Banking Stocks: कॉरपोरेट लोन की वापसी से क्या बैंक शेयरों में बनेगा कमाई का मौका?

चिराग ठाकुर

• 07:13 PM • 19 Jul 2026

महंगे बॉन्ड और बेहतर बैलेंस शीट के बीच बड़े निजी बैंकों में कॉरपोरेट कर्ज फिर तेज हुआ है. कंपनियों की बढ़ती मांग क्या बैंकिंग सेक्टर के नए ग्रोथ फेज का संकेत है.

NewsTak
Google CTA

न्यूज़ हाइलाइट्स

बॉन्ड से पैसा जुटाना महंगा होने पर उधारी का रुख बदल गया

एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, कोटक और यस के आंकड़ों में तेज सुधार दिखा

तीस जून तक कुल बैंक कर्ज बढ़ोतरी करीब अठारह दशमलव छह रही

भारत के बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. देश के बड़े प्राइवेट बैंक एक बार फिर कॉरपोरेट कंपनियों को कर्ज देने पर जोर दे रहे हैं. HDFC Bank, ICICI Bank, Kotak Mahindra Bank और Yes Bank के ताजा लोन आंकड़े बताते हैं कि कंपनियों की कर्ज लेने की मांग फिर से बढ़ रही है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर कॉरपोरेट लोन की डिमांड अचानक क्यों बढ़ी है. क्या यह भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक नए ग्रोथ साइकल की शुरुआत है.

Read more!

कई साल बाद बदली बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर

अगर पिछले कुछ सालों पर नजर डालें तो बैंक बड़े कॉरपोरेट लोन देने से बचते रहे. पिछली क्रेडिट साइकिल में इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े कॉरपोरेट लोन की वजह से बैंकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. इसके बाद बैंकों ने अपनी बैलेंस शीट मजबूत करने पर ध्यान दिया. खराब कर्ज यानी NPA कम किए और रिटेल लोन को प्राथमिकता दी.अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है. कंपनियां विस्तार, वर्किंग कैपिटल और नए प्रोजेक्ट्स के लिए फिर से पूंजी जुटा रही हैं. दूसरी तरफ बैंक भी मजबूत बैलेंस शीट के दम पर इस मौके का फायदा उठाने के लिए तैयार दिख रहे हैं.

जून तिमाही में कॉरपोरेट लोन ने पकड़ी रफ्तार

जून तिमाही के आंकड़ों में सबसे बड़ा बदलाव कॉरपोरेट लेंडिंग में देखने को मिला.देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank की कॉरपोरेट लोन बुक में करीब 19 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई. दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल इसी अवधि में यह ग्रोथ केवल 1.7 प्रतिशत थी.वहीं ICICI Bank के घरेलू कॉरपोरेट लोन में करीब 18.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. Kotak Mahindra Bank की कॉरपोरेट लोन बुक करीब 15 प्रतिशत बढ़ी. सबसे तेज उछाल Yes Bank में देखने को मिला, जहां कॉरपोरेट और इंस्टीट्यूशनल लोन में 41 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की गई.

प्रमुख बैंकों की कॉरपोरेट लोन ग्रोथ

बैंक सालाना ग्रोथ
HDFC Bank 19%
ICICI Bank 18.5%
Kotak Mahindra Bank 15%
Yes Bank 41%

आखिर कंपनियां बैंक लोन की तरफ क्यों लौट रही हैं?

इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बॉन्ड मार्केट का महंगा होना माना जा रहा है.

बड़ी कंपनियां आमतौर पर फंड जुटाने के लिए दो रास्ते अपनाती हैं. पहला बैंक से कर्ज लेना और दूसरा बॉन्ड मार्केट के जरिए पैसा जुटाना. लेकिन हाल के समय में बॉन्ड यील्ड ऊंची रहने से बाजार से पैसा जुटाने की लागत बढ़ गई. 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी एक समय 7 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई थी.ऐसे माहौल में कंपनियों के लिए बैंक से कर्ज लेना अपेक्षाकृत आकर्षक विकल्प बन गया. यही कारण है कि कॉरपोरेट लोन की मांग फिर से बढ़ती दिखाई दे रही है.

