Gold Price : दुनियाभर के केंद्रीय बैंक तूफानी तेजी से खरीद रहे सोना, क्या आने वाला है कोई बड़ा संकट? जान लीजिए पूरी बात

सौरभ दीक्षित

• 02:12 PM • 05 Sep 2026

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के नए आंकड़ों में दिखा कि चीन, पोलैंड और कई देश तेजी से सोना खरीद रहे हैं. जानिए इसके पीछे की वजह और कीमतों पर पड़ने वाला असर.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

एमसीएक्स पर सोना चार सितंबर को एक हजार रुपये से ज्यादा टूटा

पोलैंड इस साल अब तक करीब नब्बे टन सोना जोड़ चुका

पोलैंड का लक्ष्य अपना कुल भंडार बढ़ाकर सात सौ टन करना

सोना सिर्फ आम आदमी की बचत का सहारा नहीं है। दुनिया के बड़े-बड़े केंद्रीय बैंक भी लगातार अपने भंडार में सोना बढ़ा रहे हैं। ताजा आंकड़े बताते हैं कि जुलाई 2026 में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने कुल 23 टन सोना खरीदा। इस खरीदारी में चीन और पोलैंड सबसे आगे रहे। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के मुताबिक, जुलाई में चीन ने करीब 20 टन सोना खरीदा, जबकि पोलैंड ने अपने भंडार में करीब 8 टन सोना जोड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दुनिया के केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीदारी क्यों कर रहे हैं? क्या यह सिर्फ विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने की रणनीति है या फिर दुनिया में बढ़ते आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर किसी बड़ी तैयारी का संकेत?

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भारत में सोने की कीमत का क्या हाल है?

भारत में भी सोने की कीमतों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। 4 सितंबर 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोपहर करीब 1 बजे 5 अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला सोना 1,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट के साथ करीब 1,54,710 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।

हालांकि, शॉर्ट टर्म में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन केंद्रीय बैंकों की तरफ से लगातार होने वाली खरीदारी सोने की लंबी अवधि की मांग के लिए अहम मानी जा रही है।

केंद्रीय बैंक आखिर सोना क्यों खरीदते हैं?

किसी भी देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार होता है। इस रिजर्व में आमतौर पर डॉलर, यूरो जैसी विदेशी करेंसी के साथ-साथ सोना भी शामिल होता है।

सोने की खासियत यह है कि यह किसी एक देश की करेंसी या सरकार पर सीधे निर्भर नहीं होता। ऐसे में अगर दुनिया में आर्थिक संकट आता है, महंगाई बढ़ती है, युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या किसी बड़ी करेंसी पर भरोसा कमजोर होता है, तो सोना केंद्रीय बैंकों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है। यही वजह है कि कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

पोलैंड इस समय केंद्रीय बैंकों की गोल्ड खरीदारी में सबसे ज्यादा चर्चा में है। साल 2026 में अब तक पोलैंड करीब 90 टन सोना खरीद चुका है।

इस खरीदारी के बाद पोलैंड के पास करीब 640 टन सोना हो गया है। देश का लक्ष्य अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाकर करीब 700 टन तक ले जाना है।

यानी पोलैंड आने वाले समय में भी सोने की खरीदारी जारी रख सकता है। यह दिखाता है कि वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की भूमिका को और मजबूत करना चाहता है। चीन भी सोने की खरीदारी में पीछे नहीं है। चीन के केंद्रीय बैंक People's Bank of China (PBOC) ने 2026 में अब तक करीब 60 टन सोना खरीदा है।

जुलाई की खरीदारी के साथ चीन लगातार 21वें महीने सोना खरीदने वाला देश बन गया है। यानी चीन का केंद्रीय बैंक करीब 21 महीनों से लगातार अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ा रहा है।

चीन के पास अब करीब 2,366 टन सोना है। यह उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 8 फीसदी है।

आधिकारिक गोल्ड रिजर्व के मामले में चीन दुनिया में करीब छठे स्थान पर है। खास बात यह है कि मई 2026 से चीन ने हर महीने 10 टन से ज्यादा सोना खरीदने की रफ्तार दिखाई है।

चेक गणराज्य समेत इन देशों ने भी खरीदा सोना

सिर्फ चीन और पोलैंड ही नहीं, दूसरे केंद्रीय बैंक भी लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं।

चेक नेशनल बैंक ने जुलाई में करीब 2 टन सोना खरीदा। वहीं कजाकिस्तान, मलेशिया और बोलीविया के केंद्रीय बैंकों ने करीब 1-1 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा। कजाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी करीब 75 फीसदी बताई गई है। यानी उसके रिजर्व में सोने का वजन काफी ज्यादा है।

केंद्रीय बैंकों की लगातार गोल्ड खरीदारी से एक बड़ा संकेत जरूर मिलता है। दुनिया के कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की भूमिका को पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण मान रहे हैं। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और प्रमुख करेंसी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व को ज्यादा विविध बनाना चाहते हैं। सोना इस रणनीति में अहम भूमिका निभा सकता है क्योंकि इसे किसी एक देश की करेंसी या वित्तीय व्यवस्था से जोड़कर नहीं देखा जाता।

सोने की कीमत पर क्या होगा असर?

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की वैश्विक मांग के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है। अगर चीन, पोलैंड और दूसरे केंद्रीय बैंक आगे भी लगातार सोना खरीदते रहते हैं, तो इससे बाजार में सोने की मांग को सपोर्ट मिल सकता है।

हालांकि, सोने की कीमत सिर्फ केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से तय नहीं होती। डॉलर की चाल, ब्याज दरें, महंगाई, वैश्विक तनाव और निवेशकों की मांग भी सोने की कीमत को प्रभावित करती है।

फिलहाल एक बात साफ है कि केंद्रीय बैंकों की गोल्ड खरीदारी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। दुनिया के कई देश अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और आने वाले महीनों में इस ट्रेंड पर बाजार की नजर बनी रहेगी।