Charchit Chehra: MBA बीच में छोड़ा, फिलॉसफी की पढ़ाई की और अब बने WhatsApp के ग्लोबल हेड, जानिए कौन हैं कुणाल शाह!

Kunal Shah Journey : MBA बीच में छोड़कर फिलॉसफी की पढ़ाई करने वाले कुणाल शाह ने FreeCharge और CRED जैसे सफल स्टार्टअप खड़े किए और आज भारत के सबसे चर्चित उद्यमियों में गिने जाते हैं. जानिए उनकी शुरुआती जिंदगी, FreeCharge से CRED तक का सफर, नेटवर्थ, फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन और आखिर क्यों वह सुर्खियों में हैं.

Kunal Shah
Kunal Shah

रूपक प्रियदर्शी

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देश में बड़ा हल्ला मचा है कि नौकरी नहीं है, बेरोजगारी बहुत है. जिनके ऊपर नौकरी देने और बेरोजगारी दूर करने की जिम्मेदारी है वो अक्सर ये सलाह दिया करते हैं कि कहां पड़े हो एमबीए, इंजीनियरिंग के चक्कर में, कुछ अपना करो. कुणाल शाह ऐसे लोगों में से हैं जिन्होंने ऐसी सलाहें सुनने से पहले अपना रास्ता पकड़ लिया था. नौकरी नहीं करेंगे. कुछ क्रिएट करेंगे, कुछ अपना बनाएंगे, इस सपने के साथ सचमुच कुछ सालों की मेहनत और लगन से कुणाल शाह ने एक बार नहीं, बार-बार कुछ ऐसा बनाया कि जॉब करने वाले नहीं, शानदार वाइट कॉलर जॉब देने वाले बन गए. 

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लेकिन वक्त ने फिर ऐसी पलटी मारी कि सब छोड़-छाड़कर कुणाल शाह नौकरी करने चल पड़े. फेसबुक वाली कंपनी मेटा जिसके हेड मार्क जकरबर्ग हैं और जो वॉट्सऐप के भी मालिक हैं, ने कुणाल शाह को वॉट्सऐप का ग्लोबल बॉस यानी ग्लोबल सीईओ बनाया है. और ये जॉब देने के लिए कुणाल शाह से हजारों करोड़ की डील की है मेटा ने. जिस क्रेड को कुणाल शाह ने बनाया उसमें वो खुद नहीं रहेंगे लेकिन मेटा ने 8 हजार 550 करोड़ का मोटा इन्वेस्टमेंट करके कुणाल शाह को मांग लिया. मेटा के पैसे लगाने से क्रेड की वैल्यू 43 हजार करोड़ प्लस हो गई है.

दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी को झुकाकर, डील करके मेटा ज्वाइन करने वाले कुणाल शाह पिछले देश के ही नहीं, दुनिया के चर्चित चेहरा बने हैं. कुणाल शाह की कहानी ऐसे उन लोगों की छाती पर सांप लोटने जैसी है जो प्रीमियम यूनिवर्सिटीज से इंजीनियरिंग, एमबीए की डिग्रियां लिए बैठे हैं लेकिन वॉट्सऐप के ग्लोबल सीईओ की पोस्ट पर अप्वाइंट हुए एक नॉन इंजीनियर, नॉन मैनेजमेंट फिलॉसफी ग्रेजुएट कुणाल शाह. अब तक वॉट्सऐप के यूजर रहे कुणाल शाह अचानक वॉट्सऐप चलाने वाले बन गए. चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में जानिए आखिर कौन हैं इतने किस्मत वाले कुणाल शाह? मार्क जकरबर्ग ने उनमें ऐसा क्या देखा कि उन्हें वॉट्सऐप का शहंशाह बना दिया? उनकी अरबों की नेटवर्थ, शादी और फर्श से अर्श तक की पूरी कहानी. 

कौन हैं कुणाल शाह?

