FII Outflow: FII को लेकर आई नई चेतावनी, Elara का दावा बाजार में अभी बड़ा पैसा दूर !

चिराग ठाकुर

• 04:24 PM • 18 Jul 2026

भारत से विदेशी पैसा निकलने की रफ्तार भले धीमी हुई है, लेकिन ब्रोकरेज रिपोर्ट कहती है कि यह स्थायी वापसी नहीं. जानिए आगे बाजार को क्या चलाएगा.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

पिछले ढाई साल से विदेशी बिकवाली बाजार की चाल प्रभावित कर रही

जून के आखिर में तनाव घटा तो थोड़ी विदेशी खरीदारी लौटती दिखी

रिपोर्ट मानती है यह तेजी फिलहाल राहत भर है, पक्का मोड़ नहीं

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों यानी FII की भूमिका हमेशा से बेहद अहम रही है. माना जाता है कि जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर खरीदारी करते हैं, तो बाजार को मजबूती मिलती है. वहीं, जब यही निवेशक बिकवाली शुरू करते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है.लेकिन पिछले करीब ढाई साल से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. हाल के दिनों में FII की ओर से कुछ खरीदारी जरूर देखने को मिली, जिससे उम्मीद जगी कि शायद विदेशी पैसा एक बार फिर भारत की ओर लौट रहा है.

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हालांकि, ब्रोकरेज फर्म Elara Securities की एक रिपोर्ट ने इस उम्मीद को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, हाल की खरीदारी को अभी विदेशी निवेशकों की पूरी वापसी नहीं माना जा सकता. यह सिर्फ एक राहत वाली तेजी हो सकती है, जबकि बड़ी तस्वीर में ट्रेंड बदलने के संकेत अभी साफ नहीं हैं. अब सवाल है कि आखिर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत से विदेशी निवेशक दूरी क्यों बना रहे हैं? क्या वजह सिर्फ बाजार की कीमतें हैं या फिर दुनिया का पैसा किसी और जगह जा रहा है?

ढाई साल में FII ने निकाले अरबों डॉलर

Elara Securities की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 से अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 32 अरब डॉलर निकाल चुके हैं.अगर इसे भारतीय रुपये में देखें, तो यह रकम करीब ढाई से तीन लाख करोड़ रुपये के आसपास बैठती है. यानी विदेशी निवेशकों की बिकवाली कोई छोटी-मोटी हलचल नहीं है, बल्कि बाजार से बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी बाहर गई है.रिपोर्ट के अनुसार, मध्य-पूर्व में बढ़े तनाव के बाद स्थिति और चुनौतीपूर्ण हुई. इस दौरान करीब 82 फीसदी ट्रेडिंग सेशन में FII ने खरीदारी के बजाय बिकवाली की.हालांकि, जून के दूसरे हिस्से में बाजार में कुछ बदलाव देखने को मिला. विदेशी निवेशकों ने करीब 3 अरब डॉलर की खरीदारी की. इससे निवेशकों के बीच यह उम्मीद बनी कि शायद विदेशी पैसा फिर से भारतीय बाजार की तरफ लौट रहा है.

जून में क्यों लौटी विदेशी खरीदारी?

विदेशी निवेशकों की खरीदारी लौटने के पीछे कई वजहें रहीं.सबसे पहली वजह रही मध्य-पूर्व में तनाव का कुछ कम होना. इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए उठाए गए कदमों से भी बाजार का भरोसा बढ़ा.वहीं, कच्चे तेल समेत कई कमोडिटी कीमतों में नरमी आने से भी भारत के लिए माहौल थोड़ा बेहतर हुआ.इन सभी कारणों की वजह से विदेशी निवेशकों का नजरिया कुछ समय के लिए सुधरा.लेकिन Elara Securities का कहना है कि इसे अभी बड़ी वापसी मानना जल्दबाजी होगी.

राहत की तेजी या असली वापसी?

विदेशी निवेशकों की खरीदारी देखकर कई निवेशकों को लग सकता है कि अब FII पूरी ताकत के साथ भारत लौट रहे हैं. लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिर्फ एक राहत वाली तेजी हो सकती है.यानी विदेशी निवेशक अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और वे कुछ बड़े संकेतों का इंतजार कर रहे हैं.सबसे बड़ा सवाल है कि भारतीय कंपनियों की कमाई आने वाले समय में कितनी मजबूत रहती है.

