EPFO Amnesty Scheme 2026: ईपीएफओ की 6 महीने की माफी योजना शुरू, अटके पीएफ ट्रस्टों को राहत.

तनीषा त्यागी

• 04:54 PM • 12 Jul 2026

ईपीएफओ की नई 6 महीने की माफी योजना से ऐसे पीएफ ट्रस्टों को राहत मिलेगी, जिनके पास औपचारिक छूट नहीं है. जानें पात्रता, फायदा और आवेदन की पूरी प्रक्रिया.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

योजना आयकर मान्यता वाले पर बिना औपचारिक छूट संस्थानों के लिए है

आवेदन योजना लागू होने से छह महीने के भीतर किए जा सकेंगे

पात्र संस्थानों को दो श्रेणियों में बांटकर नियमितीकरण का रास्ता दिया गया

EPFO Amnesty Scheme 2026: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने एक नई छह महीने की माफी योजना शुरू की है. इस योजना का मकसद उन संस्थानों और कंपनियों को एक बार का अवसर देना है, जो अपने पीएफ ट्रस्ट का संचालन तो कर रहे हैं, लेकिन अभी तक ईपीएफ एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 के तहत आवश्यक औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं. श्रम और रोजगार मंत्रालय के मुताबिक, यह योजना सीमित अवधि के लिए लागू की गई है और पात्र संस्थानों को अपनी स्थिति नियमित कराने का मौका देगी. मंत्रालय ने नियोक्ताओं, संबंधित संस्थानों और अन्य हितधारकों से इस योजना का लाभ उठाने की अपील की है.

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किन संस्थानों के लिए है यह योजना?

यह योजना उन संस्थानों पर लागू होगी, जिनके पीएफ ट्रस्ट आयकर अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त हैं और संचालन में हैं, लेकिन उन्हें केंद्र या राज्य सरकार की ओर से औपचारिक छूट का नोटिफिकेशन अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है. ऐसे संस्थानों को अब अपनी कानूनी स्थिति को नियमित कराने के लिए एक बार का अवसर दिया गया है, जिससे भविष्य में अनुपालन से जुड़े विवादों को कम किया जा सके.

वित्त अधिनियम 2026 के बदलावों के अनुरूप उठाया गया कदम

नई योजना वित्त अधिनियम-2026 में किए गए बदलावों के अनुरूप लाई गई है. इसका उद्देश्य आयकर अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त भविष्य निधि व्यवस्था को ईपीएफ अधिनियम के वैधानिक और प्रशासनिक प्रावधानों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना है. संशोधित व्यवस्था के अनुसार अब आयकर अधिनियम के तहत मान्यता केवल उन्हीं प्रोविडेंट फंड ट्रस्टों को मिलेगी, जिन्हें ईपीएफ अधिनियम की धारा-17 के तहत औपचारिक छूट प्राप्त होगी.

कौन कर सकता है आवेदन?

श्रम और रोजगार मंत्रालय के अनुसार, आवेदन वही संस्थान कर सकते हैं जो आयकर अधिनियम, 1961 के तहत मान्यता प्राप्त पीएफ ट्रस्ट संचालित कर रहे हैं, लेकिन उनके पास केंद्र या राज्य सरकार से औपचारिक छूट का नोटिफिकेशन उपलब्ध नहीं है. इस योजना का नोटिफिकेशन 29 जून 2026 को जारी किया गया था और इसके लागू होने की तारीख से छह महीने तक आवेदन किए जा सकेंगे.

पात्र संस्थानों को दो श्रेणियों में बांटा गया

इस छह महीने की योजना के तहत पात्र संस्थानों को दो अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है.

  • पहली श्रेणी में वे संस्थान शामिल हैं, जिन्होंने पहले से अपने ट्रस्ट के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है और गैर-छूट प्राप्त संस्थान के रूप में आवश्यक अनुपालन भी कर रहे हैं.
  • दूसरी श्रेणी में वे संस्थान आते हैं, जो सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत छूट प्राप्त संस्थान के रूप में अपना संचालन जारी रखे हुए हैं.

योजना के तहत क्या मिलेगा फायदा?

इस योजना के जरिए पात्र संस्थानों को अपने पीएफ ट्रस्ट की स्थापना की तारीख से निर्धारित अवधि तक छूट की स्थिति को नियमित कराने की सुविधा मिलेगी. इसके अलावा सोशल सिक्योरिटी कोड-2020 के तहत लागू कुछ शर्तों में भी राहत दी जाएगी. इनमें न्यूनतम कर्मचारी संख्या, फंड के आकार से जुड़े नियम और तीन वर्ष के पूर्व अनुपालन जैसी आवश्यकताओं से संबंधित छूट शामिल है.योजना का उद्देश्य पात्र संस्थानों को अनुपालन संबंधी जटिलताओं से राहत देना और उनकी स्थिति को औपचारिक रूप से नियमित करना है.

बकाया, ब्याज और हर्जाने में भी राहत

इस योजना के तहत एक महत्वपूर्ण राहत यह भी दी गई है कि बकाया राशि, हर्जाना और ब्याज से जुड़े लंबित आकलनों को वापस लिया जा सकता है और माफ किया जा सकता है. हालांकि इसके लिए यह शर्त होगी कि संबंधित सदस्य खातों में वैधानिक दर के बराबर या उससे अधिक अंशदान और ब्याज पहले से जमा कराया गया हो.

आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी?

पात्र संस्थानों को इस योजना के तहत संबंधित EPFO क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से केंद्र सरकार को ईमेल के जरिए औपचारिक आवेदन भेजना होगा. इसके साथ ही आवेदकों को अपने वित्तीय खातों का ऑडिट किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से कराना अनिवार्य होगा. यदि EPFO अधिकारियों की ओर से किसी विशेष या अनुपालन ऑडिट की आवश्यकता बताई जाती है, तो उसे आवेदन जमा करने के तीन महीने के भीतर पूरा करना होगा.

 6 महीने का सीमित अवसर

EPFO की यह नई योजना केवल छह महीने के लिए लागू रहेगी. ऐसे में पात्र संस्थानों के पास अपनी कानूनी स्थिति को नियमित कराने और अनुपालन से जुड़े लंबित मामलों को सुलझाने का सीमित समय होगा. जो संस्थान इस अवधि के भीतर आवेदन करेंगे, वे योजना में उपलब्ध राहतों और नियमितीकरण की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे. इसके बाद सामान्य नियमों के अनुसार प्रक्रिया लागू होगी.