सरकार ने 4 चीनी मूल की कंपनियों को बिजली टेंडर में छूट दी, पावर शेयरों में आया भूचाल

न्यूज तक

• 02:23 PM • 05 Jul 2026

केंद्र ने भारत में फैक्ट्री वाली चार चीनी मूल की कंपनियों को दो साल के लिए सरकारी बिजली टेंडर में छूट दी है. फैसले के बाद पावर शेयरों पर दबाव दिखा.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

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छूट सिर्फ उन कंपनियों को मिली जिनकी भारत में फैक्ट्री है

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यह मंजूरी अभी केवल दो साल के लिए मान्य रहेगी

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बढ़ती बिजली मांग ने ट्रांसमिशन उपकरणों की जरूरत काफी बढ़ा दी

भारत और चीन के रिश्तों में गलवान घाटी की घटना के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला था. केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं और सरकारी परियोजनाओं में उनकी हिस्सेदारी लगभग बंद हो गई थी. लेकिन अब करीब छह साल बाद सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने पावर सेक्टर के निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. केंद्र सरकार ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग करने वाली चार चीनी मूल की कंपनियों को सरकारी बिजली परियोजनाओं के टेंडर में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है. इस फैसले के बाद पावर इक्विपमेंट सेक्टर के कई बड़े शेयरों में एक ही दिन में 5 से 9 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई. निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सरकार ने यह फैसला क्यों लिया और इसका भारतीय कंपनियों पर क्या असर पड़ सकता है.

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किन चार कंपनियों को मिली मंजूरी?

24 जून को वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक चार चीनी मूल की कंपनियों को सरकारी बिजली परियोजनाओं के टेंडर में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई है. इन कंपनियों में शामिल हैं.

  • TBEA Energy.
  • Nanjing Electric India.
  • New Northeast Electric India.
  • Taikai Electric India.

हालांकि यह मंजूरी सभी चीनी कंपनियों के लिए नहीं है. सरकार ने केवल उन्हीं कंपनियों को राहत दी है, जिनकी भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट मौजूद है.

अनुमति के साथ सरकार ने रखी बड़ी शर्त

सरकार की ओर से दी गई यह छूट सीमित दायरे में है. आदेश के मुताबिक केवल वही कंपनियां सरकारी बिजली परियोजनाओं में हिस्सा ले सकेंगी, जिनका उत्पादन भारत में होता है. इसके अलावा यह मंजूरी स्थायी नहीं बल्कि केवल दो साल के लिए वैध रहेगी. यानी चीन की सभी कंपनियों पर लगी पाबंदियां खत्म नहीं की गई हैं, बल्कि कुछ चुनिंदा कंपनियों को सीमित अवधि के लिए राहत दी गई है.

आखिर सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

सरकार के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह देश में तेजी से बढ़ रही बिजली की जरूरत मानी जा रही है. भारत में Renewable Energy क्षमता लगातार बढ़ रही है. Solar और Wind Power प्रोजेक्ट्स को National Grid से जोड़ने के लिए बड़ी संख्या में Transmission Lines, Substations, High Voltage Transformers और Gas Insulated Switchgear यानी GIS जैसे उपकरणों की जरूरत पड़ रही है. इसी आवश्यकता को देखते हुए Power Ministry ने जनवरी में सरकार से अनुरोध किया था कि जिन विदेशी कंपनियों की भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है, उन्हें सरकारी बिजली परियोजनाओं में बोली लगाने की अनुमति दी जाए. अब सरकार ने उसी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

फैसले के बाद शेयर बाजार में क्यों मची हलचल?

सरकार के आदेश के बाद निवेशकों को लगा कि सरकारी बिजली परियोजनाओं के टेंडर में अब मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा हो जाएगा. अब भारतीय कंपनियों को सरकारी ऑर्डर हासिल करने के लिए अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है. यदि टेंडर में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है तो कीमतों पर दबाव आ सकता है और कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ सकती है. इसी आशंका के चलते शुक्रवार को पावर इक्विपमेंट सेक्टर के कई शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली.

  • Hitachi Energy का शेयर करीब 8 फीसदी टूट गया.
  • CG Power में लगभग 7 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई.
  • GE Vernova T&D करीब 9 फीसदी गिरकर Midcap Index का सबसे बड़ा लूजर बन गया.
  • Thermax और BHEL में भी 4 से 6 फीसदी तक की कमजोरी देखने को मिली.
  • GE Power India और TD Power Systems जैसे Smallcap शेयरों में भी 5 से 7 फीसदी तक गिरावट आई.
  • Nifty Energy Index भी 1 फीसदी से अधिक गिरकर बंद हुआ.

क्या भारतीय कंपनियों के सामने बढ़ेगी चुनौती?

सरकार की मंजूरी पाने वाली कंपनियां भारत के लिए नई नहीं हैं. इनका पहले से देश में मैन्युफैक्चरिंग बेस मौजूद है. TBEA Energy Extra High Voltage Transformers बनाती है. Nanjing Electric High Voltage Projects के लिए Insulators और GIS Equipment तैयार करती है. वहीं Taikai Electric भी High Voltage Grid Equipment का निर्माण करती है. यानी जिन उत्पादों में अब तक भारतीय कंपनियों की मजबूत मौजूदगी थी, अब उन्हीं क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है.

क्या भारतीय कंपनियों को नुकसान होगा?

इस सवाल का जवाब पूरी तरह हां या नहीं में देना आसान नहीं है. एक तरफ सरकारी टेंडरों में अब पहले से ज्यादा कंपनियां हिस्सा लेंगी. इससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और कुछ ऑर्डर भारतीय कंपनियों के हाथ से निकल सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ भारत आने वाले वर्षों में Transmission Infrastructure पर बड़े पैमाने पर निवेश करने की तैयारी में है. देश की बिजली मांग लगातार बढ़ रही है और Renewable Energy क्षमता का भी तेजी से विस्तार हो रहा है. इसका मतलब यह है कि बाजार का आकार भी पहले से बड़ा होता जा रहा है. ऐसे में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ-साथ कारोबार के नए अवसर भी बढ़ सकते हैं.

निवेशकों को अब किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

अगर आपने BHEL, CG Power, Hitachi Energy या इस सेक्टर की अन्य कंपनियों में निवेश किया है, तो केवल एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने की जरूरत नहीं है. आने वाले समय में यह देखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा कि.

  • क्या इन चार कंपनियों को बड़े सरकारी ऑर्डर मिलते हैं.
  • भारतीय कंपनियों की Order Book पर कितना असर पड़ता है.
  • कंपनियों के Margin और Profitability में कोई दबाव दिखाई देता है या नहीं.
  • Market Share में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है या नहीं.

यही संकेत आगे चलकर बताएंगे कि इस सरकारी फैसले का वास्तविक असर कितना बड़ा है.

फिलहाल तस्वीर क्या कहती है?

सरकार ने केवल चार ऐसी चीनी मूल की कंपनियों को राहत दी है, जिनकी भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट मौजूद है. यह अनुमति भी केवल दो साल के लिए दी गई है. इस फैसले पर शेयर बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया जरूर नकारात्मक रही है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे भारतीय कंपनियों के कारोबार पर बड़ा असर पड़ेगा. अब निवेशकों और बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर सरकारी ऑर्डर, कंपनियों के मुनाफे और उनके Market Share पर आने वाले महीनों में कितना दिखाई देता है.