सिर्फ सस्ता बाजार काफी नहीं

पिछले कुछ समय में भारतीय शेयर बाजार के वैल्यूएशन पहले की तुलना में कुछ आकर्षक हुए हैं.यानी कई शेयर पहले के मुकाबले कम महंगे नजर आ रहे हैं. लेकिन विदेशी निवेशकों के लिए सिर्फ सस्ता बाजार होना पर्याप्त नहीं है.वे अब कंपनियों की कमाई और भविष्य के मुनाफे पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.विदेशी निवेशक देखना चाहते हैं कि भारतीय कंपनियां आने वाली तिमाहियों में कितनी मजबूत ग्रोथ दिखाती हैं.यानी अब सिर्फ भारत की विकास कहानी सुनना काफी नहीं है, बल्कि उस ग्रोथ के ठोस नतीजे भी दिखने जरूरी हैं.

अमेरिका का बाजार क्यों खींच रहा है विदेशी पैसा?

FII की भारत से दूरी की दूसरी बड़ी वजह अमेरिका है.इस समय अमेरिका में सरकारी बॉन्ड बेहतर रिटर्न दे रहे हैं. डॉलर भी मजबूत बना हुआ है और वहां ब्याज दरें अभी ऊंचे स्तर पर हैं.ऐसे में कई विदेशी निवेशकों को लग रहा है कि कम जोखिम के साथ अमेरिका में निवेश करना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है.यानी भारत जैसे उभरते बाजारों में ज्यादा जोखिम लेने के बजाय फिलहाल कई निवेशक अमेरिका में पैसा लगाना पसंद कर रहे हैं.

AI की रैली का फायदा भारत को क्यों नहीं?

दुनिया में इस समय सबसे बड़ा निवेश ट्रेंड Artificial Intelligence यानी AI बना हुआ है.ग्लोबल निवेशकों का बड़ा पैसा AI से जुड़ी कंपनियों में जा रहा है. लेकिन इसका सबसे बड़ा फायदा अभी अमेरिका की टेक कंपनियों को मिल रहा है.Microsoft, Nvidia, Meta और Amazon जैसी कंपनियों में निवेश लगातार बढ़ रहा है.यानी AI की तेजी का केंद्र अभी Wall Street है, Dalal Street नहीं.Elara Securities का मानना है कि जब तक यह AI आधारित रैली थोड़ी धीमी नहीं होती, तब तक वैश्विक निवेश का बड़ा हिस्सा अमेरिका की ओर ही आकर्षित रह सकता है.

FII की वापसी के लिए किन चीजों की जरूरत?

Elara Securities के मुताबिक, भारत में विदेशी निवेशकों की मजबूत वापसी के लिए दो चीजें बेहद जरूरी हैं.पहली, भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आने चाहिए. इससे विदेशी निवेशकों को भरोसा मिलेगा कि भारत में कमाई और मुनाफे की रफ्तार मजबूत बनी हुई है.दूसरी, अमेरिका में चल रही AI आधारित तेजी में कुछ नरमी आनी चाहिए, ताकि वैश्विक निवेशकों का पैसा दूसरे बाजारों की ओर भी बढ़ सके.

क्या FII की बिकवाली से आम निवेशक को डरना चाहिए?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे हैं, तो इसका असर आम निवेशक पर कितना पड़ेगा?जानकारों के मुताबिक, FII की बिकवाली का मतलब यह नहीं है कि भारतीय बाजार आगे नहीं बढ़ सकता.इसकी बड़ी वजह है घरेलू निवेशकों की बढ़ती ताकत.Mutual Funds, SIP और घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी ने भारतीय बाजार को काफी मजबूती दी है. यही कारण है कि कई बार विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद बाजार ने नई ऊंचाइयों को छुआ है.लेकिन अगर आने वाले समय में FII भी दोबारा बड़े स्तर पर खरीदारी शुरू करते हैं, तो भारतीय बाजार को एक नया सपोर्ट मिल सकता है.यानी घरेलू निवेश के साथ विदेशी पैसा भी लौटता है, तो बाजार में तेजी के लिए दो बड़े इंजन काम कर सकते हैं.

आगे बाजार के लिए क्या रहेगा अहम?

आने वाले महीनों में निवेशकों को सिर्फ FII की खरीदारी या बिकवाली पर नजर नहीं रखनी होगी.इसके अलावा भारतीय कंपनियों की कमाई, अमेरिका की ब्याज दरों का रुख, डॉलर की स्थिति और AI सेक्टर में चल रही तेजी की दिशा भी बाजार के लिए बेहद अहम रहेगी.फिलहाल तस्वीर यही है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली जरूर धीमी हुई है, लेकिन इसे अभी पूरी वापसी का संकेत नहीं माना जा सकता.अगर भारतीय कंपनियों के नतीजे मजबूत रहे और वैश्विक माहौल भारत के पक्ष में आया, तो विदेशी पैसा फिर से भारतीय बाजार का रुख कर सकता है.लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो FII की खरीदारी कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित रह सकती है.भारतीय बाजार की आगे की चाल अब सिर्फ विदेशी निवेशकों पर नहीं, बल्कि घरेलू निवेशकों की ताकत और कंपनियों की कमाई पर भी निर्भर करेगी.