कैंसर की दवाएं 70% तक सस्ती हो सकती हैं, सरकार ने ट्रेड मार्जिन पर लगाई 30% की लिमिट

संदीप शर्मा

• 05:51 PM • 09 Oct 2026

केंद्र सरकार ने कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित करने का फैसला किया है. जानिए किन दवाओं की कीमतें 70% तक घट सकती हैं और मरीजों को कितनी बचत होगी.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित

कई दवाओं की कीमतें 70% तक घटने का अनुमान

मरीजों को सालाना ₹2,500 करोड़ की बचत संभव

कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई महंगी दवाओं की कीमतें जल्द कम हो सकती हैं. केंद्र सरकार ने कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 फीसदी तक सीमित करने का फैसला किया है, सरकार के इस कदम से कुछ दवाओं की अधिकतम रिटेल प्राइस यानी MRP में 20 से 70 फीसदी तक की कमी आ सकती है. इससे मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है.

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किन दवाओं पर लागू होगा नया नियम?

सरकार का ये फैसला उन कैंसर दवाओं पर लागू होगा, जो फिलहाल कीमत तय करने के सरकारी नियमों के दायरे में नहीं हैं. इनमें ब्रांडेड और जेनेरिक, देश में बनी और विदेश से इंपोर्ट की गई, पेटेंट वाली और बिना पेटेंट वाली दवाएं शामिल हो सकती हैं. हालांकि, अभी ये तय होना बाकी है कि इस नियम के तहत किन-किन दवाओं को शामिल किया जाएगा. इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत एक एक्सपर्ट कमेटी जा रही है. ये कमेटी 14 अक्टूबर तक दवाओं की लिस्ट भेज सकती है जिन पर ट्रेड मार्जिन नियम लागू होगा. जरूरत के हिसाब से इस लिस्ट में आगे बदलाव भी किया जा सकेगा.

क्या होता है ट्रेड मार्जिन?

ट्रेड मार्जिन वो अंतर होता है, जो किसी दवा को सप्लायर या स्टॉकिस्ट से खरीदने की कीमत और मरीज को बेचने की कीमत के बीच होता है. इसमें दवा के डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री से जुड़े कारोबारियों का मार्जिन शामिल होता है. नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानी NPPA के विश्लेषण में सामने आया कि प्राइस कंट्रोल के दायरे से बाहर की कैंसर दवाओं पर औसतन करीब 170 फीसदी तक ट्रेड मार्कअप है. कुछ मामलों में ये 700 फीसदी तक पहुंच जाता है. इसी वजह से सरकार को लगता है कि ट्रेड मार्जिन पर सीमा लगाने से मरीजों को महंगी दवाओं से राहत मिल सकती है.

मरीजों को कैसे मिलेगा फायदा?

इस फैसले के तहत कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 फीसदी तक सीमित होगा. इसका मतलब है कि दवा की बिक्री से जुड़े कारोबारियों को तय सीमा से ज्यादा मार्जिन नहीं मिल सकेगा. दवाओं की ज्यादातर रिटेल कीमत यानी MRP निर्माता या मार्केटिंग कंपनी तय करती है. इसलिए नए नियम के मुताबिक कंपनियों को अपनी दवाओं की MRP में कटौती करनी पड़ सकती है. हालांकि, कीमतों में कितनी कमी होगी, ये हर दवा की मौजूदा कीमत और उसके बिक्री ढांचे पर निर्भर करेगा. NPPA का अनुमान है कि इस कदम से दवाओं की MRP में करीब 20 से 70 फीसदी तक की कमी हो सकती है. इससे कैंसर के इलाज पर अपनी जेब से खर्च करने वाले मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है.

SC की टिप्पणी के बाद सरकार का कदम

कैंसर की दवाओं की कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई थी. कोर्ट ने एक ऐसी दवा की कीमत पर सवाल उठाया था, जो कथित तौर पर रिटेल विक्रेताओं को करीब 2,700 रुपये में मिल रही थी, लेकिन उसकी MRP 27,000 रुपये थी. इसके बाद सरकार ने दवाओं की कीमतों में अंतर और ज्यादा ट्रेड मार्जिन के मुद्दे पर कदम उठाया है. NPPA ने भी माना कि कैंसर की कुछ दवाओं पर बहुत ज्यादा ट्रेड मार्जिन उनकी ऊंची कीमतों की एक बड़ी वजह है. सरकार ने इस फैसले को लागू करते समय दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया है. जिन दवाओं को इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा, उनके मैन्यूफैक्चर्र को मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखना होगा, ताकि मरीजों को जरूरी दवाओं की कमी का सामना न करना पड़े.