मुंबई की मिडिल क्लास फैमिली में पले-बढ़े 47 साल के कुणाल शाह की कहानी काफी रोचक है. ये कोई टेक जेनरेटेरेड नहीं, ह्यूमन इंटेलिजेंस की कहानी है. 30 मई 1979 को अहमदाबाद में जन्मे कुणाल शाह का गुजराती परिवार आगे चलकर बंबई शिफ्ट हुआ. पिता फॉर्मा, कॉटन के बिजनेस में थे. कुणाल ने विल्सन कॉलेज से साल 2000 में फिलॉसफी में ग्रेजुएशन किया.

परिवार के फाइनेंशियल सपोर्ट के लिए बहुत कम उम्र में छोटी-मोटी नौकरियां करने लगे. किसी बीपीओ में भी जॉब भी किया लेकिन सपने में नौकरी की हदें बहुत छोटी थीं. न कोडिंग, न कोई टेक डिग्री, न कोई मैनेजमेंट की डिग्री-इन सबके बिना कुणाल शाह चल बने सेल्फ मेड शहंशाह बनने. कीड़ा तो कुछ अपना बनाकर मार्केट का गेम बदलने का था.

MBA छोड़ की थी फिलॉसफी की पढ़ाई!

परिवार ही बिजनेसमैन का था तो उन्होंने  बिजनेस की समझ बढ़ाने के लिए 2003 में मुंबई के नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) में MBA प्रोग्राम में एडमिशन लिया. फिर महसूस होने लगा कि किताबी थ्योरी के बजाय प्रैक्टिकल बिज़नेस करना ज्यादा फायदेमंद है. इसी धुन में उन्होंने एक साल में ही MBA की डिग्री बीच में छोड़ दी.

आगे चलकर उन्होंने मैनेजमेंट बुक से नहीं, फिलॉसफी की पढ़ाई से अपनी दुनिया बदली. मार्केट के बारे में नहीं, Human Behavior और Psychology के बारे में पढ़े. वही समझ आगे चलकर उनके बिजनेस मॉडल्स की पिलर बनती गई. उन्होंने जेहन में नोट करके रख लिया कि इंडियंस को फ्री, रिवॉर्ड्स, कैशबैक कितनी जल्दी आकर्षित करते हैं.

FreeCharge से शुरू हुई कुणाल की असल कहानी!

उन्होंने कुछ छोटे-मोटे प्रयोग किए लेकिन कुणाल शाह के अतंरगी बिजनेस मॉडल और उनके सीरियल आंत्रप्रेन्योर बनने की कहानी 2010 से शुरू हुई. उस दौर में डिजिटल क्रांति जोर पकड़ रही थी. सब कुछ मोबाइल से हो रहा था. कुणाल शाह को 10 से 50 रुपये का रिचार्ज कराने के लिए लाइन में लगे लोग में मार्केट दिखा. उन्होंने रिचार्ज का पूरा सिस्टम ऑनलाइन करके मोबाइल बाजार का गेम बदल दिया.

उनके लॉन्च किए हुए FreeCharge का आइडिया था कि अगर 50 का मोबाइल रिचार्ज ऑनलाइन करेंगे, तो कूपन से 50 के वाउचर मुफ्त मिलेंगे...यानी रिचार्ज बिल्कुल मुफ्त. आइडिया इतना सुपरहिट रहा कि 2015 में स्नैपडील ने फ्रीचार्ज को करीब 2,600 करोड़ में खरीद लिया, जो उस समय का भारत का सबसे बड़ा टेक अधिग्रहण(Acquisition) था.

CRED की कहानी!

कुणाल ने FreeCharge बेच दिया लेकिन 2600 करोड़ लेकर चैन से बैठ नहीं गए. 3 साल तक मार्केट के कुछ नया लॉन्च करने के लिए रिसर्च करते रहे. वही से निकला क्रेड. 2018 में उन्होंने CRED ऐप लॉन्च किया. ये ऐप था क्रेडिट कार्ड पेमेंट की सुविधा देने का लेकिन इसमें क्या नया था. क्रेडिट कार्ड देने वालों ने पेमेंट रिसीव करने का भी सिस्टम बनाया हुआ था. एकदम सिस्टेमेटिक से इस बिजनेस में कुणाल शाह रिवॉर्ड, कैश बैक के स्लोगन के साथ घुसे और तहलका मचाकर माने. 

