विदेशी निवेशक यानी FPI भारतीय शेयर बाजार से इस साल अब तक 1 लाख 29 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच अब भारतीय बाजार नियामक सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी में हैं.
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FPIs के लिए आसान होगी एंट्री
SEBI और RBI मिलकर विदेशी निवेशकों के भारत में प्रवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने पर काम कर रहे हैं. SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि दोनों नियामक मिलकर उन अड़चनों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी वजह से विदेशी निवेशकों का पंजीकरण और निवेश शुरू करने की प्रक्रिया लंबी हो जाती है. आसान भाषा में समझें तो अगर कोई विदेशी निवेशक भारत में पैसा लगाना चाहता है, तो उसके लिए कागजी कार्रवाई और मंजूरी की प्रक्रिया को कम जटिल और तेज बनाने की कोशिश हो रही है.
अभी एंट्री की प्रक्रिया काफी मुश्किल
भारत में किसी विदेशी निवेशक को FPI के तौर पर निवेश शुरू करने के लिए सिर्फ सेबी से ही काम नहीं चलता. उसे भारतीय रिजर्व बैंक, टैक्स डिपार्टमेंट, एक्सचेंज, बैंकों और दूसरे संबंधित संस्थानों के साथ भी तालमेल करना पड़ता है.अलग-अलग संस्थाओं के साथ अलग प्रक्रिया होने की वजह से खासकर पहली बार भारत में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए पूरी प्रक्रिया जटिल हो सकती है. इसी समस्या को कम करने के लिए सेबी ने सितंबर 2025 में भारत बाजार पहुंच पोर्टल शुरू किया था. इसका मकसद विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश से जुड़ी जानकारी और पंजीकरण की प्रक्रिया एक ही डिजिटल मंच पर आसानी से उपलब्ध कराना था. अब SEBI और RBI इस दिशा में आगे बढ़ते हुए आपसी तालमेल और बेहतर करने पर काम कर रहे हैं.
कम कागजी कार्रवाई, तेज होगा रजिस्ट्रेशन
RBI और SEBI उन नियमों और प्रक्रियाओं से जुड़ी अड़चनों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी वजह से विदेशी निवेशकों का रजिस्ट्रेशन और भारत के बाजार में प्रवेश करने की प्रक्रिया लंबी हो सकती है.इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में विदेशी निवेशकों के लिए कम कागजी कार्रवाई, बेहतर तालमेल और तेज रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था बनाने की कोशिश हो रही है. हालांकि इसका ये मतलब नहीं है कि विदेशी निवेशक भारत में पैसा लगाने के लिए मजबूर होंगे. भारत में निवेश करना है या नहीं, इसका फैसला विदेशी निवेशक अपने संभावित रिटर्न, रिस्क, ब्याज दरों, रुपये की चाल और दुनिया के बाजारों की स्थिति को देखकर ही करेगा.
2026 में FPIs की भारी बिकवाली
दूसरी तरफ, साल 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली की है. अब तक विदेशी निवेशक 1 लाख 29 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच चुके हैं. जुलाई और अगस्त में जरूर कुछ राहत देखने को मिली थी. जुलाई में विदेशी निवेशकों ने करीब 20,200 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि अगस्त में करीब 29,630 करोड़ रुपये का निवेश किया गया. लेकिन सितंबर में एक बार फिर बिकवाली तेज हो गई. सितंबर में विदेशी निवेशकों ने करीब 35,800 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.
विदेशी निवेशक क्यों बेच रहे हैं शेयर?
पहली वजह है अमेरिका में ब्याज दर और सरकारी बांड से मिलने वाला रिटर्न. अगर अमेरिका में निवेश से बेहतर रिटर्न मिलने लगे तो विदेशी निवेशकों के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों में पैसा रखना कम आकर्षक हो सकता है. दूसरी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमत है. तेल महंगा होने पर भारत का आयात खर्च बढ़ता है. इससे महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है. तीसरी वजह रुपये की कमजोरी है. विदेशी निवेशक सिर्फ शेयर बाजार से मिलने वाले रिटर्न को नहीं देखता. वह यह भी देखता है कि अपना पैसा डॉलर में वापस ले जाने पर उसे कितना रिटर्न मिलेगा.अगर रुपया कमजोर होता है तो डॉलर के हिसाब से विदेशी निवेशक का रिटर्न प्रभावित हो सकता है. यही वजह है कि सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे अमेरिका में ब्याज दरों और सरकारी बॉन्ड के रिटर्न, कच्चे तेल की कीमत और रुपये की कमजोरी को प्रमुख कारणों में गिना गया है.
बॉन्ड मार्केट पर भी काम
SEBI और RBI का फोकस सिर्फ शेयर बाजार में विदेशी निवेश तक सीमित नहीं है. सेबी चेयरमैन ने बताया है कि दोनों नियामक बांड सूचकांकों को शेयर बाजारों पर कारोबार योग्य बनाने से जुड़े ढांचे पर भी काम कर रहे हैं. यानी विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ बांड बाजार तक उनकी पहुंच को भी बेहतर बनाने की दिशा में काम हो रहा है.
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