चीन के प्रॉपर्टी बाजार में गहरी सुस्ती दिख रही है और कुछ विश्लेषकों का कहना है कि घरों की कीमतों में 40 फीसदी तक और गिरावट आ सकती है. एक समय चीन की अर्थव्यवस्था को तेज रफ्तार देने वाला यही क्षेत्र अब उसके लिए बड़ी परेशानी बन गया है.
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इसका असर सिर्फ घरों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं माना जा रहा है. परिवारों की संपत्ति, लोगों के खर्च, रोजगार, स्थानीय सरकारों की कमाई और दूसरे देशों के कारोबार पर भी इसका असर पड़ सकता है. इसी वजह से चीन के प्रॉपर्टी संकट पर दुनिया भर में नजर रखी जा रही है.
संकट यहां तक कैसे पहुंचा
चीन में कई साल तक नए शहर बसे, बड़ी इमारतें बनीं और लाखों लोगों ने घर खरीदे. प्रॉपर्टी सेक्टर देश की आर्थिक बढ़त का बड़ा सहारा बन गया. लोगों ने घर को रहने की जरूरत के साथ निवेश का रास्ता भी माना.
जानकारों के मुताबिक, इस तेजी के साथ कर्ज भी लगातार बढ़ता गया. डेवलपरों ने तेजी से काम बढ़ाने के लिए भारी कर्ज लिया. एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में लगाया गया और पूरा ढांचा लगातार बढ़ती बिक्री और बढ़ती कीमतों पर टिक गया.
कर्ज का दबाव और सरकारी सख्ती
करीब 6 साल पहले चीन की सरकार ने ज्यादा कर्ज में डूबे डेवलपरों पर सख्ती शुरू की. इसके बाद सेक्टर की कमजोरियां खुलकर सामने आने लगीं. नए घरों की बिक्री पर दबाव बढ़ा, निर्माण धीमा पड़ा और जमीन की बिक्री भी कमजोर हुई.
एवरग्रांडे इस संकट का सबसे चर्चित नाम बनकर उभरा. यह कंपनी कभी चीन के प्रॉपर्टी उछाल की पहचान मानी जाती थी, लेकिन बाद में भारी कर्ज के संकट में फंस गई. इससे यह साफ हुआ कि परेशानी किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रॉपर्टी ढांचे पर दबाव है.
चीन में बड़ी संख्या में ऐसे घर हैं जिनके लिए खरीदारों ने पैसा दिया, लेकिन प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हुए. डेवलपरों के पास नकदी की कमी है, नई बिक्री कमजोर है और पुराने कर्ज का बोझ भी बना हुआ है. ऐसे में एक तरफ नए घर नहीं बिक रहे हैं और दूसरी तरफ पुराने प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए भी पैसे की जरूरत है.
मुख्य बातें एक नजर में
• चीन में घरों की बिक्री और निर्माण दोनों पर दबाव है.
• कुछ विश्लेषकों ने कीमतों में 40 फीसदी तक और गिरावट की आशंका जताई है.
• कई प्रोजेक्ट अधूरे हैं और खरीदारों का पैसा फंसा हुआ है.
• डेवलपरों पर पुराने कर्ज का बोझ बना हुआ है.
• स्थानीय सरकारों की जमीन बिक्री से होने वाली कमाई भी प्रभावित हो रही है.
असर सिर्फ चीन तक सीमित नहीं
विश्लेषकों का मानना है कि अगर प्रॉपर्टी की कीमतों में और गिरावट आती है, तो चीन के परिवारों की संपत्ति पर सीधा असर पड़ेगा. इससे लोगों का खर्च कमजोर हो सकता है. रोजगार और स्थानीय सरकारों की आय पर भी दबाव बढ़ सकता है.
चीन अब अपनी अर्थव्यवस्था में बदलाव की कोशिश कर रहा है. प्रॉपर्टी सेक्टर से ध्यान हटाकर ऊंची तकनीक वाले निर्माण, इलेक्ट्रिक गाड़ी, बैटरी और सोलर जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया जा रहा है. हालांकि, इससे चीन का निर्यात और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है, जिसका असर दूसरे देशों के कारोबार और व्यापारिक रिश्तों पर पड़ सकता है.
आगे क्या देखना होगा
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चीन प्रॉपर्टी पर टिकी अपनी पुरानी आर्थिक चाल से बाहर निकलकर नया रास्ता मजबूत कर पाएगा. साथ ही, अगर घरों की कीमतों में 40 फीसदी तक और गिरावट आती है, तो उसका असर चीन के उपभोक्ताओं, कारोबार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कितना बड़ा होगा. यही इस पूरे संकट की सबसे अहम बात है.
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