एक वक्त था जब एक छोटे से कमरे से शुरू हुई EaseMyTrip की कहानी भारत की बड़ी travel-tech success stories में गिनी जाने लगी थी. तीन भाइयों ने मिलकर कंपनी शुरू की. बिना बड़े निवेश के बिजनेस खड़ा किया. साल 2021 में कंपनी का IPO आया और EaseMyTrip शेयर बाजार में लिस्ट हुई.
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इसके बाद कंपनी का नाम देश की बड़ी online travel companies में शामिल होने लगा. लेकिन आज इसी कंपनी के co-founder Nishant Pitti का नाम एक बड़े money laundering मामले में Enforcement Directorate यानी ED की chargesheet की वजह से चर्चा में है.
एक तरफ कंपनी के rise की कहानी है. दूसरी तरफ शेयर में भारी गिरावट, promoter stake sale, leadership में बदलाव, कई विवाद और अब ED की कार्रवाई.
तो आखिर Nishant Pitti की पूरी journey कैसी रही. आइए 2008 से 2026 तक की पूरी कहानी Timeline के जरिए समझते हैं.
2008 में तीन भाइयों ने शुरू की EaseMyTrip
Nishant Pitti, Rikant Pitti और Prashant Pitti ने साल 2008 में EaseMyTrip की शुरुआत की.
कंपनी की official profile के मुताबिक, शुरुआत में इसका बिजनेस मॉडल काफी lean था. कंपनी ने पहले travel agents के जरिए कारोबार शुरू किया और फिर सीधे customers तक पहुंच बनाई.
इस बिजनेस को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया गया. यानी शुरुआत किसी बड़ी funding या भारी-भरकम बाहरी निवेश के साथ नहीं हुई थी.
2011 में अपनाया Customer-Facing Model
साल 2011 में EaseMyTrip ने customer-facing model अपनाया. कंपनी ने 'no convenience fee' strategy के जरिए बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की.
यानी ग्राहक को टिकट बुकिंग के दौरान convenience fee नहीं देने का मॉडल कंपनी की पहचान बनने लगा.
कंपनी ने धीरे-धीरे अपना customer base बढ़ाया और business का विस्तार किया. यही Nishant Pitti के rise की शुरुआती कहानी थी.
2021 में आया EaseMyTrip का IPO
इसके बाद EaseMyTrip ने domestic market से आगे बढ़ते हुए international expansion की तरफ भी कदम बढ़ाया.
फिर आया साल 2021. मार्च 2021 में EaseMyTrip का IPO आया और कंपनी stock market में list हुई.
यह Nishant Pitti के career का बड़ा milestone था.
कंपनी की official profile के मुताबिक, EaseMyTrip ने bootstrapped तरीके से IPO तक का सफर तय किया था. यानी जिस कंपनी की शुरुआत बिना बड़े बाहरी funding model के हुई थी, वह कुछ ही सालों में शेयर बाजार तक पहुंच गई.
IPO के बाद Nishant Pitti सिर्फ startup founder नहीं रहे, बल्कि listed company के promoter और public-market face भी बन गए.
2023 में Sports Sponsorship से बढ़ी Brand Visibility.
साल 2023 तक EaseMyTrip ने travel business के साथ-साथ अपनी brand visibility बढ़ाने पर भी काफी जोर दिया.
Sports sponsorship इसका एक बड़ा हिस्सा था.
EaseMyTrip ने UP Warriorz के साथ 5 साल का advertising agreement किया था, जिसकी शुरुआत WPL के पहले season यानी 2023 से हुई.
इसी दौर में Patanjali भी UP Warriorz का principal sponsor था, जबकि EaseMyTrip की branding team की jersey पर थी.
इसलिए Patanjali और EaseMyTrip का connection किसी व्यक्तिगत विवाद का मामला नहीं था. यह 2023 में UP Warriorz से जुड़ा sponsorship और branding association था.
इसी साल EaseMyTrip ने IBA Women's World Championship और Chennai Blitz जैसी sports properties के साथ भी sponsorship और association की.
यानी 2023 तक कहानी मुख्य रूप से growth और brand building की थी.
2024 में Nishant Pitti ने बेचे ₹920 करोड़ के शेयर.
इसके बाद कहानी में बड़ा मोड़ आया
सितंबर 2024 में Nishant Pitti ने EaseMyTrip के करीब 24.65 करोड़ shares block deals के जरिए बेच दिए.
इस stake sale की value करीब ₹920 करोड़ थी.
इस बिक्री के बाद उनकी हिस्सेदारी करीब 28.13% से घटकर लगभग 14% रह गई.
दिलचस्प बात यह रही कि stake sale की खबर के बाद EaseMyTrip के stock में intraday करीब 6.4% की तेजी भी देखने को मिली.
लेकिन इसी दौर में कंपनी के stock को लेकर बाजार में सवाल भी बढ़ने लगे.
IPO के बाद जिस कंपनी ने एक समय निवेशकों का काफी ध्यान खींचा था, उसके शेयर पर अब दबाव दिखाई देने लगा था.
