अब कंपनी नहीं बचाएगी! गलती हुई तो डायरेक्टर को खुद चुकानी पड़ सकती है कीमत, इसलिए जरूरी हो गया D&O Insurance

संदीप शर्मा

31 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 31 2026 6:37 PM)

पॉलिसीबाजार फॉर बिजनेस की नई किताब समझाती है कि सेबी, एमसीए और एनसीएलटी की बढ़ती जांच के बीच डी एंड ओ बीमा अब निदेशकों के लिए जरूरी सुरक्षा क्यों बन गया है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

D&O Insurance पर भारत की पहली व्यापक गाइड

डायरेक्टर्स की निजी संपत्ति और प्रतिष्ठा पर बढ़ा जोखिम

कंपनी कानून और कार्रवाई से निदेशकों की जिम्मेदारी बढ़ी

PB Fintech की कॉर्पोरेट इंश्योरेंस इकाई Policybazaar for Business ने 'The Price of the Chair' नाम से एक नई किताब लॉन्च की है. यह किताब भारत में Directors & Officers Insurance पर केंद्रित पहली व्यापक गाइड बताई जा रही है.

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D&O इंश्योरेंस क्या होता है?

Directors & Officers Insurance एक ऐसा बीमा है जो किसी कंपनी के निदेशकों और अधिकारियों को उनके फैसलों से होने वाले व्यक्तिगत कानूनी मुकदमों और वित्तीय नुकसान से सुरक्षा देता है.

क्यों बढ़ी D&O Insurance की जरूरत?

अब SEBI, कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय (MCA) और NCLT कंपनियों के साथ-साथ उनके डायरेक्टर्स की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी तय कर रहे हैं. ऐसे मामलों में डायरेक्टर्स की व्यक्तिगत संपत्ति, प्रतिष्ठा और कानूनी जिम्मेदारी पर भी असर पड़ सकता है. इसी वजह से D&O Insurance को अब केवल IPO से पहले की औपचारिकता नहीं, बल्कि कॉरपोरेट गवर्नेंस की जरूरत बताया गया है.

क्या है किताब का मकसद?

इस किताब का फोकस D&O बीमा को सिर्फ IPO से पहले की औपचारिक खरीद के रूप में नहीं, बल्कि कंपनी संचालन की जरूरी जरूरत के रूप में पेश करना है. किताब ये बताने की कोशिश करती है कि जब तक किसी कंपनी को इस जोखिम का पूरा अहसास होता है, तब तक कई बार बीमा लेने में देर हो चुकी होती है.

PB Fintech के जॉइंट ग्रुप CEO सरबवीर सिंह का कहना है कि भारत में डायरेक्टर्स की व्यक्तिगत जिम्मेदारी पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है, लेकिन बोर्डरूम में इस पर अभी भी पर्याप्त चर्चा नहीं होती

लगातार बढ़ रहे हैं D&O Insurance के दावे

भारत में D&O Insurance से जुड़े क्लेम नोटिफिकेशन लगातार 4 वर्षों से बढ़ रहे हैं. 2024-25 में इनमें सालाना आधार पर 32% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. पिछले चार वर्षों में कुल D&O दावों में 48% हिस्सेदारी BFSI सेक्टर की रही, हालांकि अब फार्मा, IT, FMCG और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में भी ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

Policybazaar for Business के प्रमुख सज्जा प्रवीण चौधरी के मुताबिक D&O Insurance को अक्सर आखिरी समय में खरीदा जाता है, जबकि इसे पहले से जोखिम प्रबंधन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए.

किसके लिए है यह किताब?

ये किताब उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो किसी कंपनी के बोर्ड में हैं या भविष्य में ऐसी भूमिका निभा सकते हैं. इसमें बोर्ड मेंबर्स, स्वतंत्र निदेशक (Independent Directors), स्टार्टअप फाउंडर्स, CFO, जनरल काउंसल और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े पेशेवरों को ध्यान में रखा गया है. इसे इस तरह लिखा गया है कि इसे पढ़ने के लिए इंश्योरेंस या कानून की विशेषज्ञ जानकारी होना जरूरी नहीं है.किताब में यह भी बताया गया है कि डी एंड ओ पॉलिसी कैसे काम करती है, कवर कितना होना चाहिए, और किन नए जोखिमों पर कंपनियों को ध्यान देना चाहिए. इनमें ईएसजी और ग्रीनवॉशिंग से जुड़े दावे, एआई पक्षपात, साइबर जवाबदेही और भू-राजनीतिक जोखिम शामिल हैं.