सोने की कीमतों में उतार चढ़ाव के बीच चीन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. पिछले कुछ दिनों से यह बात तेजी से फैल रही थी कि चीन ने सोने की ट्रेडिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है. लेकिन उपलब्ध जानकारी बताती है कि मामला पूरा बैन का नहीं है. चीन के कुछ बड़े बैंक आम ग्राहकों के लिए उधार लेकर सोने में बड़े सौदे करने की सुविधा बंद कर रहे हैं. इस कदम का असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है. खासकर छोटी अवधि में दबाव दिख सकता है. वहीं लंबी अवधि में तस्वीर अलग रह सकती है, क्योंकि चीन में असली सोने की मांग बनी रह सकती है. इस पूरे घटनाक्रम में 24 जुलाई की तारीख को भी अहम बताया जा रहा है.
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आज सोने और चांदी का भाव
एमसीएक्स पर 6 जुलाई को दोपहर करीब डेढ़ बजे 5 अगस्त 2026 की डिलीवरी वाला सोना 226 रुपये की गिरावट के साथ 1,47,152 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था.4 सितंबर 2026 की डिलीवरी वाली चांदी 45 रुपये की तेजी के साथ 2,37,455 रुपये प्रति किलो पर थी.
चीन ने क्या कदम उठाया
जून के आखिरी हफ्ते में चीन के कई बड़े बैंकों ने अपने ग्राहकों को नोटिस जारी किया. इनमें इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना, पोस्टल सेविंग्स बैंक ऑफ चाइना, पिंग एन बैंक और चाइना गुआंगफा बैंक शामिल हैं.
इन बैंकों ने कहा कि अब वे आम ग्राहकों को शंघाई गोल्ड एक्सचेंज से जुड़ी उधार वाली कीमती धातु ट्रेडिंग की सुविधा नहीं देंगे. जिन लोगों ने पहले से ऐसे सौदे कर रखे हैं, उन्हें तय समय के भीतर अपनी पोजिशन बंद करनी होगी या उसे असली सोने में बदलना होगा.
वायरल दावे और असली बात
कई जगह यह दावा किया गया कि चीन ने गोल्ड ट्रेडिंग पर बैन लगा दिया है. लेकिन सामने आई जानकारी के मुताबिक रोक पूरी गोल्ड खरीद पर नहीं है. सख्ती सिर्फ उस ट्रेडिंग पर है, जिसमें कम पैसे लगाकर उधार के सहारे बड़ा दांव लगाया जाता है.
पेपर गोल्ड क्या होता है?
पेपर गोल्ड में निवेशक के पास असली सोना नहीं होता. उसके पास सिर्फ कागजी या डिजिटल रिकॉर्ड में यह दर्ज होता है कि उसने सोने में निवेश किया है. कई बार बैंक या ब्रोकर कम रकम पर बड़ी ट्रेडिंग की सुविधा देते हैं. इसे लीवरेज कहा जाता है.
इसका आसान मतलब यह है कि अगर किसी के पास 10 हजार डॉलर हों, तो वह उधार के सहारे 50 हजार डॉलर या 1 लाख डॉलर के बराबर सोने में सौदा कर सकता है. भाव बढ़े तो मुनाफा बड़ा हो सकता है. भाव गिरे तो नुकसान भी कई गुना हो सकता है.
पेपर गोल्ड और असली सोने में फर्क
असली सोना वह है जिसे खरीदा और अपने पास रखा जा सकता है.पेपर गोल्ड में सोना हाथ में नहीं आता. सिर्फ रिकॉर्ड में निवेश दिखता है.ऐसे बाजार में एक ही असली सोने के आधार पर उससे कई गुना बड़े सौदे हो सकते हैं.घबराहट के समय उधार वाले निवेशकों को जल्दी बिकवाली करनी पड़ सकती है. इससे कीमतों में तेज उतार चढ़ाव आ सकता है.
चीन ऐसा क्यों कर रहा है?
जानकारी के मुताबिक चीन सरकार पिछले कुछ साल से ऐसे निवेश पर सख्ती बढ़ा रही है, जिसमें लोग उधार लेकर ज्यादा जोखिम लेते हैं. पहले रियल एस्टेट, फिर शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी के बाद अब सोने से जुड़ी ट्रेडिंग पर नजर कड़ी हुई है. मकसद सोने का विरोध करना नहीं, बल्कि ज्यादा जोखिम वाली सट्टेबाजी को कम करना है.
कीमत पर क्या असर पड़ सकता है?
जानकारों का कहना है कि छोटी अवधि में असर दिख सकता है. जिन निवेशकों ने उधार लेकर सोने में सौदे किए हैं, उन्हें पोजिशन बंद करनी पड़ सकती है. इससे कुछ समय के लिए बिकवाली बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव आ सकता है.
वहीं लंबी अवधि में तस्वीर अलग हो सकती है. चीन दुनिया के बड़े सोना खरीदार देशों में शामिल है. अगर उधार वाली ट्रेडिंग कम भी होती है, तब भी लोग असली सोना, गोल्ड ईटीएफ या बिना उधार वाले दूसरे रास्तों से निवेश कर सकते हैं. यानी मांग खत्म होने के बजाय उसका तरीका बदल सकता है.
दुनिया भर के बाजार पर असर कितना
दुनिया के बड़े पेपर गोल्ड बाजार अभी भी अमेरिका के कॉमेक्स और लंदन के एलबीएमए जैसे मंच हैं, जहां बड़े निवेशक और बैंक सक्रिय रहते हैं. इसलिए चीन का यह कदम तुरंत पूरी दुनिया में सोने की कीमतें नहीं बदल देगा. लेकिन अगर आगे भी चीन असली सोने को बढ़ावा देता है और उधार वाली ट्रेडिंग घटती है, तो धीरे धीरे बाजार का रुख बदल सकता है.
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि चीन ने सोने की खरीद पर पूरी रोक नहीं लगाई है. असली बदलाव यह है कि बड़े बैंक आम ग्राहकों के लिए उधार लेकर सोने में बड़ा दांव लगाने का रास्ता बंद कर रहे हैं. इससे छोटी अवधि में कीमतों पर दबाव आ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में असली मांग बनी रही तो सोने का बाजार ज्यादा स्थिर हो सकता है.
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