8th Pay Commission: दिवाली बोनस का बदलेगा फॉर्मूला? 7 हजार की सीमा बढ़ाकर 21 हजार करने की मांग

तनीषा त्यागी

• 10:58 AM • 07 Sep 2026

केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस पर नई बहस तेज है. कर्मचारी संगठन 7 हजार की पुरानी गणना सीमा बढ़ाकर 21 हजार करने की मांग कर रहे हैं. अभी सरकार की मंजूरी बाकी है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

कर्मचारी संगठन 7 हजार बोनस सीमा बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं

अभी 21 हजार की नई सीमा पर सरकार ने मंजूरी नहीं दी

मौजूदा फॉर्मूले में 30 दिन का बोनस करीब 6,908 रुपये बनता है

8th Pay Commission: त्योहारी सीजन से पहले केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस को लेकर बड़ी मांग सामने आई है. 8वें वेतन आयोग को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब बोनस की गणना के पुराने फॉर्मूले में बदलाव की मांग तेज हो गई है. कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि बोनस की गणना के लिए मौजूदा 7,000 रुपये की सीमा को बढ़ाया जाए, ताकि कर्मचारियों को मिलने वाली रकम में बड़ा इजाफा हो सके. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बोनस तय करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा मौजूदा फॉर्मूला काफी पुराना है और आज की वेतन संरचना के हिसाब से इसमें बदलाव की जरूरत है. अगर सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो कई केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

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अभी किस फॉर्मूले से तय होता है बोनस

मौजूदा व्यवस्था में नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस यानी NPLB और प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस यानी PLB की गणना एक तय वेतन सीमा के आधार पर की जाती है. इसके लिए 7,000 रुपये प्रति महीने की सीमा का इस्तेमाल किया जाता है. इसका मतलब यह है कि अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है, तब भी बोनस की गणना पूरी 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर नहीं होती. मौजूदा फॉर्मूले में 7,000 रुपये को ही गणना का आधार माना जाता है. 30 दिन के बोनस के हिसाब से यह रकम करीब 6,908 रुपये से 7,000 रुपये के आसपास बैठती है. कर्मचारी संगठनों की आपत्ति इसी व्यवस्था को लेकर है.

7,000 रुपये की सीमा हटाने की मांग

कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि बोनस की गणना के लिए तय 7,000 रुपये की सीमा को हटाया जाए. इसके बजाय मौजूदा न्यूनतम बेसिक वेतन या 8वें वेतन आयोग के बाद तय होने वाली नई न्यूनतम बेसिक सैलरी को गणना का आधार बनाया जाए. अगर 7वें वेतन आयोग के तहत 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी को आधार माना जाए और 30 दिन के बोनस की गणना की जाए, तो बोनस करीब 17,763 रुपये तक पहुंच सकता है. यानी मौजूदा करीब 7,000 रुपये के मुकाबले यह रकम काफी ज्यादा होगी. हालांकि, यह एक संभावित गणना है और इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार ने इतनी बोनस राशि मंजूर कर दी है.

अब 21,000 रुपये की मांग क्यों उठी ?

बोनस की सीमा को लेकर नेशनल काउंसिल ऑफ ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी यानी NC-JCM ने अब एक और बड़ी मांग रखी है. संगठन चाहता है कि बोनस की गणना में इस्तेमाल होने वाली 7,000 रुपये की सीमा को बढ़ाकर 21,000 रुपये किया जाए. NC-JCM के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने 27 अगस्त 2026 को कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर इस मुद्दे को उठाया है. पत्र में कहा गया है कि दशहरा नजदीक है और सरकार की ओर से PLB, बोनस और एडहॉक बोनस से जुड़े आदेश जल्द जारी हो सकते हैं. ऐसे में संगठन चाहता है कि पुराने 7,000 रुपये के फिक्स्ड सीलिंग को बढ़ाकर 21,000 रुपये किया जाए. यहां एक बात समझना बेहद जरूरी है कि 21,000 रुपये की मांग का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों को 21,000 रुपये का बोनस मिलना तय हो गया है. यह कर्मचारी संगठनों की ओर से बोनस की गणना की सीमा बढ़ाने की मांग है.

21 हजार रुपये की सीमा का कनेक्शन क्या है ?

NC-JCM ने 25 अगस्त 2026 को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से जारी एक अधिसूचना का भी हवाला दिया है. इसमें 21,000 रुपये महीने तक कमाने वाले कर्मचारियों की बोनस पात्रता से जुड़ी सीमा का जिक्र किया गया है. इसी वजह से कर्मचारी संगठन सवाल उठा रहे हैं कि जब बोनस पात्रता से जुड़ी वेतन सीमा 21,000 रुपये तक हो सकती है, तो बोनस की गणना के लिए पुरानी 7,000 रुपये की सीमा क्यों बनी रहे. कर्मचारी संगठनों की कोशिश है कि बोनस की गणना की सीमा को भी मौजूदा वेतन स्तर के हिसाब से बदला जाए.