RBI के आंकड़े भी दे रहे हैं मजबूती का संकेत

रिजर्व बैंक के आंकड़े भी इस ट्रेंड की पुष्टि करते हैं. 30 जून तक बैंक क्रेडिट ग्रोथ करीब 18.6 प्रतिशत सालाना रही. इसका मतलब है कि देश में कर्ज की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है.तेज क्रेडिट ग्रोथ इस बात का संकेत है कि उद्योग और कारोबार निवेश के लिए फिर से पूंजी जुटाने लगे हैं.

लेकिन एक बड़ी चुनौती भी सामने है

लोन ग्रोथ बढ़ने के साथ बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त डिपॉजिट जुटाने की है. पिछले कुछ समय से डिपॉजिट ग्रोथ, लोन ग्रोथ से पीछे रही है.यहीं पर RBI की FCNR(B) स्कीम अहम भूमिका निभा सकती है. विदेशी मुद्रा जमा को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों से बैंकों को विदेशों से कम लागत पर फंड जुटाने में मदद मिल सकती है.अगर अनुमान के मुताबिक सितंबर 2026 तक करीब 50 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा डिपॉजिट बैंकिंग सिस्टम में आता है, तो बैंकों की लिक्विडिटी बेहतर हो सकती है. इससे उनकी कर्ज देने की क्षमता भी मजबूत होगी.

बैंकिंग शेयरों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

ब्रोकरेज फर्म Ashika Institutional Equities का मानना है कि FY27 में बैंकिंग सेक्टर की कमाई को तीन बड़े फैक्टर सहारा दे सकते हैं.

  • मजबूत क्रेडिट ग्रोथ.

  • बेहतर डिपॉजिट मोबिलाइजेशन.

  • कम NPA.

बैंकिंग सेक्टर का ग्रॉस NPA मार्च 2026 तक घटकर करीब 1.8 प्रतिशत पर आ चुका है, जो कई वर्षों के निचले स्तरों में शामिल है. मजबूत एसेट क्वालिटी की वजह से कई बड़े बैंक निवेशकों की नजर में फिर से आकर्षक बन रहे हैं.

किन बैंकिंग शेयरों पर ब्रोकरेज की नजर?

Ashika Institutional Equities ने कई बड़े बैंकिंग शेयरों पर सकारात्मक रुख रखा है.

बैंक टारगेट प्राइस
HDFC Bank ₹1,061
ICICI Bank ₹1,644
SBI ₹1,276
Axis Bank ₹1,663
Kotak Mahindra Bank ₹465
Bank of Baroda ₹316

क्या जोखिम पूरी तरह खत्म हो गए हैं?

हालांकि तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है.बैंकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे ग्रोथ की दौड़ में पिछली क्रेडिट साइकिल जैसी गलतियां दोबारा न दोहराएं. जरूरत से ज्यादा आक्रामक तरीके से कर्ज देने पर भविष्य में खराब लोन बढ़ने का जोखिम बना रह सकता है.खासतौर पर MSME सेक्टर की एसेट क्वालिटी पर नजर रखना जरूरी होगा. इसके अलावा ब्याज दरों की दिशा भी बैंकिंग सेक्टर की कमाई और लोन ग्रोथ पर असर डाल सकती है.

क्या बैंकिंग सेक्टर बनने जा रहा है बाजार का अगला ग्रोथ इंजन?

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक नई कहानी बनती नजर आ रही है. कई साल तक रिटेल लोन पर निर्भर रहने के बाद अब कॉरपोरेट लोन की वापसी दिखाई दे रही है.अगर कंपनियों का निवेश चक्र मजबूत होता है और कर्ज की मांग बनी रहती है, तो बैंकिंग सेक्टर आने वाले समय में शेयर बाजार का बड़ा ग्रोथ इंजन बन सकता है.हालांकि निवेशकों के लिए सिर्फ लोन ग्रोथ देखना काफी नहीं होगा. बैंक की एसेट क्वालिटी, वैल्यूएशन, डिपॉजिट ग्रोथ और जोखिम जैसे पहलुओं का भी आकलन करना जरूरी रहेगा. इन्हीं आधारों पर यह तय होगा कि मौजूदा तेजी लंबी अवधि के ग्रोथ साइकल में बदलती है या नहीं.