Sovereign Gold Bond: 1 फरवरी को पेश हुए आम बजट में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. सरकार ने सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए बॉन्ड पर कैपिटल गेन टैक्स की छूट को खत्म कर दिया है. यानी अब सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के सेकेंड हैंड खरीदारों को कैपिटल गेन पर टैक्स देना होगा. टैक्स में छूट केवल बॉन्ड के ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स तक ही सीमित हो गया है. चलिए विस्तार से समझते हैं पूरा मामला...
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1 अप्रैल 2026 से मार्केट से खरीदे गए सेकेंड हैंड सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर कैपिटल गेन होने पर निवेशक को टैक्स देना होगा. यानी अगर किसी निवेशक ने SGB सेकेंडरी मार्केट से खरीदा है, तो 1 अप्रैल, 2026 के बाद मैच्योरिटी पर रिडीम करेंगे तो कीमत के अंतर पर कैपिटल गेन टैक्स देना होगा. अभी तक ऐसे निवेशकों का भी टैक्स नहीं देना होता था.
क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?
- ये RBI द्वारा जारी सरकारी गोल्ड बॉन्ड होता है.
- इसमें असली सोना खरीदने की जरूरत नहीं होती.
- सोने की कीमत के हिसाब से रिटर्न मिलता है.
- सालाना 2.5% ब्याज अलग से मिलता है.
- 8 साल में इसकी मैच्योरिटी होती है.
पूरे मामले को रमेश और सुरेश की कहानी से समझिए
रमेश ने RBI से 2026 में SGB खरीदा. 8 साल बाद 2034 में मैच्योरिटी पर इसे रिडीम किया. ऐसे में रमेश को कोई Capital Gains Tax नहीं देना होगा. वहीं सुरेश ने 2029 में स्टॉक एक्सचेंज से SGB खरीदा. 2034 में बेचा. इसमें कैपिटल गेन पर सुरेश पर टैक्स देना होगा.
सरकार के इस फैसले से किसको फायदा, किसको घाटा?
फायदा
लॉन्ग टर्म निवेशक
खुद के नाम से ओरिजिनल इश्यू में खरीदने वाले
नुकसान
ट्रेडर्स
सेकेंडरी मार्केट बायर्स
कंपनियां/फर्म
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