कर्मचारियों को कितना फायदा 

अगर बोनस की गणना 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी के आधार पर की जाती है, तो 30 दिन के बोनस की अनुमानित रकम करीब 17,763 रुपये बनती है. मौजूदा व्यवस्था में यही गणना करीब 6,908 रुपये के आसपास होती है. इस लिहाज से बोनस में बड़ा अंतर आ सकता है. हालांकि, वास्तविक रकम सरकार के अंतिम फैसले और लागू किए जाने वाले फॉर्मूले पर निर्भर करेगी. 8वें वेतन आयोग के संदर्भ में न्यूनतम बेसिक सैलरी को लेकर 26,000 रुपये से 34,500 रुपये तक के अनुमान भी चर्चा में हैं. अगर भविष्य में इनमें से किसी राशि को बोनस गणना का आधार बनाया जाता है, तो 30 दिन के बोनस की रकम 25,600 रुपये से ज्यादा हो सकती है. लेकिन यह भी केवल संभावित गणना है. इसे सरकार की ओर से घोषित बोनस राशि नहीं माना जाना चाहिए.

रेलवे कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है बड़ा असर

अगर बोनस गणना की सीमा बढ़ाने की मांग स्वीकार की जाती है, तो रेलवे के नॉन-गजेटेड कर्मचारियों को भी इसका फायदा मिल सकता है. इन कर्मचारियों को 78 दिन के प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस का प्रावधान है. मौजूदा गणना के आधार पर 78 दिन का बोनस करीब 17,951 रुपये बैठता है. अगर बोनस की गणना के लिए वेतन सीमा बढ़ा दी जाती है, तो यह रकम 46,000 रुपये से ज्यादा तक पहुंचने की संभावना बन सकती है. यहां भी यह आंकड़ा संभावित गणना पर आधारित है और अंतिम रकम सरकार के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी.

किन कर्मचारियों को फायदा मिल सकता है ?

बोनस की गणना में बदलाव का असर सिर्फ एक विभाग तक सीमित नहीं रहेगा. रेलवे के अलावा डाक विभाग और ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के कर्मचारियों को भी इसका फायदा मिल सकता है. इसके साथ ही अलग-अलग मंत्रालयों में काम करने वाले ग्रुप C और नॉन-गजेटेड ग्रुप B कर्मचारियों पर भी इसका असर पड़ सकता है, जिन्हें 30 दिन का एडहॉक बोनस मिलता है. यानी अगर सरकार बोनस की मौजूदा सीमा में बदलाव करती है, तो बड़ी संख्या में केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस की गणना पर इसका असर देखने को मिल सकता है.

मई की बैठक में भी उठा था मुद्दा

बोनस की सीमा बढ़ाने का मुद्दा नया नहीं है. कर्मचारी संगठनों की ओर से यह मामला पहले भी सरकार के सामने उठाया जा चुका है. 11 मई 2026 को कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई 49वीं बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी. कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, उस दौरान सरकार की ओर से कहा गया था कि बोनस की सीलिंग लिमिट में बदलाव के बाद बोनस सीलिंग से जुड़े मुद्दे पर विचार किया जाएगा. अब त्योहारी सीजन और दशहरा नजदीक होने के बीच कर्मचारी संगठनों ने एक बार फिर इस मांग को जोरदार तरीके से उठाया है.

सरकार के फैसले पर टिकी नजर

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार बोनस की गणना के लिए तय 7,000 रुपये की सीमा को बढ़ाने पर फैसला करती है या नहीं. कर्मचारी संगठन 21,000 रुपये की सीमा की मांग कर रहे हैं. अगर यह मांग स्वीकार होती है, तो बोनस की गणना का पूरा आधार बदल सकता है और मौजूदा व्यवस्था की तुलना में कर्मचारियों को ज्यादा बोनस मिल सकता है. हालांकि, फिलहाल 21,000 रुपये कोई स्वीकृत बोनस राशि नहीं है. यह कर्मचारी संगठनों की ओर से रखी गई मांग है. अंतिम फैसला सरकार की ओर से जारी होने वाले आदेश के बाद ही साफ होगा. त्योहारी सीजन से पहले अब केंद्रीय कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है. अगर बोनस फॉर्मूले में बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर कर्मचारियों को मिलने वाली त्योहारी रकम पर पड़ सकता है.

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