1 जनवरी 2025 को Nishant Pitti ने CEO पद छोड़ा.
फिर आया जनवरी 2025.
1 जनवरी 2025 को Nishant Pitti ने EaseMyTrip के CEO पद से इस्तीफा दे दिया.
उन्होंने इसके पीछे personal reasons बताए.
यह इस्तीफा उस समय आया जब इससे कुछ समय पहले ही Nishant Pitti अपनी हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा बेच चुके थे.
इसके बाद कंपनी के operational leadership structure में बदलाव हुआ और Rikant Pitti ने CEO की जिम्मेदारी संभाली.
यानी जिस founder ने कंपनी के rise में बड़ी भूमिका निभाई थी, वही अब कंपनी के day-to-day CEO role से बाहर हो गए.
लेकिन कहानी का अगला बड़ा मोड़ अभी बाकी था.
अप्रैल 2025 में ED ने की Search
अप्रैल 2025 में Enforcement Directorate यानी ED ने Nishant Pitti से जुड़े premises पर search की.
इसके बाद Mahadev online betting case की investigation में Nishant Pitti का नाम सामने आने लगा.
ED की जांच कथित betting proceeds की money laundering और उसे Indian equity market में लगाने के आरोपों से जुड़ी थी.
रिपोर्ट्स के मुताबिक Nishant Pitti से इस मामले में पूछताछ भी हुई.
यहीं से उनकी कहानी business success से निकलकर controversy और legal scrutiny के phase में पहुंचने लगी.
Operation Sindoor के दौरान Turkey और Azerbaijan को लेकर अपील.
मई 2025 में India-Pakistan tensions के बीच Nishant Pitti एक अलग वजह से चर्चा में आए.
उन्होंने Turkey और Azerbaijan की यात्रा से बचने की अपील की.
उनका कहना था कि जब इन देशों ने पाकिस्तान के समर्थन में रुख दिखाया है, तो भारतीयों को वहां tourism को support करने पर दोबारा विचार करना चाहिए.
उन्होंने अपने पोस्ट में बताया कि पिछले साल करीब 2.87 लाख भारतीय Turkey और करीब 2.43 लाख भारतीय Azerbaijan गए थे.
EaseMyTrip ने भी उस समय Turkey और Azerbaijan की bookings में cancellations बढ़ने की बात कही थी.
Reuters के मुताबिक, कंपनी ने Turkey में करीब 22% cancellations और Azerbaijan में 30% से ज्यादा cancellations की बात कही थी.
इसके बाद Nishant Pitti ने Chinese products और Chinese-owned websites के इस्तेमाल को लेकर भी public comments किए और 'Made in India' products को support करने की बात कही.
इससे उनका नाम travel industry के अलावा national-interest और boycott debate में भी चर्चा में आया.
29 अगस्त 2025 को Nishant Pitti बने Chairman cum MD
इसके बाद EaseMyTrip में एक और बड़ा leadership change हुआ.
29 अगस्त 2025 को कंपनी के board ने Nishant Pitti को Chairman cum Managing Director यानी CMD बनाने को मंजूरी दी.
उसी दिन Prashant Pitti ने Managing Director पद से इस्तीफा दे दिया.
यानी कुछ ही महीनों पहले CEO पद से हटे Nishant Pitti अब कंपनी के Chairman cum MD बन गए.
कंपनी के मुताबिक, Prashant Pitti ने startups को mentor करने, entrepreneurial ventures और public-good initiatives पर focus करने के लिए executive role छोड़ा. हालांकि वह promoter बने रहे.
IPO के ₹212 से शेयर करीब ₹7.85 तक पहुंचा.
अब आते हैं उस आंकड़े पर, जो EaseMyTrip की stock market journey को समझने में सबसे अहम है.
EaseMyTrip का IPO price और listing reference करीब ₹212 था.
लेकिन अप्रैल 2026 में कंपनी का stock करीब ₹7.85 के आसपास आ चुका था.
यानी ₹212 के मुकाबले ₹7.85 का स्तर लगभग 96% की गिरावट दिखाता है.
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. किसी शेयर में इतनी बड़ी गिरावट अपने आप में किसी व्यक्ति की कानूनी गलती साबित नहीं करती.
लेकिन business और stock market की कहानी के लिहाज से यह जरूर दिखाता है कि कंपनी के market valuation पर कितना दबाव आया.
इसी रिपोर्ट में promoter share pledging और mutual fund holdings में कमी जैसे factors पर भी सवाल उठाए गए थे.
यानी एक तरफ 2021 में IPO और growth की कहानी थी, तो दूसरी तरफ 2026 तक stock में बहुत बड़ी गिरावट देखने को मिली.
सितंबर 2026 में ED की Chargesheet.
अब आते हैं सबसे ताजा घटनाक्रम पर
सितंबर 2026 में ED ने Mahadev online betting app money laundering case में Nishant Pitti को chargesheet किया.
