अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन की असली सोना खरीद आधिकारिक आंकड़ों से काफी ज्यादा हो सकती है. अगर यह अनुमान सही निकलता है, तो इसका असर सिर्फ चीन पर नहीं बल्कि दुनिया के सोना बाजार पर भी पड़ सकता है.
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रिपोर्ट का सबसे बड़ा संकेत यह है कि बाजार में एक बड़ा खरीदार लगातार सक्रिय हो सकता है. ऐसे में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, चीन की ओर से अतिरिक्त खरीद की कोई आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है.
गोल्डमैन सैक्स का दावा क्या है
रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 में चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने आधिकारिक तौर पर 10 टन सोना खरीदने की जानकारी दी थी. लेकिन बैंक का अनुमान है कि असली खरीद इससे कहीं ज्यादा हो सकती है.
गोल्डमैन सैक्स ने लंदन ओटीसी बाजार के आंकड़ों के आधार पर कहा है कि चीन ने मई में 48 टन से ज्यादा सोना खरीदा हो सकता है. यह आधिकारिक आंकड़े से करीब 4.8 गुना ज्यादा है. बैंक ने इसे अनुमान बताया है, न कि पक्की पुष्टि.
• मई 2026 में आधिकारिक खरीद 10 टन बताई गई. • अनुमानित असली खरीद 48 टन से ज्यादा हो सकती है. • यह आधिकारिक आंकड़े से करीब 4.8 गुना ज्यादा है. • चीन ने अतिरिक्त खरीद की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
चीन ज्यादा सोना क्यों खरीद सकता है
विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया के कई देश अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार के लिए सिर्फ अमेरिकी डॉलर पर निर्भर नहीं रहना चाहते. साल 2022 में रूस के विदेशी मुद्रा भंडार पर लगे प्रतिबंधों के बाद कई देशों ने अपने रिजर्व को ज्यादा सुरक्षित बनाने की कोशिश तेज की है.
गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि चीन भी इसी रणनीति के तहत तेजी से सोना खरीद रहा है. मतलब, सोना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि रिजर्व को सुरक्षित रखने का एक तरीका भी बन रहा है.
सिर्फ चीन नहीं, दूसरे केंद्रीय बैंक भी खरीद रहे हैं सोना
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने कुल 41 टन सोना खरीदा. इनमें चीन की आधिकारिक खरीद 10 टन दर्ज की गई. गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि कई बार पूरी खरीद तुरंत आधिकारिक रिजर्व में नहीं दिखती, इसलिए असली खरीद और घोषित आंकड़ों में फर्क हो सकता है.
सोने की कीमत पर क्या असर पड़ सकता है
अगर बाजार में कोई बड़ा खरीदार लगातार सोना खरीदता रहे, तो कीमतों में बड़ी गिरावट आना मुश्किल हो जाता है. गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद ने सोने की कीमतों के नीचे एक मजबूत सहारा बना दिया है. यानी डॉलर मजबूत होने या ब्याज दरें ऊंची रहने पर भी सोने में लंबी गिरावट टिकना आसान नहीं होगा.
जोखिम भी बने हुए हैं
सोने के लिए हर खबर अच्छी नहीं है. अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रखता है, तो डॉलर मजबूत रह सकता है. मजबूत डॉलर आमतौर पर सोने की कीमत पर दबाव बनाता है, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता. इसी वजह से आने वाले महीनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.
क्या चीन अपनी खरीद छिपा रहा है
इस सवाल का अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं है. गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में यह नहीं कहा है कि चीन पक्के तौर पर अपनी सोना खरीद छिपा रहा है. बैंक ने सिर्फ इतना कहा है कि असली खरीद आधिकारिक आंकड़ों से ज्यादा हो सकती है.
• कुछ खरीद दूसरी सरकारी संस्थाओं के जरिए हुई हो सकती है. • रिजर्व का पूरा ब्योरा तुरंत सार्वजनिक नहीं किया जाता हो सकता है. • ओटीसी बाजार की खरीद बाद में आधिकारिक रिजर्व में जोड़ी जाती हो सकती है.
इनमें से किसी भी संभावना की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. यही वजह है कि रिपोर्ट को संकेत की तरह देखा जा रहा है, अंतिम सच की तरह नहीं.
गोल्डमैन सैक्स अब भी सोने को लेकर सकारात्मक क्यों है
बैंक ने 2026 के अंत तक सोने का लक्ष्य 4,900 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस बरकरार रखा है. उसका मानना है कि अगर केंद्रीय बैंकों की खरीद जारी रहती है और दुनिया में तनाव बना रहता है, तो सोने की लंबी तेजी अभी खत्म नहीं हुई है.
भारत के निवेशकों के लिए क्या मतलब है
अगर आप अगले कुछ महीनों में सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. वहीं लंबी अवधि के लिए यह बात अहम है कि दुनिया के बड़े खरीदार, यानी केंद्रीय बैंक, अब भी सोने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि चीन की अतिरिक्त खरीद को लेकर दावा बाजार में चर्चा बढ़ा सकता है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में सोने के बाजार पर नजर रखना जरूरी रहेगा, और निवेश का फैसला सिर्फ एक रिपोर्ट के आधार पर नहीं करना चाहिए.
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