चीन ने सितंबर में खरीदा 23 टन सोना, 2023 के बाद सबसे बड़ी मासिक खरीद; फ्रांस-इटली से बस इतना पीछे

सौरभ दीक्षित

• 07:33 PM • 10 Oct 2026

चीन ने सितंबर 2026 में 23 टन सोना खरीदकर सितंबर 2023 के बाद अपनी सबसे बड़ी मासिक खरीदारी की है। इसके साथ चीन का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व बढ़कर 2,410 टन हो गया है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना लगातार 23 महीनों से सोना खरीद रहा है। अब चीन फ्रांस और इटली के गोल्ड रिजर्व के करीब पहुंच गया है। जानिए चीन इतनी बड़ी मात्रा में सोना क्यों खरीद रहा है, दुनिया के गोल्ड रिजर्व की रैंकिंग में क्या बदलाव हो सकता है और इसका भारत में सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है।

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न्यूज़ हाइलाइट्स

चीन के केंद्रीय बैंक ने 23 टन सोना जोड़ा

लगातार 23 महीने से सोना खरीद रहा चीन

आधिकारिक सोना खरीद 103 टन तक पहुंच गई

चीन के केंद्रीय बैंक ने सितंबर 2026 में अपने गोल्ड रिजर्व में 23 टन सोना जोड़ा है। सितंबर 2023 के बाद यह उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीद बताई गई है। लगातार 23 महीने से सोना खरीद रहा चीन अब अपने कुल आधिकारिक गोल्ड रिजर्व को 2,410 टन तक पहुंचा चुका है। इस खरीदारी के साथ वह फ्रांस और इटली जैसे देशों के और करीब आ गया है। दुनिया में सोने की खरीदारी को लेकर चीन की रणनीति लगातार चर्चा में है। देश का केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) अपने गोल्ड रिजर्व में लगातार इजाफा कर रहा है। सितंबर में 23 टन सोना खरीदने के साथ चीन ने हाल के महीनों में खरीदारी की रफ्तार बनाए रखी है। इससे पहले जुलाई और अगस्त 2026 में भी चीन ने हर महीने 20 टन सोना खरीदा था।

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द कोबेसी लेटर की ओर से वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के हवाले से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, सितंबर की खरीद के बाद 2026 में चीन की आधिकारिक सोना खरीद 103 टन तक पहुंच गई है। वहीं, उसके कुल गोल्ड रिजर्व का आकार बढ़कर रिकॉर्ड 2,410 टन हो गया है।

लगातार 23 महीने से सोना खरीद रहा चीन

चीन के केंद्रीय बैंक की सोने की खरीदारी एक-दो महीने की गतिविधि नहीं है। PBOC लगातार 23 महीनों से अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहा है। सितंबर में 23 टन की खरीदारी इस सिलसिले में अब तक की सबसे बड़ी मासिक खरीद में से एक है। केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अलग-अलग तरह की संपत्तियां रखते हैं। इनमें विदेशी मुद्राओं में रखी संपत्तियों के साथ सोना भी शामिल होता है। सोने को लंबे समय से एक महत्वपूर्ण रिजर्व संपत्ति माना जाता है। इसकी एक खास बात यह है कि यह किसी दूसरे देश की सरकार या संस्था का कर्ज नहीं होता। यही वजह है कि कई केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाकर अलग-अलग तरह की संपत्तियों पर निर्भरता कम करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, चीन की खरीदारी के पीछे उसकी सटीक रणनीति या हर खरीद के समय का कारण केवल इन आंकड़ों से तय नहीं किया जा सकता।

फ्रांस और इटली के गोल्ड रिजर्व के करीब पहुंचा चीन

चीन के गोल्ड रिजर्व में लगातार हो रही बढ़ोतरी का एक बड़ा पहलू यह है कि वह दुनिया के सबसे ज्यादा आधिकारिक सोना रखने वाले देशों की सूची में ऊपर पहुंचने के करीब है। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका और जर्मनी के बाद इटली और फ्रांस दुनिया के सबसे बड़े आधिकारिक गोल्ड रिजर्व रखने वाले देशों में शामिल हैं। चीन करीब 2,410 टन सोने के साथ पांचवें स्थान पर है। इस तरह चीन इटली से लगभग 42 टन और फ्रांस से करीब 27 टन पीछे है। अगर चीन इसी तरह सोना खरीदता रहा और दूसरे देशों के गोल्ड रिजर्व में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, तो वह भविष्य में फ्रांस और इटली से आगे निकल सकता है। हालांकि, यह तय नहीं है कि चीन कब तक इन देशों को पीछे छोड़ेगा। यह उसकी आगे की खरीदारी और दूसरे देशों के रिजर्व में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।

सोने की कीमतों के बीच क्यों अहम है चीन की खरीदारी?

चीन की यह खरीदारी ऐसे समय में सामने आई है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। केंद्रीय बैंक की लगातार खरीदारी इस बात का संकेत है कि सोना अब भी दुनिया के कई देशों के रिजर्व मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। द कोबेसी लेटर ने चीन की खरीदारी को कीमतों में गिरावट के दौरान सोना जमा करने की रणनीति से जोड़कर देखा है। हालांकि, केवल खरीद के आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि चीन ने जानबूझकर कीमत गिरने का इंतजार किया या उसकी खरीदारी का यही मुख्य उद्देश्य था। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की मांग को प्रभावित कर सकती है, लेकिन कीमतें सिर्फ इसी एक वजह से तय नहीं होतीं। अमेरिकी डॉलर की चाल, ब्याज दरें, निवेशकों की मांग और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी सोने की कीमतों पर असर डालती हैं।

भारत के लिए क्या मायने हैं?

चीन की बढ़ती सोने की खरीदारी भारत के लिए भी अहम है, क्योंकि भारत में सोना निवेश और आभूषणों की मांग का बड़ा हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत बढ़ने या घटने का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और आयात लागत भी भारत में सोने की कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि, चीन के गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि भारत में सोने की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी। घरेलू कीमतों पर कई कारकों का एक साथ असर पड़ता है।

कुल मिलाकर, चीन की सितंबर में 23 टन सोने की खरीद और उसका लगातार 23 महीने तक गोल्ड रिजर्व बढ़ाना यह दिखाता है कि सोना उसके आधिकारिक रिजर्व पोर्टफोलियो में महत्वपूर्ण बना हुआ है। 2,410 टन के भंडार के साथ चीन अब फ्रांस और इटली के काफी करीब है। लेकिन वह इन देशों को कब पीछे छोड़ेगा, यह उसकी आगे की खरीदारी और वैश्विक गोल्ड रिजर्व में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।