दुनिया एक तरफ युद्ध की आग जल रही है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में चांदी यानी सिल्वर की चमक फीकी पड़ने का खतरा मंडरा रहा है. दरअसल चीन ने चांदी में बड़ा खेल कर दिया है. इसका सीधा असर चांदी की कीमतों पर पड़ने वाला है. अब आप सोच रहे होंगे कि युद्ध और चांदी का आपस में क्या संबंध है?
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कहानी शुरू होती है ईरान और उसके आसपास बढ़ते तनाव से. इस युद्ध और ऊर्जा संकट की वजह से दुनिया के कई देश अब तेल और गैस पर कम निर्भर रहना चाहते हैं. ऐसे में फिर से चर्चा शुरू हो गई है सोलर एनर्जी यानी सूर्य से बनने वाली बिजली की. सोलर पावर को भविष्य की ऊर्जा माना जाता है, क्योंकि इसमें न तेल चाहिए, न गैस और न ही कोयला, लेकिन यहां एक दिलचस्प बात है. सोलर पैनल बनाने में बड़ी मात्रा में चांदी का इस्तेमाल होता है. इसलिए जब सोलर इंडस्ट्री बढ़ती है, तो चांदी की मांग भी बढ़ जाती है.
कनाडा के एक बैंक ने दी बड़ी चेतावनी
पिछले कुछ सालों में यही हुआ. दुनिया भर में सोलर प्रोजेक्ट तेजी से बढ़े और चांदी की मांग भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई. यही वजह रही कि सिल्वर की कीमतों को काफी समर्थन मिला, लेकिन अब एक नई चिंता सामने आई है. कनाडा के बड़े निवेश बैंक BMO Capital Markets ने इसपर बड़ी चेतावनी दे दी है.
BMO Capital Markets ने वार्निग देते हुए कहा है कि चीन में सोलर सेक्टर की रफ्तार धीमी पड़ रही है और अगर ऐसा ही चलता रहा तो इसका असर सीधे चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है. अब सवाल ये है कि चीन का इससे क्या लेना-देना? दरअसल, चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पावर बाजार है. वहां सबसे ज्यादा सोलर पैनल बनते भी हैं और लगाए भी जाते हैं. मतलब अगर चीन में सोलर इंडस्ट्री की स्पीड कम हुई, तो दुनिया भर में चांदी की मांग पर असर पड़ सकता है.
BMO के विश्लेषकों का कहना है कि इस साल चीन में जितने नए सोलर प्रोजेक्ट जुड़ रहे हैं, उनकी रफ्तार पिछले साल यानी 2024 के मुकाबले कम है. आसान शब्दों में कहें तो चीन पहले जितनी तेजी से सोलर पैनल नहीं लगा रहा. हालांकि दुनिया के बाकी देश अभी भी स्वच्छ ऊर्जा की तरफ बढ़ रहे हैं. इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री भी बढ़ रही है, लेकिन बैंक का मानना है कि चीन की धीमी पड़ती मांग इन सकारात्मक खबरों पर भारी पड़ सकती है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट ?
विश्लेषकों ने यह भी कहा कि फिलहाल बाजार में लोग इलेक्ट्रिक वाहनों और ग्रीन टेक्नोलॉजी की बात तो खूब कर रहे हैं, लेकिन चीन के सोलर सेक्टर की कमजोरी पर उतनी चर्चा नहीं हो रही. यानी बाहर से तस्वीर जितनी चमकदार दिख रही है, अंदर कुछ बादल भी नजर आ रहे हैं. अब इसका असर निवेशकों पर कैसे पड़ेगा? तो देखिए, अगर सोलर इंडस्ट्री कम चांदी खरीदेगी, तो बाजार में मांग घट सकती है. जब मांग कम होती है, तो कीमतों पर दबाव आना स्वाभाविक है. यही वजह है कि BMO को लगता है कि आने वाले समय में सिल्वर की कीमतों को उतना मजबूत सहारा नहीं मिल पाएगा, जितना पिछले कुछ सालों में मिला था.
हालांकि पूरी तस्वीर नकारात्मक भी नहीं है. ऊर्जा संकट अभी भी बना हुआ है. दुनिया के कई देश अक्षय ऊर्जा यानी Renewable Energy में निवेश बढ़ा रहे हैं. ऐसे में सोलर सेक्टर पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ रहा, लेकिन चीन जैसे बड़े खिलाड़ी की रफ्तार कम होना बाजार के लिए चिंता की बात जरूर है.
तो कुल मिलाकर कहानी ये है कि युद्ध की वजह से सोलर एनर्जी की जरूरत बढ़ रही है, लेकिन दुनिया के सबसे बड़े सोलर बाजार चीन में मांग कमजोर पड़ती दिख रही है. अगर चीन की यह सुस्ती जारी रहती है, तो चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में चीन फिर से सोलर सेक्टर में तेजी लाता है या नहीं, क्योंकि अगर चीन ने रफ्तार पकड़ ली, तो चांदी फिर चमक सकती है.
क्या है आज सोने चांदी का रेट ?
आज दोपहर करीब साढ़े 12 बजे 5 अगस्त 2026 की डिलीवरी वाला सोना 313 रुपये की गिरावट के साथ 1,59,033 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था. वहीं 3 जुलाई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी 2300 रुपये से ज्यादा की गिरावट के साथ 2,64,384 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी.
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