Closing Auction Session Explainer: बाज़ार बंद होने का नया खेल, आखिर 3:15 बजे क्या होता है ?

चिराग ठाकुर

• 01:47 PM • 04 Aug 2026

सेबी का नया क्लोजिंग ऑक्शन अब शेयरों की बंद कीमत नीलामी से तय करेगा. जानिए निफ्टी में हलचल क्यों बढ़ी और आम निवेशक व ट्रेडरों पर इसका क्या असर होगा.

NewsTak
Google CTA

न्यूज़ हाइलाइट्स

सेबी ने बाजार बंद होने की नई क्लोजिंग नीलामी व्यवस्था शुरू की

पहले अंतिम कीमत तीस मिनट के औसत सौदों से तय होती थी

बड़े फंड के आखिरी ऑर्डर से पुरानी व्यवस्था में तेज असर पड़ता

अगर आपने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की क्लोजिंग देखी होगी तो एक बात जरूर नोटिस की होगी. बाजार बंद होने से ठीक पहले निफ्टी में अचानक करीब 200 अंकों की तेजी देखने को मिली. कुछ ही मिनटों में इतनी बड़ी हलचल देखकर निवेशकों को लगा कि शायद कोई बड़ी खबर आई है.

Read more!

लेकिन इसकी वजह कोई बड़ी खबर नहीं थी. असली वजह थी शेयर बाजार में लागू हुआ नया सिस्टम, जिसका नाम है Closing Auction Session यानी CAS.

अब बाजार बंद होने से पहले शेयरों की अंतिम कीमत तय करने के लिए एक नई प्रक्रिया अपनाई जाएगी. इसमें खरीददार और विक्रेता अपने ऑर्डर देंगे और सिस्टम उस कीमत को खोजेगा जहां सबसे ज्यादा सौदे पूरे हो सकें.

पहले कैसे तय होती थी शेयर की Closing Price?

Closing Auction Session आने से पहले भारतीय शेयर बाजार में किसी शेयर की Closing Price तय करने के लिए VWAP यानी Volume Weighted Average Price सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था.

इसका मतलब था कि बाजार बंद होने से पहले आखिरी 30 मिनट में जिस शेयर में जितने भी सौदे हुए, उनका एक औसत निकाला जाता था. इस औसत में ज्यादा मात्रा में हुए ट्रेड्स को ज्यादा महत्व दिया जाता था और इसी आधार पर शेयर की अंतिम Closing Price तय होती थी.

यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी और सामान्य दिनों में इसमें कोई बड़ी समस्या नहीं दिखती थी. लेकिन दिक्कत तब आती थी जब बाजार बंद होने से ठीक पहले बड़े संस्थागत निवेशक भारी मात्रा में खरीदारी या बिकवाली करते थे.

ऐसी स्थिति में आखिरी कुछ मिनटों के बड़े ऑर्डर पूरे 30 मिनट के औसत को प्रभावित कर सकते थे. यानी पूरे दिन शेयर जिस स्तर पर कारोबार करता रहा, उसकी तुलना में सिर्फ आखिरी समय के बड़े सौदों की वजह से Closing Price में बड़ा बदलाव आ सकता था.

VWAP सिस्टम में क्या परेशानी थी?

सामान्य दिनों में VWAP सिस्टम ठीक काम करता था, लेकिन परेशानी तब आती थी जब बाजार बंद होने से कुछ मिनट पहले बड़े निवेशक भारी खरीदारी या बिकवाली करते थे.

 

ऐसे में आखिरी कुछ मिनटों के बड़े ऑर्डर पूरे औसत को प्रभावित कर सकते थे.

यानी:

  • पूरे दिन शेयर एक स्तर पर कारोबार कर सकता था.
  • लेकिन Closing Price बड़े संस्थागत ऑर्डर की वजह से बदल सकती थी.
  • इससे बाजार बंद होने के समय Volatility बढ़ जाती थी.

दुनिया के बड़े बाजारों में पहले से मौजूद है Auction System

SEBI ने दुनिया के बड़े शेयर बाजारों की व्यवस्था का अध्ययन किया.

अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई बाजारों में Closing Auction Session पहले से मौजूद है.

इस सिस्टम में:

  • खरीद और बिक्री के ऑर्डर एक जगह इकट्ठा होते हैं.
  • सिस्टम मांग और सप्लाई के आधार पर कीमत तय करता है.
  • उसी कीमत पर Closing Price तय होती है.

