सोने की कीमतों में हाल की गिरावट से निवेशकों में बेचैनी है. इसी बीच कनाडा की निवेश और एसेट मैनेजमेंट कंपनी स्प्रॉट ने कहा है कि सोना जरूरत से ज्यादा गिर चुका है. कंपनी के मुताबिक बाजार में सोना अब ऐसी स्थिति में है, जहां से आने वाले हफ्तों में वापसी की गुंजाइश बन सकती है.
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हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि तुरंत तेज उछाल तय नहीं है. कीमतों में मजबूती के लिए किसी बड़े कारण की जरूरत होगी. इसमें अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की घोषणा, मिडिल ईस्ट में तनाव, या बॉन्ड मार्केट में बड़ा झटका जैसे कारण शामिल हो सकते हैं.
भारत में आज सोना और चांदी का भाव
23 जुलाई को दोपहर करीब डेढ़ बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना 1307 रुपये गिरकर 1,44,373 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था.
इसी समय 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 4109 रुपये गिरकर 2,22,800 रुपये प्रति किलो पर थी.
एक नजर में बड़ी बातें
• स्प्रॉट का कहना है कि सोना जरूरत से ज्यादा बिक चुका है.
• कंपनी के मुताबिक कई तकनीकी संकेत एक जैसी तस्वीर दिखा रहे हैं.
• 200 दिन की औसत कीमत (200-Day Moving Average) के मुकाबले सोना कमजोर स्तर पर है.
• रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त के आसपास सोना अक्सर निचला स्तर बनाता है.
• शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव और दबाव बने रहने की आशंका भी जताई गई है.
स्प्रॉट की रिपोर्ट में क्या कहा गया
स्प्रॉट सोना, चांदी, तांबा, यूरेनियम और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े बाजारों में निवेश और रिसर्च करती है. कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, सोने की चाल को समझने वाले कई तकनीकी तरीके इस समय यह बता रहे हैं कि बाजार में सोना जरूरत से ज्यादा बिक चुका है.
रिपोर्ट के मुताबिक, जब सोना अपनी 200 दिन की औसत कीमत के करीब 90 फीसदी स्तर तक आता है, तब उसे अक्सर सहारा मिलता है. इस बार कीमत उस स्तर से भी नीचे चली गई है. कंपनी का कहना है कि तकनीकी नजर से अब सोने को और नीचे धकेलना पहले की तुलना में आसान नहीं दिखता.
वापसी के लिए क्या चाहिए
स्प्रॉट की रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ तकनीकी कमजोरी से तेजी की गारंटी नहीं बनती. कीमत बढ़ने के लिए किसी बड़े घटनाक्रम की जरूरत हो सकती है. रिपोर्ट में फेडरल रिजर्व की बड़ी घोषणा, मिडिल ईस्ट में नया तनाव, या बॉन्ड मार्केट में झटके जैसी वजहों का जिक्र है, जो निवेशकों को फिर सुरक्षित निवेश की तरफ मोड़ सकते हैं.
अगस्त और सितंबर पर क्यों है नजर
रिपोर्ट में कहा गया है कि इतिहास के आधार पर सोना अक्सर अगस्त के आसपास निचला स्तर बनाता है. पिछले साल भी अगस्त के आखिर में ऐसा ही देखने को मिला था, जिसके बाद सोने में तेज बढ़त आई थी. इसी आधार पर कुछ जानकार अगस्त या सितंबर से पहले बाजार में बड़ा मोड़ आने की संभावना देख रहे हैं.
पॉल वोंग ने क्या वजह बताई
स्प्रॉट के मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट पॉल वोंग के अनुसार, असली सवाल सिर्फ सोने की कीमत का नहीं, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था का है. उनके मुताबिक इस समय अमेरिका पर करीब 40 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है. बीते एक साल में यह कर्ज करीब 3.8 ट्रिलियन डॉलर बढ़ा है. उन्होंने यह भी कहा कि अब अमेरिका का ब्याज चुकाने का खर्च उसके रक्षा बजट से भी ज्यादा हो गया है.
पॉल वोंग के अनुसार, सरकारों के सामने दो मुश्किल रास्ते होते हैं. एक, ब्याज दरें बहुत ज्यादा बढ़ाई जाएं, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है. दूसरा, मुद्रा की कीमत धीरे-धीरे कमजोर होने दी जाए. इसे करेंसी डीबेसमेंट (Currency Debasement) कहा जाता है. आसान शब्दों में, जब ज्यादा पैसा छपता है, महंगाई बढ़ती है और मुद्रा की खरीदने की ताकत घटती है, तब सोने जैसी सीमित संपत्ति की अहमियत बढ़ सकती है.
लंबी अवधि की कहानी क्या है
पॉल वोंग का कहना है कि लंबी अवधि में सोने की कहानी खत्म नहीं हुई है. उनके मुताबिक दुनिया में सप्लाई चेन बदल रही हैं, अलग-अलग देश अपने यहां फैक्ट्रियां बढ़ा रहे हैं, ऊर्जा भंडारण पर जोर है, धातुओं का भंडार बढ़ाया जा रहा है और सरकारें ज्यादा टैक्स लगा रही हैं. उनका कहना है कि इन बातों का असर महंगाई पर पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंकों के सामने बड़ी चुनौती महंगाई को काबू में रखना और सरकारों के बढ़ते कर्ज को संभालना है. अगर कर्ज संभालने के लिए सिस्टम में ज्यादा पैसा आता है, तो मुद्रा कमजोर हो सकती है. ऐसी स्थिति में निवेशक फिर सोने की तरफ लौट सकते हैं.
दूसरी तरफ क्या जोखिम हैं
पॉल वोंग ने यह भी साफ किया है कि शॉर्ट टर्म में सोने में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. अगर डॉलर मजबूत रहता है या ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता बढ़ती है, तो सोने पर कुछ समय तक दबाव बना रह सकता है. यानी रिपोर्ट में तेजी की संभावना के साथ जोखिम का संकेत भी दिया गया है.
निष्कर्ष
कुल मिलाकर स्प्रॉट और पॉल वोंग का कहना है कि हाल की गिरावट सोने की कहानी का अंत नहीं मानी जानी चाहिए. कंपनी के मुताबिक तकनीकी स्तर पर सोना कमजोर जरूर दिख रहा है, लेकिन बढ़ता सरकारी कर्ज, महंगाई और कमजोर मुद्रा जैसे लंबे कारण अब भी इसके पक्ष में हैं. वहीं शॉर्ट टर्म में दबाव और उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया गया है. रिपोर्ट के हिसाब से यह एक बाजार विश्लेषण है, गारंटी नहीं. निवेश का फैसला अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता को देखकर ही करना चाहिए.
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