Union Budget 2026 से पहले आर्थिक सर्वेक्षण की 10 बड़ी बातें, पिछले 1 सालों में देश की अर्थव्यवस्था कहां खड़ी है? जानें

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 संसद में हुआ पेश, FY27 में 6.8-7.2% GDP ग्रोथ रहने का अनुमान. सरकार का फोकस AI, डिजिटल इकोनॉमी, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर. जानें सोना-चांदी, CAD, रुपये और राजकोषीय घाटे पर क्या कहा गया.

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आर्थक सर्वेक्षण क्या कहता है?

सौरभ दीक्षित

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बजट से पहले संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश कर दिया गया है. यह वही दस्तावेज है जो हमें बताता है कि देश की अर्थव्यवस्था अभी कहां खड़ी है, पिछले एक साल में क्या हुआ और आगे का रास्ता कैसा दिख रहा है. आज हम आपको इस पूरे आर्थिक सर्वेक्षण की 10 बड़ी बातें बताने जा रहे हैं. आपको पूरा आर्थिक सर्वेक्षण स्टेप बाइ स्टेप आसान भाषा में समझा रहे हैं.  

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आर्थिक सर्वे के मुताबिक,  वित्त वर्ष 2027 (FY27) में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है. सरकार का कहना है कि इस ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन है- मजबूत घरेलू मांग यानी देश के अंदर लोग खर्च कर रहे हैं, कंपनियां बेच रही हैं और सरकार निवेश कर रही है. आर्थिक सर्वे बताता है कि  FY26 के लिए ग्रोथ 7 फीसदी से ऊपर रहने की उम्मीद है. 
 
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का प्रदर्शन मजबूत रहा है, खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी कैपेक्स और सुधारों की वजह से. इस बार आर्थिक सर्वे में एक बड़ी और नई बात देखने को मिली है.  Artificial Intelligence यानी AI पर फोकस है. पहली बार पूरा अलग चैप्टर शामिल किया गया है. इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में सरकार का फोकस होगा- AI,  नई टेक्नोलॉजी,  डिजिटल इकोनॉमी पर होगा. यानी आने वाले बजट और नीतियों में AI से जुड़ी घोषणाएं देखने को मिल सकती हैं. 

आर्थिक सर्वे में सोना-चांदी का जिक्र 

आर्थिक सर्वे में सोने और चांदी को लेकर भी खास जिक्र किया गया है. रिपोर्ट बताता है कि चालू खाते के घाटे यानी CAD और आयात पर निर्भरता की वजह से रुपये पर दबाव बना है. हालांकि सरकार का मानना है कि  कमजोर रुपया हमेशा बुरी खबर नहीं होता, क्योंकि इससे निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है. इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट को मजबूत करना जरूरी बताया गया है।

आर्थिक सर्वे के अनुसार, राजकोषीय घाटा GDP का 4.8% पर पूरा हुआ है. सरकार का कहना है कि फिस्कल कंसोलिडेशन, बजटीय ग्लाइड पाथ पूरी तरह ट्रैक पर है. यानी सरकार खर्च भी कर रही है और घाटे को काबू में भी रख रही है. 

आर्थिक सर्वे में संकेत दिया गया है कि GST सुधारों का अगला फेज ई-वे बिल सिस्टम पर केंद्रित हो सकता है. इससे  टैक्स चोरी कम होगी,  लॉजिस्टिक्स बेहतर होगा और व्यापार करना आसान बनेगा. रिपोर्ट में विदेशी निवेशकों की निकासी को लेकर चिंता भी जताई गई है. हालांकि सरकार का कहना है कि मौजूदा वैश्विक हालात भारत के लिए तुरंत कोई बड़ा मैक्रो-इकोनॉमिक खतरा नहीं हैं. लेकिन  जियोपॉलिटिक्स, अमेरिकी टैरिफ और ग्लोबल स्लोडाउन जैसी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. 

क्या होता है आर्थिक सर्वे? 

आसान भाषा में कहें तो आर्थिक सर्वे सरकार की सालाना रिपोर्ट होती है जो बजट से पहले पेश की जाती है. इसमें बताया जाता है अर्थव्यवस्था की हालत, महंगाई ,  ग्रोथ, रोजगार,  व्यापार और आगे की रणनीति यह बजट का रोडमैप तैयार करता है, लेकिन खुद कोई स्कीम या टैक्स ऐलान नहीं करता. कुल मिलाकर Economic Survey 2025-26 कहता है...

  • भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है. 
  • घरेलू मांग ग्रोथ का सहारा है. 
  • AI और टेक्नोलॉजी पर भविष्य का दांव है.  
  • फिस्कल मैनेजमेंट कंट्रोल में है, लेकिन वैश्विक जोखिमों से सावधान रहने की जरूरत है.
  •  अब सबकी नजर Union Budget 2026 पर है, जहां इस सर्वे की तस्वीर असल नीतियों में बदलती दिखेगी. 

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