कुणाल शाह ने क्रेड को केवल 750+ क्रेडिट स्कोर वाले लोगों का एक्सक्लूसिव ऐप बनाया. जहां बिल चुकाने पर क्रेड कॉइन्स और प्रीमियम ब्रांड्स के रिवॉर्ड्स मिलते थे. इस आइडिया ने भारत के सबसे अमीर और प्रीमियम 1.7 करोड़ लोगों को क्रेड से जोड़ दिया. क्रेड से क्रेडिट कार्ड पेमेंट करने पर रिवॉर्ड देना शुरू किया.

कोई भी सोचेगा कि अगर क्रेड ऐप फ्री में कैशबैक और रिवॉर्ड्स दे रहा तो घाटा उठा रहा होगा. कुणाल शाह ने खुद क्रेड से पैसे कमाने के लिए एकदम शानदार शातिराना  बिजनेस माइंडसेट का इस्तेमाल किया जो आज 3 हजार 200 करोड़ का बन चुका है. क्रेड ऐप पर एंट्री सिर्फ उन्हीं को मिलती है जिनका क्रेडिट स्कोर (CIBIL) 750 से ऊपर होता है. यानी कुणाल शाह ने भारत के सबसे अमीर, प्रीमियम और समय पर बिल चुकाने वाले 1.7 करोड़ से ज्यादा लोगों को एक ही प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा कर लिया. ये प्रीमियम डेटा बैंक और फाइनेंशियल कंपनियों के लिए सोने की खान जैसा है. कुणाल ने इस 'हाई-ट्रस्ट' यूजर बेस को दिखाकर ही दुनिया भर के बड़े इंवेस्टर्स से क्रेड के लिए फंड जुटाया. 

कितना है कुणाल शाह का नेटवर्थ?

बिजनेस और स्टार्टअप की दुनिया में फाउंडर्स सैलरी से अमीर नहीं बनते. कंपनी के शेयर्स (इक्विटी) की वैल्यू बढ़ने से बनते हैं. शुरू-शुरू में कुणाल शाह खुद क्रेड से सिर्फ 15 हजार की सैलरी लेते थे. क्रेड की वैल्यूएशन बढ़कर जब 37,500 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई, तो क्रेड में कुणाल शाह के अपने शेयर्स (Equity) की कीमत हजारों करोड़ रुपये हो गई.

इसी वैल्यूएशन के दम पर उनकी व्यक्तिगत नेटवर्थ आज आसमान छू रही है. कुणाल शाह ने जो बनाया उससे भरपूर पैसा मतलब 15 हजार करोड़ बना डाले. कई सारे स्टार्ट अप में पैसे लगाकर एंजेल इन्वेस्टर बन गए. अनएकेडमी, रेजरपे, स्पिनी जैसे करीब 250 स्टार्टअप्स कुणाल शाह के एंजेल इन्वेस्टमेंट से चल रहे हैं. उन्हें स्टार्टअप्स का गॉडफादर भी कहा जाता है.

कैसे होता है क्रेड को फायदा?

बाहर से लगता है कि क्रेड बस क्रेडिट कार्ड पेमेंट का गेटवे है. असली बिजनेस बैंकों और कंपनियों के फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स बेचना है. जब क्रेड यूजर ऐप के जरिए कोई लोन जैसा कोई प्रोडक्ट लेता है तो क्रेड को बैंकों और NBFCs से क्रेड को भारी कमीशन और ब्याज का हिस्सा मिलता है. क्रेड की 90% से ज्यादा कमाई इसी डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल से आती है. क्रेड के अमीर कस्टमर ही मार्केट के असेट हैं. जब कोई क्रेड कॉइन्स वाउचर का इस्तेमाल करके ऐप पर मौजूद किसी ब्रैंड का प्रोडक्ट खरीदता है तब भी क्रेड को फायदा होता है. बड़े ब्रैंड खुशी-खुशी अपने प्रोडक्ट क्रेड पर लिस्ट करते हैं. इसमें क्रेड, कस्टमर, कंपनियां-सबका फायदा होता है. 

