चीन ने विदेशी निवेश नियम कड़े किए, एआई और चिप सेक्टर पर सख्त नजर

चीन ने विदेशी निवेश, तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञों की आवाजाही पर नए सुरक्षा नियम लागू किए हैं. एआई, चिप और ग्रीन टेक सेक्टर पर इसका सबसे ज्यादा असर हो सकता है.

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नए नियमों के बाद सीमा पार तकनीकी सहयोग की गहन समीक्षा होगी

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सरकार जरूरत पड़ने पर संदिग्ध निवेश और लेनदेन को रोक सकेगी

चीन ने विदेशों में होने वाले निवेश को लेकर नए और सख्त National Security Rules लागू कर दिए हैं. ये नियम बुधवार से प्रभावी हो गए हैं. माना जा रहा है कि अमेरिका के साथ बढ़ती टेक्नोलॉजी प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच चीन ने यह बड़ा कदम उठाया है.

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इन नए नियमों के तहत अब चीन सरकार विदेशों में होने वाले निवेश, तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञों की आवाजाही पर पहले से ज्यादा नजर रखेगी. सरकार का कहना है कि देश से बाहर होने वाले निवेश को अब "राष्ट्रीय सुरक्षा की व्यापक अवधारणा" के अनुरूप होना होगा. साथ ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होगा.

AI, सेमीकंडक्टर और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा खास फोकस

चीन लंबे समय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, कंप्यूटर चिप्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों को अपनी आर्थिक और रणनीतिक ताकत का आधार मानता है. यही वजह है कि सरकार इन क्षेत्रों में विकसित होने वाली तकनीकों और निवेश पर ज्यादा नियंत्रण चाहती है.

बीजिंग का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI और एडवांस्ड चिप्स वैश्विक प्रतिस्पर्धा तय करेंगे. ऐसे में इन क्षेत्रों से जुड़ी तकनीक, पूंजी और विशेषज्ञता का विदेशों में अनियंत्रित प्रवाह राष्ट्रीय हितों के लिए खतरा बन सकता है.

सरकार को मिले व्यापक अधिकार

नए नियमों के तहत चीन सरकार को यह अधिकार मिल गया है कि वह किसी भी विदेशी निवेश, तकनीकी ट्रांसफर या अन्य सीमा-पार गतिविधि की समीक्षा कर सके. अगर किसी निवेश या लेन-देन से राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका होगी, तो सरकार उस पर रोक भी लगा सकती है.

यानी अब केवल निवेश ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी सेवाएं और तकनीकी सहयोग भी सरकार की निगरानी के दायरे में आएंगे.

तकनीकी विशेषज्ञों पर भी रहेगी नजर

पहले चीन की पाबंदियां मुख्य रूप से सामान और डेटा के निर्यात तक सीमित थीं. लेकिन नए नियमों के बाद इनका दायरा और बढ़ा दिया गया है.

अब विदेशों में तकनीकी विशेषज्ञ भेजना, विदेशी कंपनियों को ट्रेनिंग देना, तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराना या विदेश में रिसर्च से जुड़ी गतिविधियां भी सरकार की समीक्षा के दायरे में आ सकती हैं.

इसका मतलब है कि अब केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि तकनीकी ज्ञान और विशेषज्ञता का विदेशों में जाना भी राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखा जाएगा.

Meta-Manus डील से मिला था संकेत

चीन पहले भी सीमा-पार निवेश को लेकर सतर्क रुख अपनाता रहा है. इसी साल अप्रैल में चीन की शीर्ष आर्थिक योजना संस्था ने Meta की AI स्टार्टअप Manus में निवेश की कोशिश को रोक दिया था.

Manus की स्थापना चीन से जुड़े उद्यमियों ने की थी, लेकिन बाद में कंपनी का मुख्यालय सिंगापुर में स्थापित किया गया. चीन को आशंका थी कि इस तरह का निवेश संवेदनशील AI तकनीक को विदेशी कंपनियों के प्रभाव में ला सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि उसी तरह की घटनाओं ने नए नियमों का रास्ता तैयार किया.

विदेशी कंपनियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

इन नए नियमों को लेकर कई विदेशी निवेशकों और टेक कंपनियों ने चिंता भी जताई है. उनका कहना है कि चीन की टेक इंडस्ट्री पहले से ही वैश्विक बाजारों के साथ गहराई से जुड़ी हुई है. अगर निवेश और तकनीकी सहयोग पर ज्यादा नियंत्रण लगाया गया, तो इससे कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं.

साथ ही विदेशी कंपनियों के लिए यह समझना भी मुश्किल हो सकता है कि कौन-सी गतिविधि राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में आएगी और कौन-सी नहीं.

अमेरिकी आयोग ने भी जताई चिंता

अमेरिका-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग (US-China Economic and Security Review Commission) ने भी इन नियमों को लेकर चिंता जाहिर की है.

आयोग का कहना है कि चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई कानूनों की तरह इन नियमों में भी अधिकारियों को काफी व्यापक अधिकार दिए गए हैं. ऐसे में यह तय करना कि किस मामले को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा, पूरी तरह सरकारी एजेंसियों के विवेक पर निर्भर करेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी कंपनियों के लिए कानूनी जोखिम और अनिश्चितता बढ़ सकती है.

क्या होगा असर?

विशेषज्ञों के अनुसार, नए नियमों का सबसे ज्यादा असर AI, सेमीकंडक्टर, ग्रीन टेक्नोलॉजी और हाई-टेक उद्योगों पर पड़ सकता है. चीन इन क्षेत्रों में अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखना चाहता है और संवेदनशील तकनीकों के विदेश जाने पर कड़ी निगरानी रखना चाहता है.

हालांकि, दूसरी ओर निवेशकों का मानना है कि अगर नियमों का दायरा बहुत व्यापक हुआ, तो इससे चीन की टेक कंपनियों की वैश्विक पहुंच और विदेशी निवेश के अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं.

कुल मिलाकर, नए राष्ट्रीय सुरक्षा नियम यह संकेत देते हैं कि चीन अब आर्थिक विकास के साथ-साथ तकनीकी सुरक्षा और रणनीतिक हितों को भी समान प्राथमिकता दे रहा है.

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