Gold Price : सोना काट देगा गदर! सेंट्रल बैंकों का बड़ा प्लान सामने आया

सौरभ दीक्षित

03 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 3 2026 5:37 PM)

सोने में हाल की गिरावट के बीच दुनिया के केंद्रीय बैंक लगातार खरीदारी कर रहे हैं. जानिए क्यों जानकार अब भी कीमतों में आगे मजबूती की उम्मीद जता रहे हैं.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

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सोने की कीमतों में लगातार उतार चढ़ाव बना हुआ है

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सोना अपने ऑल टाइम हाई से काफी नीचे गिर चुका है

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अब सोने पर सेंट्रल बैंकों का बड़ा प्लान सामने आया है

सोने और चांदी में हाल के दिनों में गिरावट के बाद यह सवाल तेज हो गया है कि क्या सोने की लंबी तेजी अब थम रही है. लेकिन ताजा रिपोर्टें बता रही हैं कि तस्वीर इतनी सीधी नहीं है. दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अब भी लगातार सोना खरीद रहे हैं, और यही बात बाजार के लिए अहम मानी जा रही है. रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक सोना सिर्फ भाव बढ़ने की उम्मीद में नहीं खरीद रहे हैं. वे अपने विदेशी मुद्रा भंडार, यानी रिजर्व, को मजबूत करने, जोखिम कम करने और अनिश्चित माहौल में सुरक्षा के लिए सोने पर भरोसा बनाए हुए हैं. इसी वजह से कई जानकार मानते हैं कि सोने की लंबी अवधि की मजबूती अभी खत्म नहीं हुई है.

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क्या है आज का भाव

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज, यानी एमसीएक्स, पर 3 जुलाई को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना 1,741 रुपये की तेजी के साथ 1,47,375 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था.

4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 3,796 रुपये की तेजी के साथ 2,37,100 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी.

बाजार में अभी क्या हो रहा है

हाल के महीनों में सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव रहा है. ऊंचे स्तर से गिरावट के बाद कई निवेशकों को लगने लगा कि सोने की तेजी कमजोर पड़ रही है. बाजार की नजर इस बात पर भी है कि अमेरिका का फेडरल रिजर्व ब्याज दरों पर क्या रुख रखता है और डॉलर कितना मजबूत रहता है.

सामने आई बड़ी रिपोर्ट 

ऑफिशियल मॉनिटरी एंड फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस फोरम, यानी ओएमएफआईएफ, की सालाना report के मुताबिक दुनिया के ज्यादातर रिजर्व मैनेजर सोने को लेकर अब भी सकारात्मक हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले एक साल में सोने की कीमत 5,000 डॉलर से 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है.

रिपोर्ट का बड़ा संकेत यह है कि केंद्रीय बैंक सोना सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं खरीद रहे हैं. उनका फोकस अपने रिजर्व को मजबूत करने पर है. इस नजरिए से सोना उनके लिए लंबी अवधि का सहारा माना जा रहा है.

क्यों सोना खरीद रहे सेंट्रल बैंक 

किसी एक मुद्रा पर निर्भरता कम करने के लिए.

जोखिम बांटने और रिजर्व को संतुलित रखने के लिए.

जरूरत पड़ने पर आसानी से इस्तेमाल करने लायक विकल्प के तौर पर.

युद्ध, देशों के बीच तनाव और अनिश्चित माहौल में सुरक्षित विकल्प के तौर पर.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की तस्वीर

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की सालाना रिपोर्ट में भी लगभग यही रुख सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक 45 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों ने कहा कि वे अगले 12 महीनों में अपने सोना भंडार को और बढ़ाएंगे. करीब 90 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि दुनिया के कुल आधिकारिक सोना भंडार आगे और बढ़ेंगे.

गोल्डमैन सैक्स का आकलन

निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स का भी कहना है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी आगे भी सोने की बड़ी ताकत बनी रह सकती है. बैंक का अनुमान है कि अगले साल सोने की कीमत करीब 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है.

आम निवेशक और केंद्रीय बैंक में फर्क

आम निवेशक अक्सर बाजार के उतार-चढ़ाव के हिसाब से खरीद और बिक्री करते हैं. इसके उलट केंद्रीय बैंक रोजाना कारोबार की तरह फैसले नहीं लेते हैं. उनका नजरिया कई साल लंबा होता है और फैसले देश की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं.

डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश

कई देश धीरे-धीरे अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर का हिस्सा कम करना चाहते हैं. ऐसे में सोना उनके लिए भरोसेमंद विकल्प बन रहा है, क्योंकि यह किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं होता है.

आपूर्ति और मांग का असर

हर साल खदानों से निकलने वाले नए सोने की मात्रा बहुत तेजी से नहीं बढ़ती है. यानी आपूर्ति सीमित रहती है. अगर दूसरी तरफ केंद्रीय बैंक लगातार खरीदारी करते रहे, तो मांग मजबूत रह सकती है और लंबे समय में कीमतों को सहारा मिल सकता है.

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, हाल की गिरावट ने बाजार में सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन बड़ी संस्थाओं की रिपोर्टें दिखाती हैं कि दुनिया के केंद्रीय बैंक अब भी सोने पर भरोसा बनाए हुए हैं. ऐसे में आगे सोने की चाल केवल ब्याज दरों और डॉलर से नहीं, बल्कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और उनकी रणनीति से भी तय होगी.