Sugar Stocks Crash: सरकार के 10 लाख टन चीनी आयात के फैसले से शेयरों में भूचाल, 5% तक टूटे स्टॉक्स

संदीप शर्मा

• 11:34 AM • 21 Aug 2026

सरकार ने 31 अक्तूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात को मंजूरी दी है. फैसले के बाद चीनी शेयर गिरे और त्योहारों से पहले दाम, सप्लाई और स्टॉक पर नजर बढ़ गई.

NewsTak
Google CTA

न्यूज़ हाइलाइट्स

दो महीनों में चीनी के दाम करीब 40 फीसदी बढ़ चुके हैं

त्योहारों के मौसम में मिठाई की मांग बाजार पर दबाव बढ़ाती है

बड़े कारोबारियों के लिए स्टॉक सीमा अब पहले से ज्यादा कड़ी है

शुगर सेक्टर के शेयरों में शुक्रवार को तेज गिरावट देखने को मिली. सरकार के 10 लाख टन रॉ शुगर यानी कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी देने के बाद चीनी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ गया. सरकार ने यह आयात 31 अक्टूबर तक करने की अनुमति दी है. इस खबर के बाद उन चीनी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जो पिछले कुछ समय से चीनी की बढ़ती कीमतों के चलते शानदार प्रदर्शन कर रहे थे.

Read more!

5% तक टूटे चीनी कंपनियों के शेयर

शुक्रवार के कारोबार में Balrampur Chini Mills, Dhampur Sugar Mills और Bajaj Hindusthan Sugar के शेयर करीब 5% तक गिर गए. खास बात यह है कि इन कंपनियों के शेयर इससे एक दिन पहले ही अपने नए 52-वीक हाई पर पहुंचे थे. इसके अलावा EID Parry India और Shree Renuka Sugars के शेयरों में भी 3% से ज्यादा की गिरावट आई. यानी कुछ ही दिनों में जोरदार तेजी दिखाने वाले शुगर स्टॉक्स में अचानक मुनाफावसूली और बिकवाली देखने को मिली.

सरकार ने क्यों लिया आयात का फैसला?

भारत दुनिया में चीनी की खपत के मामले में सबसे बड़े देशों में शामिल है. आने वाले महीनों में देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है. अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं. इन त्योहारों के दौरान मिठाई, कन्फेक्शनरी और दूसरी खाने-पीने की चीजों में चीनी की मांग बढ़ जाती है. इसके अलावा कंपनियां भी त्योहारों से पहले चीनी का स्टॉक जमा करती हैं. ऐसे में सरकार को घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी. इसी वजह से करीब एक दशक बाद पहली बार सरकार ने बड़े पैमाने पर चीनी के आयात की अनुमति दी है.

चीनी की कीमतों में करीब 40% की तेजी

पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40% की तेजी देखने को मिली है. इसकी एक बड़ी वजह सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता है. कम बारिश और कुछ इलाकों में सूखे जैसे मौसम की वजह से गन्ने की फसल पर असर पड़ने की आशंका है. गन्ने की खेती में पानी की जरूरत ज्यादा होती है, इसलिए बारिश और सिंचाई से जुड़ी चिंता सीधे चीनी के उत्पादन पर असर डाल सकती है.

ब्राजील से भी मिल रहा है चिंता का संकेत

भारत के अलावा दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक ब्राजील से भी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. खराब मौसम के कारण वहां गन्ने की कटाई में देरी की आशंका जताई जा रही है. इसके अलावा ब्राजील में गन्ने का एक बड़ा हिस्सा चीनी की जगह एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रहा है. जून में ब्राजील के गन्ने के रस का करीब 58% हिस्सा एथेनॉल की ओर गया था. जुलाई में ब्राजील ने पेट्रोल में अनिवार्य एथेनॉल ब्लेंडिंग की सीमा भी 30% से बढ़ाकर 32% कर दी. इससे चीनी बनाने के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा पर दबाव बढ़ सकता है.

चीनी कंपनियों के शेयरों के लिए क्या मतलब?

सरकार के ड्यूटी-फ्री चीनी आयात से घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है. इससे चीनी की कीमतों पर दबाव आने की संभावना है. चीनी कंपनियों के लिए यह खबर इसलिए नकारात्मक मानी जा रही है क्योंकि हाल में शेयरों में तेजी का एक बड़ा कारण चीनी की बढ़ती कीमतें और सप्लाई की चिंता थी. अगर आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ती है और कीमतें नरम पड़ती हैं तो कंपनियों की कमाई और मार्जिन पर असर पड़ सकता है. यही वजह है कि सरकार के फैसले के बाद शुगर स्टॉक्स में बिकवाली देखने को मिली.

स्टॉक निवेशकों को अब क्या देखना होगा?

अब निवेशकों की नजर मुख्य रूप से तीन चीजों पर रहेगी

  • चीनी की घरेलू कीमतें,
  • गन्ने का उत्पादन
  • सरकार की आगे की आयात नीति

त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद जरूर है, लेकिन सरकार अगर जरूरत पड़ने पर और आयात की अनुमति देती है तो कंपनियों के लिए कीमतों में तेजी बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. इसलिए हालिया तेजी के बाद शुगर शेयरों में आगे भी वोलैटिलिटी यानी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.