अंबानी पर क्यों भड़के मस्क, क्या भारत में Jio और Starlink के बीच छिड़ेगी सस्ते इंटरनेट की जंग?

चिराग ठाकुर

• 02:41 PM • 10 Oct 2026

Elon Musk ने Mukesh Ambani पर Starlink की भारत में एंट्री में रुकावट डालने का आरोप लगाया है. जानिए Jio की सैटेलाइट इंटरनेट योजना, सरकार का जवाब और इस विवाद से ग्राहकों को क्या फायदा हो सकता है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

मस्क का अंबानी पर सीधा हमला

Jio का 1,600 सैटेलाइट नेटवर्क प्लान

Starlink की भारत में एंट्री पर सरकारी नियम क्या ?

Elon Musk और Mukesh Ambani के बीच सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर विवाद चर्चा में है. SpaceX की इंटरनेट सेवा Starlink भारत में कारोबार शुरू करने की तैयारी कर रही है, लेकिन इस बीच मस्क ने भारत के कुछ ताकतवर कारोबारियों पर उसकी राह में रुकावट डालने का आरोप लगाया है. इसके बाद उन्होंने सीधे मुकेश अंबानी का नाम लेकर सवाल उठाया कि क्या वही भारत के असली बॉस हैं. मस्क ने एक अन्य पोस्ट में अंबानी पर तंज कसते हुए उन्हें 'Dear Prime Minister Ambani' भी कहा.

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लेकिन इस विवाद के पीछे की कहानी सिर्फ दो बड़े कारोबारियों के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं है. भारत में सैटेलाइट इंटरनेट का बाजार तेजी से अहम हो रहा है और Reliance Jio भी इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है. ऐसे में सवाल है कि Starlink की राह में असल अड़चन क्या है और इस पूरे मामले में सरकार का क्या रुख है.


Elon Musk ने Mukesh Ambani पर क्या आरोप लगाए?


मस्क ने पहले बिना नाम लिए आरोप लगाया कि भारत में कुछ प्रभावशाली कारोबारी Starlink की एंट्री रोकने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि बाजार में अपना दबदबा बनाए रखा जा सके. उन्होंने इसे भारतीय उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ बताया. इसके बाद मस्क ने सीधे मुकेश अंबानी का नाम लिया और सवाल किया कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं.
मस्क का कहना है कि Starlink जरूरी नियमों का पालन करने के बावजूद भारत में अपनी सेवा शुरू करने की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रही है. हालांकि, अब तक सार्वजनिक तौर पर ऐसा कोई निर्णायक सबूत सामने नहीं आया है, जिससे साबित हो कि मुकेश अंबानी या Reliance Jio ने Starlink की मंजूरी रुकवाने की कोशिश की है.


Starlink क्या है और भारत में इसे लेकर विवाद क्यों है?


Starlink, Elon Musk की कंपनी SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है. यह पारंपरिक मोबाइल टावर या जमीन के नीचे बिछे फाइबर नेटवर्क पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराती है.
इस तकनीक से उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां टावर लगाना या फाइबर नेटवर्क बिछाना मुश्किल और महंगा है. हालांकि, भारत में व्यावसायिक सेवा शुरू करने के लिए Starlink को सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी करने और स्पेक्ट्रम आवंटन जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा.


Jio भी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में उतरने की तैयारी में


भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की संभावनाओं को देखते हुए Reliance Jio भी अपना नेटवर्क तैयार करने की योजना पेश कर चुकी है. India Mobile Congress 2026 में कंपनी ने करीब 1,600 लो अर्थ ऑर्बिट यानी LEO सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशन से जुड़े प्रस्तावित नेटवर्क की जानकारी दी.
Jio की योजना सैटेलाइट कनेक्टिविटी को अपने मौजूदा मोबाइल और फाइबर नेटवर्क के साथ जोड़ने की है. इससे दूर-दराज के इलाकों, गांवों, द्वीपों और सीमावर्ती क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है. कंपनी का लक्ष्य छह लाख से ज्यादा गांवों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने का है. हालांकि, यह फिलहाल एक प्रस्तावित योजना है, चालू हो चुका नेटवर्क नहीं. ऐसे में भविष्य में Starlink और Jio के बीच प्रतिस्पर्धा की संभावना बनती है. लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि Jio ने ही Starlink की एंट्री रोकने की कोशिश की है.


Jio और Airtel का SpaceX से समझौता भी है


इस विवाद का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि Reliance Jio और Bharti Airtel ने मार्च 2025 में SpaceX के साथ अलग-अलग समझौते किए थे. इनका उद्देश्य सरकारी मंजूरी मिलने के बाद भारत में Starlink की सेवाएं और उपकरण ग्राहकों तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशना था.
यानी संभावित प्रतिस्पर्धा के बावजूद भारतीय दूरसंचार कंपनियों और SpaceX के बीच साझेदारी के विकल्प भी मौजूद हैं.


सरकार ने क्या कहा?


मस्क के आरोपों के बीच संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता. उनके मुताबिक, Starlink, Jio Satellite Communications और Bharti समर्थित Eutelsat OneWeb को सैटेलाइट कम्युनिकेशन के लाइसेंस मिल चुके हैं.
हालांकि, लाइसेंस मिलने के बाद भी कंपनियां तुरंत सेवा शुरू नहीं कर सकतीं. उन्हें सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी करनी होंगी और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. सरकार का कहना है कि ये नियम सभी कंपनियों पर लागू होते हैं.
आम ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
सैटेलाइट इंटरनेट से दूर-दराज के इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है. लेकिन आम ग्राहकों के लिए इसकी उपयोगिता कई बातों पर निर्भर करेगी.

 

  • इंटरनेट की कीमत: सेवा का मासिक खर्च कितना होगा.
  • उपकरणों की लागत: कनेक्शन के लिए जरूरी डिवाइस खरीदना कितना महंगा पड़ेगा.
  • सेवा की गुणवत्ता: इंटरनेट की गति, स्थिरता और दूर-दराज के इलाकों में उपलब्धता कैसी होगी.


फिलहाल, मस्क के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सरकार का कहना है कि सभी कंपनियों को जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि Starlink और Jio अपनी योजनाओं को कब तक सेवा में बदल पाती हैं और भारतीय ग्राहकों को कितनी किफायती दरों पर बेहतर इंटरनेट उपलब्ध होता है.