कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के सदस्यों के लिए पेंशन से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है. सरकार के मुताबिक, 5 अगस्त 2026 तक 15.24 लाख सदस्यों ने हायर पेंशन के लिए क्लेम किया है. इनमें से करीब 1.49 लाख लोगों को पेंशन पेमेंट ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं.
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सरकार ने यह भी बताया है कि 11,595 क्लेम अब भी बाकी हैं. यह जानकारी श्रम राज्य मंत्री शोभा कारनदलाजे ने लोकसभा में दी. हायर पेंशन की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर 2022 के फैसले के बाद आगे बढ़ी थी.
हायर पेंशन का मतलब क्या है
हायर पेंशन का मतलब है कि कुछ योग्य सदस्य अपनी पेंशन की गणना ज्यादा वेतन के आधार पर कराने का विकल्प चुन सकते हैं. आम तौर पर पेंशन की गणना के लिए एक तय वेतन सीमा होती है. लेकिन नियमों के तहत योग्य सदस्य अपने असली वेतन के आधार पर पेंशन में ज्यादा योगदान कर सकते हैं.
इसका फायदा रिटायरमेंट के बाद मिल सकता है. अगर पेंशन के लिए योगदान ज्यादा होगा, तो आगे चलकर मासिक पेंशन भी ज्यादा हो सकती है. हालांकि, इसका यह मतलब भी है कि नौकरी के दौरान पीएफ का ज्यादा हिस्सा पेंशन खाते में जा सकता है.
अब तक कितने लोगों को फायदा मिला
लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, 15.24 लाख हायर पेंशन क्लेम ईपीएफओ को मिले हैं. इनमें से 1.49 लाख लोगों को पेंशन पेमेंट ऑर्डर जारी हो चुके हैं. 5 अगस्त 2026 तक 11,595 आवेदन लंबित थे.
- कुल हायर पेंशन क्लेम 15.24 लाख रहे.
- जारी पेंशन पेमेंट ऑर्डर करीब 1.49 लाख रहे.
- लंबित आवेदन 11,595 बताए गए.
ईपीएस के तहत कितने पेंशनर हैं.
सरकार के मुताबिक, कर्मचारी पेंशन योजना के तहत 31 मार्च 2026 तक करीब 85.85 लाख पेंशनर थे. इसी तारीख तक 15,819.28 करोड़ रुपये की पेंशन दी जा चुकी थी. सरकार ने यह भी बताया कि ईपीएस 1995 की जगह ईपीएस 2026 लागू हो चुका है.
न्यूनतम पेंशन और सरकारी योगदान
पुरानी ईपीएस व्यवस्था के तहत पात्र पेंशनरों को कम से कम 1,000 रुपये महीने की पेंशन सुनिश्चित करने के लिए सरकार बजट से मदद देती है. इसके अलावा सरकार तय वेतन सीमा के आधार पर 1.16 फीसदी योगदान भी करती है. पेंशन फंड में नियोक्ता और सरकार दोनों का योगदान शामिल होता है, और फंड की स्थिति का समय समय पर आकलन किया जाता है.
ईपीएफ निकासी के नियमों में क्या बदला
ईपीएफओ सदस्यों के लिए सिर्फ हायर पेंशन ही नहीं, निकासी के नियमों में भी बदलाव किया गया है. सरकार के मुताबिक, समय से पहले पूरा ईपीएफ निकालने के लिए अब 12 महीने की प्रतीक्षा अवधि रखी गई है. वहीं, ईपीएस से जुड़े निकासी लाभ के लिए 36 महीने की प्रतीक्षा अवधि लागू की गई है.
सरकार का कहना है कि जरूरत के समय आंशिक निकासी को आसान बनाने की कोशिश की गई है. नई व्यवस्था में आंशिक निकासी को तीन बड़ी श्रेणियों में रखा गया है.
- जरूरी जरूरतें.
- घर से जुड़ी जरूरतें.
- खास परिस्थितियां.
75 फीसदी तक निकासी की सुविधा
नियमों के तहत पात्र सदस्य अपने ईपीएफ बैलेंस का 75 फीसदी तक हिस्सा निकाल सकते हैं. इसमें बेरोजगारी, इलाज, पढ़ाई और घर से जुड़ी जरूरतें शामिल हो सकती हैं. खास परिस्थितियों में सदस्य साल में 2 बार तक 75 फीसदी राशि निकाल सकते हैं, और हर बार कारण बताना जरूरी नहीं होगा.
सदस्यों के लिए सबसे जरूरी बात
अगर कोई सदस्य हायर पेंशन का विकल्प चुन रहा है, तो उसे यह समझना होगा कि अभी ज्यादा योगदान देने और रिटायरमेंट के बाद ज्यादा पेंशन पाने के बीच संतुलन बनाना पड़ेगा. वहीं, आम ईपीएफ सदस्य के लिए निकासी के नए नियम ज्यादा अहम हैं. जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की सुविधा बनी हुई है, लेकिन हर स्थिति में पूरी रकम तुरंत निकालना संभव नहीं होगा.
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