ईरान युद्ध भी नहीं रोक पाया Dubai का रियल एस्टेट! H1 में ₹5.3 लाख करोड़ की डील, भारतीय निवेशकों का दबदबा बरकरार

संदीप शर्मा

• 02:19 PM • 13 Jul 2026

ईरान तनाव के बीच भी दुबई का रिहायशी बाजार टिका रहा. नई रिपोर्ट के मुताबिक सीमित गिरावट के बाद 2026 में कीमतों में और बढ़त संभव है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

ईरान तनाव के बावजूद H1 2026 में दुबई में AED 226 अरब की प्रॉपर्टी डील

भारतीय निवेशक सबसे आगे, 2025 में 22% खरीददार भारत से

ANAROCK का अनुमान, 2026 में घरों की कीमतें 4-7% और बढ़ सकती हैं

मिडिल-ईस्ट में इस साल ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव के बावजूद दुबई का रियल एस्टेट बाजार उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूत साबित हुआ है. ANAROCK की नई रिपोर्ट 'Dubai Real Estate: Built on Vision. Proven by Numbers' के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही (H1 2026) में दुबई में AED 225.7 अरब (करीब ₹5.3 लाख करोड़) के रिहायशी प्रॉपर्टी सौदे हुए. ये दिखाता है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेशकों का भरोसा बाजार पर बना हुआ है.

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ईरान संघर्ष का असर सीमित रहा

रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच ईरान से जुड़े तनाव के दौरान दुबई में रिहायशी संपत्तियों की कीमतों में केवल 4% से 7% की गिरावट आई। इसके विपरीत, इसी दौरान DFM Real Estate Index अपने उच्चतम स्तर से करीब 34% टूट गया. ANAROCK के अनुसार यह दुबई के इतिहास में सबसे बड़ा "Sentiment vs Asset Gap" रहा. यानी शेयर बाजार में घबराहट ज्यादा दिखी, लेकिन वास्तविक प्रॉपर्टी बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहा.

घरों की कीमतों में अब भी बढ़त

रिपोर्ट बताती है कि H1 2026 में दुबई में औसत रिहायशी कीमत AED 1,900 प्रति वर्ग फुट रही, जबकि H1 2025 में यह AED 1,800 प्रति वर्ग फुट थी। यानी एक साल में करीब 6% की बढ़ोतरी दर्ज हुई. ANAROCK का अनुमान है कि यदि मौजूदा हालात सामान्य बने रहते हैं, तो पूरे 2026 में दुबई के रिहायशी बाजार में 4% से 7% तक की और बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं यदि संघर्षविराम लंबे समय तक कायम रहता है और विदेशी मांग तेज होती है, तो कीमतों में 8% से 13% तक की तेजी भी संभव है.

2025 रहा रिकॉर्ड साल

रिपोर्ट के अनुसार 2025 दुबई के रियल एस्टेट बाजार के लिए रिकॉर्ड वर्ष रहा

  • 2,06,166 रिहायशी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन
  • कुल बिक्री मूल्य AED 547 अरब
  • बिक्री मूल्य में 26% की सालाना बढ़ोतरी
  • 2020 की तुलना में बाजार का आकार लगभग 10 गुना बढ़ा

भारतीय निवेशक सबसे आगे

दुबई की प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों में भारतीय सबसे आगे रहे.2025 में दुबई में घर खरीदने वाले निवेशक 150 से ज्यादा देशों से आए

रैंक देश विदेशी खरीदार
1 भारत 22%
2 ब्रिटेन (UK) 17%
3 चीन 14%

स्रोत: ANAROCK Report, 2026

कैश खरीददारों का दबदबा

रिपोर्ट के मुताबिक दुबई में लगभग 80% प्रॉपर्टी डील पूरी तरह कैश में होती हैं। यही वजह है कि ब्याज दरों में बदलाव का असर यहां अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है।

कौन खरीद रहा है दुबई में घर?

रिपोर्ट के अनुसार खरीदारों का मकसद भी अलग-अलग है

  • 38% लोग खुद रहने के लिए घर खरीद रहे हैं
  • 28% किराये की आय (Buy-to-Let) के लिए निवेश कर रहे हैं
  • 21% गोल्डन वीजा पाने के उद्देश्य से निवेश कर रहे हैं
  • 13% पूंजी सुरक्षित रखने (Capital Preservation) के लिए प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं

किन इलाकों में सबसे ज्यादा संभावनाएं?

ANAROCK का मानना है कि अब दुबई का बाजार एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां पूरे शहर में समान तेजी नहीं होगी

  • Palm Jumeirah और Downtown Dubai जैसे प्रीमियम इलाकों में वैश्विक निवेशकों की मजबूत मांग बनी रह सकती है
  • वहीं Dubai South जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित क्षेत्रों में लंबी अवधि की अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है
  • जबकि अधिक सप्लाई वाले मिड-मार्केट इलाकों में कीमतों की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रह सकती है

इतिहास बताता है दुबई की ताकत

ANAROCK ने पिछले बड़े वैश्विक संकटों का भी विश्लेषण किया है

  • 2008 Global Financial Crisis: कीमतों में करीब 40% गिरावट, रिकवरी में 3.5 साल लगे
  • 2015 Oil Crash: सिर्फ 2% गिरावट
  • 2020 COVID-19: लगभग 6% गिरावट, 13 महीनों में रिकवरी
  • 2022 Russia-Ukraine War: कीमतों में कोई गिरावट नहीं
  • 2026 Iran Conflict: केवल 4-7% की गिरावट और चार महीनों के भीतर रिकवरी शुरू

क्या है आगे का आउटलुक?

ANAROCK का मानना है कि दुबई का रियल एस्टेट बाजार मजबूत बुनियादी कारकों पर टिका हुआ है. लगातार बढ़ती आबादी, विदेशी निवेशकों की मजबूत भागीदारी, सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियां और गोल्डन वीजा जैसे कदम आने वाले समय में बाजार को सहारा देते रहेंगे.हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि अगर 2026 की दूसरी छमाही में क्षेत्रीय संघर्ष दोबारा बढ़ता है, तो यह रिहायशी बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम साबित हो सकता है.