कई महीनों की सुस्ती के बाद चीन की कच्चे तेल (Crude Oil) की खरीद फिर तेज हो सकती है. बाजार से जुड़े विश्लेषकों और ट्रेडर्स का मानना है कि चीन 2026 की चौथी तिमाही से अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) को दोबारा भरना शुरू कर सकता है. इसका असर वैश्विक तेल बाजार और कीमतों पर पड़ सकता है.
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रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की खरीद बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं. इनमें ईंधन निर्यात नियमों में कुछ राहत, रिफाइनरियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता और वेस्ट एशिया से अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर मिल रहा कच्चा तेल शामिल है. हाल के हफ्तों में चीन की कई रिफाइनरियों ने सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात से खरीद बढ़ाई है.
रणनीतिक भंडार पर जोर
ऊर्जा सलाहकार कंपनी एफजीई नेक्सैन्टईसीए के मुताबिक, चीन चौथी तिमाही से अपने रणनीतिक तेल भंडार में रोज करीब 8 लाख बैरल कच्चा तेल जोड़ सकता है. इसका मकसद भविष्य में आपूर्ति संकट से बचाव करना है.
वेस्ट एशिया की स्थिति रहेगी अहम
बाजार जानकारी देने वाली कंपनी कप्लर की कच्चे तेल की वरिष्ठ विश्लेषक मूयू शू के मुताबिक, आगे की खरीद काफी हद तक वेस्ट एशिया की स्थिति पर निर्भर करेगी. खास तौर पर यह देखा जाएगा कि हॉर्मुज मार्ग से तेल की आपूर्ति सामान्य रहती है या उसमें और सुधार होता है. अगर आपूर्ति मजबूत रही और कीमतें काबू में रहीं, तो चीनी रिफाइनरियां अपने कारोबारी भंडार भी तेजी से भर सकती हैं.
किन देशों से बढ़ी खरीद
हाल की कारोबारी गतिविधियां बताती हैं कि चीन ने वेस्ट एशिया के बड़े उत्पादक देशों से खरीद बढ़ाई है. स्वतंत्र रिफाइनर रोंगशेंग पेट्रोकेमिकल ने सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात से कच्चा तेल खरीदा है. वहीं सिनोपेक समूह की व्यापार इकाई यूनिपेक ने भी संयुक्त अरब अमीरात से अतिरिक्त खरीद की है.
चौथी तिमाही में आयात बढ़ने का अनुमान
एनर्जी ऐस्पेक्ट्स के मुताबिक, समुद्री रास्ते और पाइपलाइन दोनों के जरिए चीन का कुल तेल आयात चौथी तिमाही में युद्ध से पहले के स्तर तक पहुंच सकता है.
• जुलाई में चीन का आयात करीब 76 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकता है, जो जून के मुकाबले लगभग 19% ज्यादा होगा.
• नवंबर तक यह आंकड़ा 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन के पार जा सकता है.
कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है.
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें युद्ध के दौरान बने ऊंचे स्तर से नीचे आ चुकी हैं, लेकिन हाल के कारोबारी सत्रों में यह फिर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंची है. अगर चीन बड़े पैमाने पर खरीद शुरू करता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को और सहारा मिल सकता है.
पहले घट चुके हैं भंडार
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में रणनीतिक भंडार के इस्तेमाल की अनुमति दिए जाने के बाद चीन के तेल भंडार में लगातार कमी आई थी. कप्लर का अनुमान है कि अभी चीन के रणनीतिक और कारोबारी तेल भंडार मिलाकर करीब 1.2 अरब बैरल हैं. कंपनी के मुताबिक, मई की शुरुआत से अब तक भंडार में औसतन 5.85 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आई है. वहीं एनर्जी ऐस्पेक्ट्स का कहना है कि जून में यह गिरावट 10 लाख बैरल प्रतिदिन से भी ज्यादा रही.
कुल मिलाकर, अगर चीन चौथी तिमाही से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल की खरीद शुरू करता है, तो वैश्विक मांग बढ़ सकती है. इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव बन सकता है और आने वाले महीनों में ऊर्जा बाजार की दिशा काफी हद तक चीन की खरीद रणनीति पर निर्भर करेगी.
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