ED का आरोप है कि Nishant Pitti ने illegal betting से जुड़े proceeds को foreign portfolio investments यानी FPI के जरिए Indian equity market में लाने में मदद की.
ED ने यह भी आरोप लगाया कि Easy Trip Planners के promoters की तरफ से एक associate के साथ pre-arranged arrangement किया गया था. Agency के मुताबिक, इसके जरिए कंपनी के stock price और market capitalisation को artificially बढ़ाने की कोशिश की गई.
हालांकि ये ED के आरोप हैं और इन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है.
₹59.60 करोड़ के Shares पर ED की कार्रवाई
इस पूरे मामले में सबसे अहम आंकड़ा ₹59.60 करोड़ का है.
ED ने Nishant Pitti के करीब ₹59.60 करोड़ के demat shares को provisionally attach किया है और court से इन्हें confiscate करने की permission मांगी है.
ED ने इन shares को alleged proceeds of crime बताया है.
Agency के मुताबिक, इस पूरे मामले में अब तक 14 गिरफ्तारियां और ₹1,885 करोड़ की assets attachment की जा चुकी है. इसके अलावा 116 accused और 190 premises की searches किए जाने की बात भी ED ने कही है.
ED ने यह भी दावा किया है कि Mahadev betting network से जुड़े proceeds 2019 से करीब ₹80,000 करोड़ तक हो सकते हैं.
हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में इस मामले की रकम के अलग-अलग आंकड़े भी सामने आए हैं. इसलिए इन आंकड़ों को ED के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.
Nishant Pitti का क्या कहना है
अब इस कहानी का दूसरा पक्ष भी उतना ही जरूरी है.
Nishant Pitti ने कहा है कि उन्हें jurisdictional court की किसी chargesheet या summons की जानकारी नहीं थी.
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा law-enforcement agencies के साथ cooperation किया है और आगे भी करते रहेंगे.
उनका कहना है कि उनके transactions और assets lawful हैं और formal banking channels के जरिए हैं.
उन्होंने ED के आरोपों को contest करने की बात कही है.
यानी इस मामले का legal chapter अभी खत्म नहीं हुआ है.
ED का आरोप एक पक्ष है और Nishant Pitti का denial दूसरा पक्ष. अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा.
2008 से 2026 तक Nishant Pitti की पूरी Timeline.
अगर पूरी कहानी को एक Timeline में समझें, तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है.
2008: Nishant Pitti, Rikant Pitti और Prashant Pitti ने EaseMyTrip की शुरुआत की.
2011: कंपनी ने customer-facing model और no-convenience-fee strategy अपनाई.
2021: EaseMyTrip का IPO आया और कंपनी stock market में list हुई.
2023: Sports sponsorships और brand expansion पर कंपनी ने जोर दिया.
2024: Nishant Pitti ने करीब ₹920 करोड़ के shares बेचे. इस stake sale में करीब 24.65 करोड़ shares शामिल थे.
1 जनवरी 2025: Nishant Pitti ने EaseMyTrip के CEO पद से इस्तीफा दिया.
अप्रैल 2025: ED ने Nishant Pitti से जुड़े premises पर search की.
मई 2025: Operation Sindoor के दौरान Nishant Pitti ने Turkey और Azerbaijan travel को लेकर अपील की. इसके बाद Chinese products और websites को लेकर भी उनके बयान चर्चा में रहे.
29 अगस्त 2025: Nishant Pitti को EaseMyTrip का Chairman cum MD बनाया गया.
अप्रैल 2026: Inc42 की रिपोर्ट के मुताबिक EaseMyTrip का stock करीब ₹7.85 पर था, जो ₹212 के IPO/listing reference से करीब 96% नीचे था.
सितंबर 2026: ED ने Mahadev betting money laundering case में Nishant Pitti को chargesheet किया और करीब ₹59.60 करोड़ के demat shares को provisionally attach किया.
Rise से Legal Scrutiny तक पहुंची कहानी.
Nishant Pitti की कहानी को सिर्फ success या सिर्फ fall के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता.
यह एक ऐसी journey है जिसमें एक bootstrapped travel startup के founder ने कंपनी को IPO तक पहुंचाया. कंपनी की brand visibility बढ़ी. Sports sponsorships हुए. इसके बाद promoter stake sale हुआ, leadership roles बदले, stock में भारी गिरावट आई और अब एक बड़े financial-crime investigation में उनका नाम chargesheet तक पहुंच गया है.
लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे जरूरी बात यह है कि ED के आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी हैं और Nishant Pitti ने इन आरोपों से इनकार किया है.
इसलिए इस मामले का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है.
अब इस कहानी का अगला chapter legal proceedings और EaseMyTrip के business performance से तय होगा.
फिलहाल सबसे बड़े सवाल यही हैं कि EaseMyTrip का stock IPO के समय के करीब ₹212 से गिरकर ₹7.85 के आसपास कैसे पहुंचा और ₹59.60 करोड़ के shares की ED attachment के बाद Nishant Pitti और EaseMyTrip की आगे की कहानी किस दिशा में जाती है.
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