यस्थों पर निर्भरता कम हो सकती है.

सोवेरिन फंड्स और निवेश को एक मंच पर लाने की कोशिश

iBRICS 2026 में केवल भुगतान व्यवस्था पर ही चर्चा नहीं हुई. सम्मेलन का एक बड़ा फोकस वैश्विक सोवेरिन वेल्थ फंड्स की पूंजी को निवेश योग्य परियोजनाओं से जोड़ना भी रहा.

21 BRICS सदस्य और भागीदार देशों से जुड़े निवेशकों और परियोजना मालिकों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई.

इसके अलावा पहले दिन 'द सोवेरिन कैपिटल कॉम्पैक्ट' पर भी हस्ताक्षर किए गए. इसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ में लंबी अवधि के रणनीतिक निवेश के लिए पूंजी प्रतिबद्धताओं को मजबूत करना है.

महाराष्ट्र बन सकता है निवेश का बड़ा केंद्र

महाराष्ट्र के वित्त और नियोजन राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार विदेशी सोवेरिन वेल्थ फंड्स के निवेश को आकर्षित करने के लिए नीतियों और एक रोडमैप पर काम कर रही है.

उनके मुताबिक, सरकार का लक्ष्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाकर ज्यादा से ज्यादा निवेश महाराष्ट्र तक लाना है.

आगे क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

iBRICS के सह-अध्यक्ष दुष्यंत खन्ना के मुताबिक, BRICS देशों के पास बड़ी मात्रा में वैश्विक पूंजी और भंडार हैं, लेकिन चुनौती इस पूंजी को बैंक योग्य परियोजनाओं से जोड़ने की रही है. इस सम्मेलन में निवेशकों और परियोजना मालिकों को एक ही मंच पर लाने की कोशिश की गई.

अब इस पहल की असली अहमियत इसके क्रियान्वयन से सामने आएगी. अगर स्थानीय मुद्रा भुगतान, फास्ट-पेमेंट नेटवर्क और डिजिटल एसेट ढांचे के बीच बेहतर तालमेल बनता है, तो BRICS देशों के बीच व्यापार, निवेश और पूंजी के प्रवाह का एक नया रास्ता तैयार हो सकता है.