सोने की कीमतें इस समय 4000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिके रहने के लिए जूझ रही हैं. बाजार में कुछ लोगों को लग रहा है कि सोने की तेजी अब धीमी पड़ रही है. लेकिन बीएमओ कैपिटल मार्केट्स की नई रिपोर्ट कहती है कि चीन की लगातार खरीदारी से तस्वीर अभी बदली नहीं है.
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रिपोर्ट के मुताबिक, चीन चुपचाप बड़े पैमाने पर सोना जमा कर रहा है और अगर यही रफ्तार रही तो अगले 5 साल में वह अमेरिका के बराबर पहुंच सकता है या उससे आगे भी निकल सकता है. रिपोर्ट का कहना है कि इसका असर सिर्फ सोने की कीमतों पर नहीं, बल्कि डॉलर की पकड़ और दुनिया के वित्तीय संतुलन पर भी पड़ सकता है.
चीन के सोने के भंडार पर क्या कहती है रिपोर्ट
बीएमओ कैपिटल मार्केट्स के मुताबिक, चीन के पास सोने की असली तस्वीर सरकारी आंकड़ों से बड़ी हो सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीन के ऊपर मौजूद चीन का कुल सोना भंडार करीब 30000 टन तक पहुंच चुका है. यह दुनिया के कुल सोने का करीब 13 फीसदी है. तुलना में, अमेरिका के पास करीब 15 फीसदी सोना है. यानी दोनों के बीच का फासला अब काफी कम रह गया है.
रिपोर्ट का आकलन है कि अगर चीन इसी तरह खरीदारी करता रहा तो करीब 5 साल में वह अमेरिका के बराबर पहुंच सकता है या उससे आगे निकल सकता है.
भारत में आज सोना और चांदी का भाव
28 जुलाई को दोपहर करीब 1:30 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना 963 रुपये की गिरावट के साथ 1,42,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. वहीं 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 3946 रुपये की गिरावट के साथ 2,17,227 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी.
चीन इतनी तेजी से सोना क्यों खरीद रहा है
रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह डॉलर पर निर्भरता घटाना है. चीन चाहता है कि उसकी मुद्रा युआन पर दुनिया का भरोसा बढ़े. मजबूत सोना भंडार किसी भी मुद्रा की साख बढ़ाने में अहम माना जाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के पास अभी करीब 5200 टन सोना है. अगर चीन अमेरिका जैसी स्थिति तक पहुंचना चाहता है, तो उसे अभी 2500 से 3000 टन और सोना खरीदना पड़ सकता है. वहीं अगर वह अपनी अर्थव्यवस्था और मनी सप्लाई के हिसाब से अमेरिका जैसा सोना भंडार बनाना चाहता है, तो उसे करीब 18000 टन सोना रखना होगा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले महीने चीन ने 15 टन सोना खरीदा. यह अक्टूबर 2023 के बाद उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीद थी. इस साल अब तक वह अपने आधिकारिक सोना भंडार में 40 टन से ज्यादा सोना जोड़ चुका है.
रिपोर्ट की मुख्य बातें
चीन का कुल सोना भंडार करीब 30000 टन बताया गया है.दुनिया के कुल सोने में चीन की हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी है.अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी बताई गई है.पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के पास करीब 5200 टन सोना है.पिछले महीने चीन ने 15 टन सोना खरीदा.इस साल अब तक चीन 40 टन से ज्यादा सोना जोड़ चुका है.
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन सिर्फ सोना खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहता. वह सोने की कीमत तय करने वाले बड़े देशों में भी जगह बनाना चाहता है. इसके लिए हॉन्गकॉन्ग को इंटरनेशनल गोल्ड हब के रूप में तैयार किया जा रहा है. वहां नई क्लियरिंग और सेटलमेंट व्यवस्था बनाई जा रही है. साथ ही शंघाई गोल्ड एक्सचेंज को मजबूत किया जा रहा है और फ्यूचर्स तथा ओटीसी बाजार में कारोबार बढ़ाने की कोशिश हो रही है.
रिपोर्ट का कहना है कि चीन चाहता है कि आगे चलकर सिर्फ लंदन और न्यूयॉर्क ही नहीं, बल्कि बीजिंग और हॉन्गकॉन्ग भी सोने की कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाएं. बीएमओ कैपिटल मार्केट्स का मानना है कि पश्चिमी देशों में मांग कमजोर रहने के बावजूद चीन और एशिया की मजबूत खरीदारी सोने की कीमतों को बड़ी गिरावट से बचाए हुए है.
आगे क्या देखना होगा
कुल मिलाकर, रिपोर्ट चीन की सोना रणनीति को लंबी आर्थिक तैयारी के रूप में देखती है. इसका मकसद सोना जमा करना, युआन की साख बढ़ाना और वैश्विक वित्तीय असर मजबूत करना बताया गया है. अगर आने वाले वर्षों में चीन की खरीदारी इसी रफ्तार से जारी रहती है, तो सोने के बाजार का संतुलन बदल सकता है और इसका असर कीमतों से लेकर डॉलर की ताकत तक दिख सकता है.
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