सोचिए, अगर आपके शहर से गुजरने वाली ट्रेन को बार-बार दूसरी ट्रेन के निकलने का इंतजार न करना पड़े, तो सफर कितना आसान हो सकता है। और अगर उसी रेलवे लाइन से मालगाड़ी भी तेज रफ्तार से निकल सके, तो इसका फायदा सिर्फ यात्रियों को नहीं, बल्कि पूरे कारोबार और अर्थव्यवस्था को होता है। अब इसी दिशा में मोदी सरकार ने रेलवे को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई **कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स यानी CCEA की बैठक में रेलवे की 5 बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
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इन प्रोजेक्ट्स पर करीब 10,021 करोड़ रुपये खर्च** किए जाएंगे। और इन परियोजनाओं के तहत करीब 540 किलोमीटर नए अतिरिक्त रेलवे ट्रैक बिछाए जाएंगे। तो चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर इन पांच प्रोजेक्ट में क्या बनने वाला है और आम लोगों को इससे क्या फायदा होगा।
किन राज्यों में बनेंगे नए रेलवे ट्रैक?
इन पांचों प्रोजेक्ट का फायदा मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना को मिलेगा। सरकार ने इन परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक इन प्रोजेक्ट्स से चार राज्यों के करीब 17 जिलों को फायदा मिलेगा।अब एक-एक करके इन पांचों प्रोजेक्ट को समझते हैं।
पहला है अरक्कोनम-रेनिगुंटा तीसरी और चौथी लाइन प्रोजेक्ट, जिसकी लंबाई करीब 77 किलोमीटर होगी। दूसरा है व्हाइटफील्ड-बेंगलुरु/बंगारपेट तीसरी और चौथी लाइन, जिसकी लंबाई करीब 47 किलोमीटर है। तीसरा प्रोजेक्ट है होसुर-ओमलूर रेल लाइन का दोहरीकरण, जिसकी लंबाई करीब 147 किलोमीटर होगी। चौथा है सलेम-करूर-दिंडीगुल रेल लाइन का दोहरीकरण, करीब 159 किलोमीटर। और पांचवां है सिकंदराबाद यानी घाटकेसर से काजीपेट मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट, जिसकी लंबाई करीब 110 किलोमीटर होगी।
2,121 गांवों को फायदा
अब सबसे जरूरी बात—इसका फायदा किसे मिलेगा? सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से करीब 2,121 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।इन गांवों में रहने वाली करीब 52 लाख लोगों की आबादी को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। मतलब सिर्फ बड़े शहर ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों और गांवों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। इसके अलावा दक्षिण भारत के कई बड़े पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है। इनमें तिरुपति, तिरुत्तानी, तिरुचनूर, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होगेनक्कल फॉल्स, मेट्टूर डैम, कोडाइकनाल और यादाद्रिगुट्टा जैसे इलाके शामिल हैं।
अब इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा समझिए। रेलवे ट्रैक बढ़ाने का फायदा सिर्फ पैसेंजर ट्रेन को नहीं होता। इन रास्तों से बड़ी मात्रा में मालगाड़ियां भी चलती हैं। कोयला, सीमेंट, लोहा-स्टील, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न, पेट्रोलियम और खाद जैसी चीजें इन्हीं रेल नेटवर्क के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाई जाती हैं। नए ट्रैक बनने के बाद रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में हर साल करीब 4.7 करोड़ टन की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। यानी कंपनियों का माल ज्यादा तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सकेगा।
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