चीन 22 महीने से सोना खरीद रहा, क्या इससे और महंगा होगा गोल्ड

सौरभ दीक्षित

• 06:59 PM • 09 Sep 2026

चीन लगातार 22 महीने से सोना खरीद रहा है. डॉलर पर कम निर्भर रहने की सोच, अगस्त की तेजी और भारत की नरम खरीद ने इस ट्रेंड पर नजर बढ़ाई है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

चीन के भंडार में सोने की हिस्सेदारी अभी करीब 8 फीसदी है

ताजा आंकड़ों में चीन के गोल्ड रिजर्व में 6.5 लाख औंस बढ़े

कई देश अब सिर्फ डॉलर पर निर्भर रहने से बचना चाहते हैं

सोने की कीमत जब बढ़ती है तो आम तौर पर हमारी नजर ज्वेलरी खरीदने वालों पर जाती है। लेकिन असली खेल सिर्फ आम लोगों की खरीदारी से तय नहीं होता।सोने की कीमत पर दुनिया के सेंट्रल बैंकों की खरीदारी का भी बहुत बड़ा असर होता है। और इस समय इस खेल में सबसे ज्यादा चर्चा चीन की हो रही है।क्योंकि चीन पिछले 22 महीनों से लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में सोना जोड़ रहा है। अब सवाल है कि चीन आखिर इतना सोना खरीद क्यों रहा है? क्या वह आने वाले समय के लिए तैयारी कर रहा है? और क्या इसका असर भारत पर भी पड़ेगा? आइए पूरी कहानी आसान भाषा में समझते हैं।

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चीन की ताबड़तोड़ खरीदारी

चीन का सेंट्रल बैंक यानी People's Bank of China यानी PBOC लगातार सोना खरीद रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक चीन के गोल्ड रिजर्व में करीब 6.5 लाख औंस की बढ़ोतरी हुई है।यानी चीन ने सोना खरीदने का सिलसिला फिर जारी रखा। और खास बात ये है कि यह लगातार 22वां महीना है जब चीन ने अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा किया है।अब जरा इस आंकड़े को समझिए। चीन के पास करीब 2,366 टन सोना है। उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी करीब 8 फीसदी है।इस हिसाब से चीन दुनिया में सबसे ज्यादा सोना रखने वाले देशों में भी शामिल है।

 लेकिन चीन इतना सोना खरीद क्यों रहा है? इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं।सबसे बड़ी वजह है कि दुनिया के कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ डॉलर पर निर्भर नहीं रहना चाहते।क्योंकि डॉलर के मुकाबले सोना एक अलग तरह की सुरक्षा देता है। इसे आप ऐसे समझिए।अगर किसी देश के पास बहुत ज्यादा डॉलर या अमेरिकी सरकारी बॉन्ड हैं और भविष्य में डॉलर कमजोर होता है, तो उस देश के रिजर्व की वैल्यू पर असर पड़ सकता है।लेकिन सोना किसी दूसरे देश की देनदारी नहीं है। इसी वजह से कई सेंट्रल बैंक अपने रिजर्व में सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं। और चीन भी इसी ट्रेंड का हिस्सा दिखाई देता है।

सोने पर दबाव

 अगस्त में सोने की कीमत भी तेजी से बढ़ी अब कहानी का दूसरा हिस्सा समझिए। इस साल ज्यादातर समय सोने की कीमतों पर दबाव रहा। लेकिन अगस्त में सोने ने जोरदार वापसी की।कीमतों में करीब 10 फीसदी की तेजी आई। इसके पीछे कई वजहें थीं।अमेरिका में सरकारी कर्ज को लेकर चिंता, महंगाई की चिंता और डॉलर के कमजोर पड़ने की आशंका ने निवेशकों को सोने की तरफ आकर्षित किया।यानी जब लोगों को लगता है कि करेंसी या बॉन्ड से जुड़ा जोखिम बढ़ रहा है, तो वे सोने को सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखने लगते हैं। अब सबसे जरूरी सवाल भारत क्या कर रहा है?

भारत भी पिछले कुछ वर्षों में अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाने वाले देशों में रहा है।लेकिन अभी जो तस्वीर सामने आ रही है, उसमें भारत की खरीदारी की रफ्तार में कुछ बदलाव देखने को मिल रहा है।यानी जहां चीन लगातार आक्रामक तरीके से सोना जमा कर रहा है, वहीं भारत की खरीदारी में पहले के मुकाबले थोड़ी नरमी दिखाई दे रही है।इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भारत सोने से दूर हो गया है।कुल मिलाकर एक बात साफ है चीन लगातार 22 महीने से सोना खरीद रहा है और दुनिया के कई सेंट्रल बैंक भी गोल्ड रिजर्व बढ़ाने में लगे हैं। अब अगर यह ट्रेंड आगे भी जारी रहा, तो सोने के लिए लंबी अवधि में यह एक मजबूत सपोर्ट बन सकता है। लेकिन निवेशकों के लिए असली सवाल यही रहेगा क्या सोने की कीमतों में आने वाली तेजी के पीछे सिर्फ डर है, या दुनिया की रिजर्व पॉलिसी भी बदल रही है? और शायद यही आने वाले समय में सोने की सबसे बड़ी कहानी होगी।