Jefferies के Chris Wood ने बदला India Portfolio, HDFC Bank बाहर... इन 3 शेयरों पर बढ़ाया भरोसा !

चिराग ठाकुर

• 03:15 PM • 07 Aug 2026

क्रिस्टोफर वुड ने एचडीएफसी बैंक और पीबी फिनटेक से निकलकर बजाज फाइनेंस, एमसीएक्स और लेंसकार्ट पर दांव लगाया. जानिए भारत को लेकर उनका नया भरोसा.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

भारत में कर्ज बढ़ोतरी तेज है, कॉरपोरेट और रिटेल दोनों मांग मजबूत

आरईसी से मुनाफावसूली के बाद वुड ने बजाज फाइनेंस पर भरोसा बढ़ाया

एमसीएक्स को बढ़ती जिंस कारोबार गतिविधि से कमाई बढ़ने की उम्मीद

भारतीय शेयर बाजार में HDFC Bank एक ऐसा नाम है, जिस पर करोड़ों निवेशकों का भरोसा है. लेकिन अब दुनिया के बड़े निवेशकों में शामिल Jefferies के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट Christopher Wood ने अपने India portfolio में बड़ा बदलाव किया है.

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Wood ने अपने पोर्टफोलियो से HDFC Bank को बाहर कर दिया है और कुछ नए शेयरों को जगह दी है. इस बदलाव ने निवेशकों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर ऐसा क्या बदला कि इतने बड़े ग्लोबल निवेशक ने HDFC Bank से दूरी बना ली? और अब उन्हें भारत की ग्रोथ स्टोरी किन कंपनियों में दिखाई दे रही है.

दरअसल, Christopher Wood ने अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट GREED & fear में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक रुख बनाए रखा है. उनका मानना है कि देश की घरेलू ग्रोथ मजबूत बनी हुई है और आने वाले समय में कुछ खास सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं.

इसी सोच के साथ उन्होंने अपने India long-only portfolio में बदलाव किया है.

HDFC Bank और PB Fintech पोर्टफोलियो से बाहर

Christopher Wood के पोर्टफोलियो में सबसे बड़ा बदलाव HDFC Bank को लेकर है.

उन्होंने HDFC Bank और PB Fintech को अपने India portfolio से हटा दिया है. वहीं इनकी जगह Multi Commodity Exchange यानी MCX और Lenskart Solutions को शामिल किया गया है.

इसके अलावा उन्होंने REC Limited की जगह Bajaj Finance को पोर्टफोलियो में शामिल किया है.

यानी Wood का फोकस अब बड़े established नामों से हटकर उन कंपनियों की तरफ बढ़ा है, जहां उन्हें आने वाले वर्षों में ज्यादा ग्रोथ क्षमता दिखाई दे रही है.

Bajaj Finance पर क्यों बढ़ा भरोसा?

Christopher Wood ने Bajaj Finance को शामिल करके यह संकेत दिया है कि उनका भरोसा अभी भी भारत की credit growth story पर बना हुआ है.

उनके मुताबिक 2026 में भारत में बैंक क्रेडिट ग्रोथ करीब 17-18 फीसदी सालाना की रफ्तार से बढ़ रही है. यह पिछले एक दशक से ज्यादा समय में सबसे तेज ग्रोथ में से एक है.

इस ग्रोथ में सिर्फ retail loans का योगदान नहीं है, बल्कि corporate lending भी तेजी से बढ़ रही है.

Wood के मुताबिक.

  • Corporate lending growth करीब 20 फीसदी है.
  • Agriculture loans में करीब 17 फीसदी की बढ़ोतरी है.
  • Retail loans करीब 16 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहे हैं.

इसका मतलब है कि कंपनियों की तरफ से निवेश बढ़ रहा है, कारोबार का विस्तार हो रहा है और कर्ज की मांग मजबूत बनी हुई है.

यही वजह है कि Wood ने lending business से जुड़ी Bajaj Finance पर दोबारा भरोसा जताया है.

Bajaj Finance पहले भी रहा है Wood का पसंदीदा

Bajaj Finance Christopher Wood के लिए कोई नया निवेश नहीं है. इससे पहले भी यह शेयर उनके पोर्टफोलियो का हिस्सा रह चुका है. साल 2015 से 2020 के बीच करीब पांच साल तक Bajaj Finance उनके Asia ex-Japan long-only portfolio में शामिल था. इस दौरान कंपनी के शेयर ने करीब 551 फीसदी का रिटर्न दिया था.

हालांकि, शुक्रवार को Bajaj Finance के शेयरों में करीब 5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. इसकी वजह RBI का flexi loan को लेकर प्रस्ताव रहा. RBI के प्रस्ताव के बाद बाजार को चिंता है कि अगर revolving credit products पर पाबंदी लगती है तो NBFC कंपनियों के loan growth और fee income पर असर पड़ सकता है.

REC से बाहर निकलने की वजह क्या है?