Closing Auction Session कैसे काम करेगा?

CAS सामान्य ट्रेडिंग खत्म होने के बाद शुरू होगा.

Closing Auction Session की टाइमलाइन

समय प्रक्रिया
3:15 PM - 3:20 PM Reference Price Calculation और CAS में बदलाव
3:20 PM - 3:25 PM Market और Limit Order डालने, बदलने और कैंसिल करने की सुविधा
3:25 PM - 3:30 PM सिर्फ Limit Order में बदलाव की अनुमति
3:30 PM - 3:35 PM Order Matching और Closing Price तय
3:35 PM - 3:50 PM CAS से Post Close Session में बदलाव
3:50 PM - 4:00 PM Post Close Session

 

Equilibrium Price से तय होगी अंतिम कीमत

Closing Auction Session में Closing Price किसी एक बड़े निवेशक के ऑर्डर से तय नहीं होगी. बल्कि पूरे बाजार की मांग और सप्लाई के आधार पर तय होगी. सिस्टम ऐसी कीमत खोजेगा जहां अधिकतम मात्रा में खरीद और बिक्री का मिलान हो सके. इस कीमत को Equilibrium Price कहा जाता है. यानी अब Closing Price बाजार के सामूहिक रुझान को ज्यादा बेहतर तरीके से दिखाने की कोशिश करेगी.

CAS में कीमतों पर रहेगी सीमा

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी निवेशक अपनी मनमानी कीमत डाल सकेगा. Closing Auction Session में Reference Price के आधार पर एक तय Price Band रखा गया है. इसके तहत निवेशक सिर्फ निर्धारित सीमा के अंदर ही ऑर्डर लगा पाएंगे. इस नियम का उद्देश्य आखिरी मिनटों में कीमतों में अचानक और कृत्रिम बदलाव को रोकना है. इसके अलावा Closing Auction Session में सिर्फ Market Order और Limit Order की अनुमति होगी. Stop Loss Order और Iceberg Order को इसमें शामिल नहीं किया गया है.

आम निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर कोई निवेशक लंबे समय के लिए शेयरों में निवेश करता है या SIP के जरिए निवेश करता है तो उसके लिए इस बदलाव से बहुत बड़ा अंतर नहीं आएगा. लेकिन Intraday Traders और Futures & Options ट्रेडर्स के लिए यह बदलाव ज्यादा महत्वपूर्ण है.

अब 3:15 बजे के बाद बाजार पहले की तरह लगातार ट्रेडिंग मोड में नहीं रहेगा. उस समय शेयरों की कीमतें Auction प्रक्रिया के जरिए तय होंगी. शुरुआत में इस बदलाव की वजह से बाजार में कुछ असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं, जैसा कि सोमवार को निफ्टी में देखने को मिला. हालांकि जानकारों का मानना है कि समय के साथ बाजार इस नई व्यवस्था के साथ एडजस्ट हो जाएगा.

F&O Traders के लिए भी बदलेगी व्यवस्था

Closing Auction Session का एक बड़ा असर Futures & Options मार्केट पर भी पड़ेगा.

पहले Cash Market और F&O लगभग एक ही समय पर बंद होते थे. लेकिन अब पहले शेयरों की Closing Price तय होगी और उसके बाद F&O सेगमेंट को कुछ समय मिलेगा ताकि ट्रेडर्स नई Closing Price के हिसाब से अपने सौदे एडजस्ट कर सकें.

इससे Futures की कीमतों में बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी और Settlement प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हो सकती है.

भारत के शेयर बाजार को मिलेगी नई व्यवस्था

Closing Auction Session सिर्फ ट्रेडिंग का नया नियम नहीं है. यह भारतीय शेयर बाजार को वैश्विक बाजारों के करीब लाने की कोशिश है.

इसका उद्देश्य है कि Closing Price ज्यादा निष्पक्ष तरीके से तय हो, बड़े और छोटे निवेशकों को बराबर मौका मिले, Passive Funds का Tracking Error कम हो और बाजार बंद होने के समय अनावश्यक उतार-चढ़ाव घटे.

अब आने वाले दिनों में अगर बाजार बंद होने से पहले किसी शेयर या इंडेक्स में अचानक बड़ा बदलाव दिखाई देता है तो जरूरी नहीं कि उसके पीछे कोई बड़ी खबर हो. हो सकता है कि Closing Auction Session के जरिए बाजार उस दिन की अंतिम कीमत तय कर रहा हो.