एक वक्त तक Silver को मुख्य रूप से Precious Metal के तौर पर देखा जाता था. लेकिन Solar Panels, Electronics और दूसरी Industrial Applications में इसका इस्तेमाल बढ़ा, तो इसकी Strategic Importance भी बढ़ती गई. अब कुछ ऐसी ही कहानी Copper में दिखाई दे रही है.
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तांबे की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. कई Buyers को तुरंत Physical Supply चाहिए, जिसके लिए वे Extra Premium देने को भी तैयार हैं. वहीं Mining कंपनियां भी आने वाले वर्षों में Copper की Supply को लेकर चिंता जता रही हैं.
AI, Electric Vehicles, Data Centres, Renewable Energy और Power Infrastructure का विस्तार Copper की डिमांड बढ़ा रहा है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर Demand इतनी तेजी से बढ़ती रही, तो क्या Supply भी उसी रफ्तार से बढ़ पाएगी?
भारत में ₹1,378/kg के करीब पहुंचा Copper
अगस्त 2026 में भारत में Copper की कीमत करीब ₹1,378 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई. पिछले एक महीने में कीमत करीब 4.5 फीसदी बढ़ी है.
लेकिन Copper की कहानी सिर्फ कीमत बढ़ने तक सीमित नहीं है. Physical Supply को लेकर भी दबाव दिखाई दे रहा है. यानी जिन Buyers को तुरंत Copper चाहिए, उन्हें सामान्य कीमत के ऊपर Extra Premium देना पड़ रहा है.
Copper Market में क्या हो रहा है?
- Copper की कीमतों में तेजी.
- तुरंत Supply के लिए Extra Premium.
- Global Demand और Supply के बीच बढ़ता Gap.
- आने वाले वर्षों में Supply को लेकर चिंता.
आखिर Copper की Demand इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है?
Copper की सबसे बड़ी ताकत है इसकी Electrical Conductivity. यही वजह है कि बिजली से जुड़े Infrastructure में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है.
दुनिया जैसे-जैसे Electrification की तरफ बढ़ रही है, Copper की जरूरत भी बढ़ रही है. Power Grid, Electric Vehicles, Solar Panels, Wind Energy, Electrical Wiring, Cables और Transformers जैसे कई क्षेत्रों में Copper अहम Raw Material है.
इसके साथ अब AI और Data Centres ने Demand की एक नई कहानी जोड़ दी है.
AI के लिए दुनिया भर में बड़े Data Centres तैयार हो रहे हैं. इन Centres को चलाने के लिए भारी मात्रा में Electricity चाहिए. इस बिजली को Generate, Transmit और Distribute करने के लिए भी बड़े स्तर पर Copper की जरूरत पड़ती है.
यानी AI की कहानी सिर्फ Chips और Servers तक सीमित नहीं है. इसके पीछे Power Infrastructure और Copper की भी बड़ी भूमिका है.
2040 तक Copper की Demand 50% बढ़ने का अनुमान
S&P Global के अनुमान के मुताबिक, Global Copper Demand 2025 में करीब 28 Million Tonnes से बढ़कर 2040 तक करीब 42 Million Tonnes पहुंच सकती है.
यानी करीब 15 वर्षों में Demand में लगभग 50 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है.
Copper Demand को बढ़ाने वाले बड़े सेक्टर
- Power Infrastructure.
- Electric Vehicles.
- Renewable Energy.
- Data Centres और AI Infrastructure.
- Electrification.
लेकिन असली चुनौती यहां से शुरू होती है. सवाल यह है कि इतनी तेजी से बढ़ती Demand के मुकाबले Copper की Supply कितनी जल्दी बढ़ाई जा सकती है.
Copper की Supply बढ़ाना इतना मुश्किल क्यों है?
नई Copper Mine शुरू करना लंबी प्रक्रिया है. पहले Resources की पहचान और Exploration होती है. इसके बाद Government Approvals, Mine Development और Infrastructure तैयार करना पड़ता है. तब जाकर Commercial Production शुरू हो पाता है.
इस पूरी प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं. दूसरी चुनौती पुरानी Mines से जुड़ी है. कई Mines में समय के साथ Ore Quality कम हो रही है. ऐसे में समान मात्रा में Copper निकालने के लिए ज्यादा Ore Process करना पड़ सकता है. इससे Production Cost बढ़ती है और Supply पर दबाव बन सकता है. यानी Copper की समस्या सिर्फ बढ़ती Demand नहीं है. Supply को तेजी से बढ़ाना भी आसान नहीं है.
भारत में Copper की Demand कहां से आती है?
भारत में भी Copper की खपत तेजी से बढ़ रही है. ICAI के आंकड़ों के मुताबिक, FY25 में देश की Copper Demand 9.3 फीसदी बढ़कर 1.878 Million Tonnes हो गई.
भारत में Copper के बड़े खरीदार
- Building & Construction: 25%.
- Industrial Applications: 19%.
- Infrastructure: 17%.
यानी फिलहाल भारत की Copper Demand में Traditional Sectors की बड़ी भूमिका है.
लेकिन New Energy सेक्टर तेजी से तस्वीर बदल रहे हैं.
New Energy से बढ़ रही Copper की नई Demand
Solar और Wind Power, Electric Vehicles, Battery Storage और Electrolysers जैसे क्षेत्रों में FY25 के दौरान Copper Consumption 32 फीसदी बढ़ी. हालांकि इन New Technologies की हिस्सेदारी अभी कुल Copper Demand में सिर्फ 4.6 फीसदी है. लेकिन Energy Transition के आगे बढ़ने के साथ इनकी Copper Demand भी बढ़ सकती है.
महंगा Copper भारत की Economy के लिए क्यों मायने रखता है?
अगर Global Copper Prices बढ़ते हैं और Physical Supply के लिए Premium भी बढ़ता है, तो इसका असर Copper इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की Input Cost पर पड़ सकता है.
किन सेक्टर्स पर असर पड़ सकता है?
- Power Cables.
- Transformers.
- Electrical Equipment.
- Infrastructure Companies.
खासकर उन कंपनियों के लिए चुनौती ज्यादा हो सकती है, जो बढ़ी हुई Raw Material Cost को तुरंत ग्राहकों तक Pass On नहीं कर पातीं.
इसका मतलब है कि महंगा Copper सिर्फ Commodity Traders की खबर नहीं है. इसका असर Manufacturing और Infrastructure से लेकर पूरी Industrial Economy तक पहुंच सकता है.
भारत की Growth Story और Copper का कनेक्शन
भारत में Electricity Demand और Infrastructure Expansion दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं. मई 2026 में देश की Peak Power Demand 270.8 GW तक पहुंच चुकी है. आने वाले वर्षों में Power Grid का विस्तार, Renewable Energy Capacity में बढ़ोतरी, EV Adoption और Infrastructure Development बढ़ता है, तो Copper की जरूरत भी बढ़ेगी.
यही वजह है कि Copper को सिर्फ एक Metal के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा. भारत की Growth जितनी तेज होगी, Copper की जरूरत भी उतनी ही बढ़ सकती है. और अगर Global Supply उस रफ्तार से नहीं बढ़ी, तो Copper आने वाले वर्षों में भारत के लिए सिर्फ एक जरूरी Raw Material नहीं, बल्कि एक Strategic Commodity बन सकता है.
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