कुणाल शाह ने क्रेड को एक ऐसे लेवल पर पहुंचा दिया जहां से क्रेड लगातार प्रॉफिट कमाने लगा है. क्रेड के हर फीचर को Monetize करके कुणाल शाह इंडियन कॉरपोरेट वर्ल्ड के अमीर और शक्तिशाली लीडर्स बने. आज उसी हुनर से वाट्स अप को लीड करने जा रहे हैं. 

क्यों कुणाल को बनाया गया वॉट्सऐप का शहंशाह?

हम इंडियंस और वॉट्सऐप का अजबे रिश्ता है. भारत में वॉट्सऐप के 50 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं. ये बात रिसर्च से साबित हुई कि हम इंडियंस ही हैं जो रोज सुबह 6 से 9 बजे के बीच करोड़ों गुड मॉर्निंग मैसेजेस भेजकर इंटरनेट पर ट्रैफिक जाम लगाते हैं. कुणाल शाह ऐसी किसी समस्या का समाधान करने वॉट्सऐप नहीं बुलाए गए. कुछ पक्का नहीं कह सकते लेकिन क्या पता कुणाल शाह ऐसे करोड़ों गुड मॉर्निंग मैसेजेस, इमोजी से वॉट्सऐप की कमाई बढ़ाने वाले हों. 

ऑन सीरियस नोट कुणाल शाह का सबसे बड़ा टास्क वॉट्सऐप से मेटा के लिए रेवेन्यू बढ़ाना होगा. वॉट्सऐप बिजनेस और मर्चेंट पेमेंट्स (UPI, नेट बैंकिंग और कार्ड पेमेंट्स) का दायरा बढ़ाएंगे ताकि गूगल पे और फोनपे को कड़ी टक्कर दी जा सके. वॉट्सऐप चैनल्स और अपडेट्स टैब में विज्ञापन मॉडल्स, पेड सब्सक्रिप्शन, एआई (AI) फीचर्स को लागू करने और यूजर डेटा प्राइवेसी से जुड़ी सरकारी चुनौतियों को संभालने का काम करेंगे. 7 साल सीईओ रहे विल कैथकार्ट की जगह लिया है कुणाल शाह ने. क्रेड में कुणाल की जगह मितेन संपत अंतरिम सीईओ बने हैं.

फिटनेस फ्रीक के भी आइकन है कुणाल

कुणाल शाह ने बार-बार सिर्फ अपने बिजनेस आइडियाज को ही री-इंजीनियर नहीं किया, बल्कि उन्होंने खुद पर भी अप्लाई किया. क्रेड लॉन्च के समय कुणाल शाह का वजन काफी ज्यादा था. लगातार काम के दबाव, अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स और ट्रैवल की वजह से उनकी सेहत पर असर पड़ रहा था.

उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि जैसे वे बिजनेस को 'डेटा' और 'लॉजिक' से देखते हैं, वैसे ही उन्होंने अपने शरीर को देखना शुरू किया. कैलोरी इनटेक और बर्न करने के मैथ को समझा. कड़ी डाइट, रेगुलर वर्कआउट और कड़े अनुशासन के दम पर कुणाल शाह ने लगभग 35 किलो वजन घटाया. सोशल मीडिया पर कुणाल के बिजनेस से कम नहीं होती उनके बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन की चर्चा. स्टार्ट्अप के ही नहीं, फिटनेस फ्रीक के भी आइकन हैं.

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