भारत अब सिर्फ दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए मोबाइल फोन बनाने वाला देश नहीं रहना चाहता. अब कोशिश है कि भारत से अपना वैश्विक स्मार्टफोन ब्रांड भी निकले.इसी दिशा में Nothing ने अपने उप-ब्रांड CMF को भारत में एक अलग कंपनी बनाने का फैसला किया है. नई कंपनी में भारतीय हिस्सेदारों की बहुमत हिस्सेदारी होगी. इसका मुख्यालय भारत में होगा और कंपनी की अपनी टीम के साथ अनुसंधान एवं विकास का काम भी देश में होगा. Nothing इसमें हिस्सेदार और साझेदार बना रहेगा.
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Optiemus के साथ दांव
इस फैसले की तैयारी पहले ही शुरू हो चुकी थी. CMF ने भारतीय कंपनी Optiemus Infracom के साथ संयुक्त उपक्रम बनाया है.इसमें Optiemus Infracom की 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है. दोनों कंपनियां मिलकर भारत में 10 करोड़ डॉलर यानी करीब 887 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी.इसका मकसद सिर्फ भारत में मोबाइल फोन जोड़ना नहीं है. भारत को CMF के उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास और वैश्विक निर्यात का केंद्र बनाना है.नोएडा में बनने वाली इकाई की शुरुआती क्षमता हर महीने करीब 5 लाख मोबाइल फोन बनाने की होगी. अगले तीन साल में 1,800 से ज्यादा रोजगार पैदा करने का लक्ष्य है.
भारत को ही क्यों चुना?
CMF के भारत पर दांव की सबसे बड़ी वजह देश का विशाल मोबाइल बाजार है. भारत में हर साल 15 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन बिकते हैं.मोबाइल फोन के उत्पादन में भी भारत ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ी छलांग लगाई है. सरकार के मुताबिक भारत में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब देश में ही बनते हैं. भारत मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है.लेकिन CMF का लक्ष्य सिर्फ भारत में मोबाइल फोन बनाना नहीं है.कंपनी चाहती है कि मोबाइल फोन का डिजाइन, तकनीक, सॉफ्टवेयर और अनुसंधान एवं विकास भी भारत में हो.यानी अगला कदम सिर्फ भारत में बना फोन नहीं, बल्कि भारत में तैयार किया गया फोन है.
पीएलआई ने तैयार की जमीन
भारत में मोबाइल फोन उत्पादन को तेजी देने में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना यानी पीएलआई की बड़ी भूमिका रही है.सरकार ने 2020 में बड़े स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन बढ़ाने के लिए यह योजना शुरू की थी. इसके तहत पात्र कंपनियों को भारत में मोबाइल फोन और कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान की बिक्री बढ़ाने पर प्रोत्साहन दिया गया.इस योजना से भारत में मोबाइल उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के साथ बड़े निवेश को भी बढ़ावा मिला. सरकार के मुताबिक मोबाइल उत्पादन से जुड़े पीएलआई के तहत करीब 96 हजार करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ. इस योजना की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई.
अब नई योजना से मिलेगा सहारा
पीएलआई के बाद सरकार ने मोबाइल फोन उत्पादन को आगे बढ़ाने के लिए मोबाइल फोन विनिर्माण योजना शुरू की है.इस योजना का कुल बजट 62,500 करोड़ रुपये है और यह वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी.इसके तहत भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली पात्र कंपनियों को बिक्री पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिल सकता है.अगर कंपनियां जरूरी कलपुर्जे और अन्य हिस्से भारत से खरीदती हैं, तो उन्हें 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है.भारतीय ब्रांड को बढ़ावा देने के लिए भारत में डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन का भी प्रावधान है.यानी सरकार अब सिर्फ मोबाइल फोन की असेंबली बढ़ाने पर जोर नहीं दे रही है. कोशिश है कि उत्पादन बढ़े, कलपुर्जे भारत में बनें और नई तकनीक भी देश में तैयार हो.
CMF को क्या फायदा होगा?
अगर CMF भारत में बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन बनाता है और ज्यादा कलपुर्जे देश से खरीदता है, तो उसे सरकारी प्रोत्साहन का फायदा मिल सकता है.स्थानीय स्तर पर कलपुर्जों की उपलब्धता बढ़ने से बाहर से सामान मंगाने और उसे भारत तक पहुंचाने का खर्च भी घट सकता है. बड़े पैमाने पर उत्पादन से प्रति फोन लागत कम होने की गुंजाइश भी बनती है.हालांकि CMF ने अभी यह नहीं बताया है कि भारत में बनने वाला फोन चीन या दूसरे देशों के मुकाबले कितना सस्ता पड़ेगा.
10 करोड़ फोन का बड़ा लक्ष्य
CMF की योजना सिर्फ भारत में फोन बेचने की नहीं है. कंपनी भारत को अपना वैश्विक उत्पादन और निर्यात केंद्र बनाना चाहती है.आगे चलकर कंपनी का लक्ष्य हर साल 10 करोड़ मोबाइल फोन बनाने और बेचने तक पहुंचने का है.अगर कंपनी इस स्तर तक पहुंचती है, तो भारत उसके लिए सिर्फ उत्पादन का ठिकाना नहीं रहेगा. यहां से मोबाइल फोन का डिजाइन, अनुसंधान, तकनीक और निर्यात भी बड़े पैमाने पर हो सकता है.यही इस पूरे फैसले का सबसे बड़ा मतलब है.भारत ने पहले दुनिया के लिए मोबाइल फोन बनाना शुरू किया.अब अगली कोशिश है कि दुनिया के लिए मोबाइल फोन की तकनीक और डिजाइन भी भारत में तैयार हो.CMF का भारत में अलग कंपनी बनना इसी बदलाव की दिशा में बड़ा कदम है.
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