शेयर बाजार में इन दिनों गिरावट का माहौल है. इसी बीच वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने सितंबर की मासिक आर्थिक समीक्षा जारी की है. इस रिपोर्ट में देश की अर्थव्यवस्था की ताजा तस्वीर सामने रखी गई है. रिपोर्ट में एक तरफ आर्थिक विकास, निवेश, कर्ज और निर्यात से जुड़े कई मजबूत आंकड़े हैं. वहीं दूसरी तरफ महंगाई, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की कमजोरी और दुनिया भर में बढ़ती ब्याज दरों जैसी चुनौतियों का भी जिक्र है.
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आर्थिक विकास की रफ्तार मजबूत
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही. यह मौजूदा आंकड़ा श्रृंखला में पहली तिमाही की सबसे तेज वृद्धि है. वहीं दूसरी तिमाही के लिए वित्त मंत्रालय के अनुमान में वृद्धि दर करीब 7.3 प्रतिशत रहने की बात कही गई है. इसका मतलब है कि फिलहाल देश की घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार कमजोर पड़ती नहीं दिख रही है.
निवेश में भी तेजी
अर्थव्यवस्था की मजबूती का दूसरा बड़ा संकेत निवेश से मिल रहा है. निवेश की रफ्तार पिछले साल के मुकाबले काफी तेज हुई है. निवेश दर 5.8 फीसदी से बढ़कर 11.9 फीसदी हो गई है. GDP में निवेश का हिस्सा भी 34.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इससे संकेत मिलता है कि कंपनियों की तरफ से नई क्षमता तैयार करने और कारोबार बढ़ाने के लिए खर्च जारी है.
क्रेडिट ग्रोथ मजबूत
बैंकिंग क्षेत्र से भी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत मिल रहे हैं. बैंकों का कर्ज करीब 20 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रहा है. उद्योगों को दिए जाने वाले कर्ज में भी करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. यानी कारोबार और उद्योगों में कर्ज की मांग अभी कमजोर नहीं पड़ी है.
निर्यात में बढ़त
देश के निर्यात के आंकड़े भी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं. अप्रैल से अगस्त के बीच भारत का कुल निर्यात करीब 399.3 अरब डॉलर रहा. यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 15.5 प्रतिशत ज्यादा है. इलेक्ट्रॉनिक सामान के निर्यात में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है.
विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत
भारत के पास विदेशी मुद्रा का भंडार भी मजबूत स्थिति में है. 18 सितंबर तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 765.9 अरब डॉलर था. यह करीब 11 महीने के आयात के बराबर है. वहीं अप्रैल से जुलाई के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करीब 13.4 अरब डॉलर रहा. यानी बाहरी मोर्चे पर भी भारत के पास फिलहाल एक मजबूत सुरक्षा कवच मौजूद है.
महंगाई ने बढ़ाई चिंता
अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई. खाद्य महंगाई भी बढ़कर करीब 5.95 प्रतिशत रही. थोक महंगाई करीब 9.92 प्रतिशत पर पहुंच गई. महंगाई बढ़ने का असर सिर्फ आम आदमी की जेब पर नहीं पड़ता. अगर कच्चा माल और दूसरी लागत महंगी होती है, लेकिन कंपनियां अपने सामान की कीमत उसी अनुपात में नहीं बढ़ा पातीं, तो उनके मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है. रिपोर्ट में मेटल, केमिकल और प्लास्टिक-रबर जैसे क्षेत्रों में लागत बढ़ने का जिक्र किया गया है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी
शेयर बाजार के लिए एक और चिंता विदेशी निवेशकों के रुख को लेकर है. सितंबर में 25 तारीख तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 3.3 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी की है. इसका मतलब यह नहीं है कि विदेशी निवेशकों की भारत में रुचि पूरी तरह खत्म हो गई है. लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक उनका रुख फिलहाल सतर्क है.
रुपये पर भी दबाव
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और दुनिया भर के घटनाक्रम का असर रुपये पर भी दिख रहा है. अप्रैल की शुरुआत में एक डॉलर करीब 93.2 रुपये का था. सितंबर के आखिर तक यह बढ़कर करीब 95.9 रुपये हो गया. रुपये की कमजोरी से खास तौर पर उन चीजों के आयात की लागत बढ़ सकती है, जिनके लिए भारत दूसरे देशों पर निर्भर है.
अमेरिका की ब्याज दर भी अहम
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका में भी ब्याज दरों को लेकर बाजार की नजर बनी हुई है. अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने सितंबर में ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो दुनिया भर में निवेश की दिशा पर इसका असर पड़ सकता है. ऐसे में भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी पैसा बाहर जाने का दबाव बढ़ सकता है. इसके साथ ही दुनिया भर में कर्ज की लागत, सरकारी बॉन्ड रेट, कच्चे तेल की कीमत और डॉलर की चाल भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है.
व्यापार घाटा बढ़ा
जुलाई में चालू खाते का घाटा करीब 7 अरब डॉलर रहा. पिछले साल इसी महीने यह करीब 3.2 अरब डॉलर था. वहीं अप्रैल से अगस्त के दौरान कुल व्यापार घाटा करीब 60.4 अरब डॉलर रहा.
कमजोर मॉनसून बढ़ाएगा चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक मानसून की बारिश सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम रही है. खरीफ की बुवाई भी पिछले साल के मुकाबले थोड़ी कम है. अगर बारिश की कमी का असर फसलों पर पड़ता है, तो आने वाले समय में खाद्य महंगाई बढ़ने का दबाव बन सकता है. रिपोर्ट में अल नीनो के जोखिम का भी जिक्र किया गया है.
फिर शेयर बाजार पर दबाव क्यों?
भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत दिखाई दे रही है, लेकिन कच्चे तेल की कीमत, बढ़ती महंगाई, रुपये की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और दुनिया भर में ऊंची ब्याज दरें बाजार पर दबाव डाल रही हैं. यानी इस समय भारत की कहानी सिर्फ आर्थिक विकास की नहीं है. ये मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच संतुलन की कहानी है.
बाजार के लिए अहम ट्रिगर
आने वाले दिनों में बाजार की नजर खास तौर पर कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल, अमेरिका में ब्याज दर और सरकारी बांड की दर, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिकवाली, महंगाई और कंपनियों के मुनाफे के साथ-साथ देश की आर्थिक विकास दर पर रहेगी. कुल मिलाकर सितंबर की मासिक आर्थिक समीक्षा से तस्वीर यह सामने आती है कि भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है, लेकिन बाहरी चुनौतियां बढ़ी हैं. इसलिए शेयर बाजार की मौजूदा कमजोरी को सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था की कमजोरी के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि मजबूत घरेलू आर्थिक विकास इन वैश्विक दबावों के बीच कितना टिकता है.
नोट: यह खबर सरकारी रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों और उपलब्ध आर्थिक आंकड़ों पर आधारित है. इसे निवेश की सलाह न समझें. शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है. कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें.
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