Wood ने REC Limited को भी अपने पोर्टफोलियो से हटा दिया है. इसके पीछे वजह कंपनी का शानदार प्रदर्शन बताया गया है. REC ने दिसंबर 2022 में पोर्टफोलियो में शामिल होने के बाद करीब 228 फीसदी का रिटर्न दिया है.

यानी शानदार तेजी के बाद Wood ने मुनाफावसूली करते हुए नए निवेश अवसरों पर ध्यान बढ़ाया है.

MCX और Lenskart में क्या दिखा?

Christopher Wood ने MCX यानी Multi Commodity Exchange को अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया है. MCX भारत का सबसे बड़ा commodity exchange है, जहां सोना, चांदी, कच्चा तेल और दूसरी commodities में ट्रेडिंग होती है. कमोडिटी मार्केट में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए Wood को exchange business में लंबी अवधि की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं.

दूसरी तरफ Lenskart को उन्होंने भारत की बढ़ती consumption story से जोड़ा है. भारत में online shopping और organised retail का विस्तार छोटे शहरों तक पहुंच रहा है. ऐसे में Lenskart को देश में बढ़ते consumer spending का फायदा मिलने की उम्मीद है.

Eternal का बढ़ा वजन, Bharti Airtel का घटाया

Christopher Wood ने सिर्फ नए शेयर शामिल नहीं किए हैं, बल्कि कुछ मौजूदा शेयरों में भी बदलाव किया है. उन्होंने Eternal यानी Zomato का वेटेज बढ़ाकर 5 फीसदी कर दिया है. वहीं Bharti Airtel का वेटेज घटाकर 4 फीसदी कर दिया गया है. MCX और Lenskart को पोर्टफोलियो में 4-4 फीसदी वेटेज दिया गया है.

कौन से शेयर हैं Christopher Wood के पसंदीदा?

अगर Christopher Wood के पूरे India portfolio की बात करें तो कुछ शेयरों को सबसे ज्यादा वेटेज दिया गया है.

इनमें शामिल हैं.

  • SBI Life Insurance - 6 फीसदी.
  • Adani Ports - 6 फीसदी.
  • GMR Airports - 6 फीसदी.

इन कंपनियों में Wood को भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ थीम दिखाई दे रही है.

विदेशी निवेशकों का रुख भी बदला

Christopher Wood ने सिर्फ कंपनियों को लेकर ही नहीं, बल्कि भारतीय बाजार को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए हैं. उनके मुताबिक लंबे समय तक बिकवाली करने के बाद विदेशी निवेशकों का रुख जुलाई में बदला है. Wood के अनुसार जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 2.45 अरब डॉलर यानी 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया. उनका मानना है कि ग्लोबल निवेशकों ने AI और semiconductor से जुड़े महंगे ट्रेड्स में कुछ मुनाफावसूली की और पैसा दूसरे बाजारों की तरफ लगाया.

RBI की योजना से रुपये को मिल सकती है राहत

रुपये को लेकर भी Christopher Wood ने सकारात्मक उम्मीद जताई है.

उन्होंने RBI की FCNR(B) deposit scheme का जिक्र किया है. इस योजना के जरिए विदेशी मुद्रा जमा बढ़ाने और डॉलर इनफ्लो को बढ़ावा देने की कोशिश की गई है.

Wood के मुताबिक इस योजना के जरिए करीब 41 अरब डॉलर तक का इनफ्लो आ चुका है और आने वाले समय में इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है.

इसके अलावा भारतीय सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों को टैक्स राहत देने के फैसले को भी उन्होंने बाजार के लिए सकारात्मक बताया है.

HDFC Bank से दूरी का मतलब बैंकिंग सेक्टर से दूरी नहीं

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या HDFC Bank से बाहर निकलना बैंकिंग सेक्टर पर भरोसा कम होने का संकेत है? शायद ऐसा नहीं है. क्योंकि Christopher Wood ने HDFC Bank की जगह Bajaj Finance को शामिल किया है. इससे साफ है कि उनका फोकस भारत की credit growth story पर अभी भी बना हुआ है.

फर्क सिर्फ इतना है कि अब उनका दांव बड़े बैंकों से हटकर उन कंपनियों पर ज्यादा है, जहां उन्हें आने वाले वर्षों में तेज ग्रोथ की संभावना दिखाई दे रही है.हालांकि किसी भी निवेशक को यह समझना जरूरी है कि Christopher Wood का पोर्टफोलियो बदलाव उनकी अपनी निवेश रणनीति है. इसका मतलब यह नहीं है कि ये शेयर निश्चित रूप से अच्छा प्रदर्शन करेंगे.निवेश से पहले अपनी रिसर्च और जोखिम क्षमता को जरूर ध्यान में रखना चाहिए.

लेकिन इतना जरूर है कि एक बड़े ग्लोबल निवेशक का भारत की अर्थव्यवस्था और घरेलू ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा बनाए रखना बाजार के लिए एक अहम संकेत है.