रसोई के बजट पर महंगाई की एक और मार पड़ी है. त्योहारों से पहले सरसों, सोयाबीन और मूंगफली तेल के दाम तेज हुए हैं. इसका असर घरों से लेकर होटल और बाहर खाने के कारोबार तक दिख रहा है.
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आंकड़ों के मुताबिक खाने के तेल की कीमतों में 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बाजार में बढ़ती मांग, बरसात में सरसों तेल का ज्यादा इस्तेमाल, रुपये की कमजोरी और पाम व पामोलीन पर बढ़ी ड्यूटी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है.
महंगाई की बड़ी वजहें
- त्योहारों के करीब आते ही खाद्य तेल की मांग बढ़ी है. - बरसात के मौसम में सरसों की खपत ज्यादा रहने से दबाव बढ़ा है. - रुपये की कमजोरी से बाहर से आने वाले खाद्य तेल महंगे हुए हैं. - पाम और पामोलीन पर बढ़ी ड्यूटी का असर भी बाजार में दिख रहा है.
मंडियों में माल कम, मांग बनी हुई
बाजार के जानकारों का कहना है कि तेजी की सबसे बड़ी वजह तेल वाली फसलों की कम आवक है. किसानों को पहले बेहतर भाव मिल चुके हैं, इसलिए वे कम कीमत पर बिक्री से बच रहे हैं. इसका असर यह हुआ है कि मंडियों में सोयाबीन और सरसों का माल कम पहुंच रहा है, जबकि मांग लगातार बनी हुई है.
- सोयाबीन की रोजाना मांग करीब 2.5 से 3 लाख बोरी बताई जा रही है. - मंडियों में इसकी आवक घटकर करीब 10 हजार बोरी रह गई है. - लातूर के बड़े कारखानों ने खरीद भाव बढ़ाकर 8,100 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. - बिनौला तेल की कमी से मूंगफली तेल की मांग भी बढ़ गई है.
थोक बाजार में क्या हाल है
मांग और आपूर्ति के इसी फर्क का असर थोक बाजार में भी साफ दिख रहा है. बीते हफ्ते सरसों, सोयाबीन और मूंगफली तेल और तिलहन के भाव में तेजी दर्ज की गई. कई चीजों के दाम एक ही हफ्ते में सैकड़ों रुपये तक बढ़े हैं.
- सरसों दाना 8,075 से बढ़कर 8,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. - सरसों तेल का भाव 16,550 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है. - सरसों कच्ची और पक्की घानी का 15 किलो टिन 2,705 से बढ़कर 2,855 रुपये हो गया है. - सोयाबीन दाना 7,550 से बढ़कर 7,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है.
अगर मंडियों में आवक में जल्द सुधार नहीं हुआ और त्योहारी मांग इसी तरह बनी रही, तो खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव आगे भी बना रह सकता है. इसका सीधा असर घर की रसोई पर पड़ेगा और त्योहारों के दौरान खाने-पीने का खर्च और बढ़ सकता है.
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