FII Selloff: विदेशी निवेशकों ने 6 दिन में बेच डाले ₹45,000 करोड़ के शेयर, कब थमेगी बिकवाली?

तनीषा त्यागी

• 04:41 PM • 11 Oct 2026

भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी के बावजूद विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं. अक्टूबर के शुरुआती छह कारोबारी सत्रों में करीब ₹45,125 करोड़ के शेयर बेच दिए गए. अमेरिकी बॉन्ड की ऊंची यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई के आंकड़े बाजार की दिशा तय कर सकते हैं. जानिए निफ्टी के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल.

"Elevated oil prices and US Treasury yields continue to warrant investors' attention, while the persistent FII selling and mixed global cues limit conviction," said Hitesh Tailor, technical research analyst at Choice Broking.
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FII Selloff : भारतीय शेयर बाजार में पिछले हफ्ते आई तेजी के बावजूद विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमने का नाम नहीं ले रही है. अक्टूबर के शुरुआती छह कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 45,125 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की है. यह आंकड़ा सितंबर में हुई करीब 45,536 करोड़ रुपये की पूरे महीने की नेट बिकवाली के लगभग बराबर है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब बाजार में रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं, तो विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से लगातार पैसा क्यों निकाल रहे हैं? इसके पीछे अमेरिका में बॉन्ड से मिलने वाला आकर्षक रिटर्न, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक आर्थिक हालात जैसे कई कारण अहम हो सकते हैं.

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6 दिन की बिकवाली ने बढ़ाई बाजार की चिंता

भारतीय शेयर बाजार लगातार आठ हफ्तों तक गिरावट का सामना करने के बाद पिछले हफ्ते बढ़त के साथ बंद हुआ. इससे निवेशकों को कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से बाजार की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है. अक्टूबर के शुरुआती छह कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 45,125 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की. वहीं, सितंबर में पूरे महीने के दौरान यह आंकड़ा करीब 45,536 करोड़ रुपये रहा था. यानी अक्टूबर के महज छह कारोबारी सत्रों में हुई बिकवाली सितंबर के पूरे महीने के आंकड़े के करीब पहुंच गई. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का दबाव भी बना हुआ है. सितंबर के मध्य से वे लगातार 11 कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयरों के नेट सेलर रहे हैं. इसका मतलब है कि इस अवधि में उनकी कुल बिकवाली, कुल खरीदारी से ज्यादा रही है.

अमेरिकी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड क्यों बन रही है परेशानी?

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे एक बड़ी वजह अमेरिका में बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न है. जब निवेशकों को किसी दूसरे बाजार में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना दिखती है, तो वे अपने निवेश का दोबारा आकलन करते हैं. इसका असर उन बाजारों पर पड़ सकता है, जहां से पैसा निकालकर दूसरे विकल्पों में लगाया जा रहा हो.अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी भारतीय शेयर बाजार के लिए ऐसा ही एक दबाव है. उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही के दौरान अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में इस सदी की सबसे बड़ी तिमाही बढ़त दर्ज की गई. रिपोर्ट में 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.3 फीसदी से ऊपर और 30 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.6 फीसदी तक पहुंचने का जिक्र है.

आसान भाषा में समझें तो विदेशी निवेशकों के सामने भारतीय शेयरों और अमेरिकी बॉन्ड जैसे विकल्प मौजूद हैं. भारतीय शेयरों में निवेश से अच्छा रिटर्न मिल सकता है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी रहता है. दूसरी तरफ, अमेरिकी सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न आकर्षक होने पर कुछ निवेशक वहां पैसा लगाना पसंद कर सकते हैं. ऐसे में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा रहना भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी को प्रभावित कर सकता है. हालांकि, निवेश का फैसला केवल यील्ड के आधार पर नहीं होता. इसमें बाजार की कीमतें, संभावित रिटर्न, जोखिम और वैश्विक आर्थिक हालात भी अहम भूमिका निभाते हैं.

2026 में विदेशी निवेशकों की नेट बिकवाली 3.60 लाख करोड़ रुपये के पार

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर केवल अक्टूबर तक सीमित नहीं है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कुल नेट बिकवाली करीब 3,60,952 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, अक्टूबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेजी से बढ़ी है. उनके अनुसार, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का असर भारतीय बाजार के प्रदर्शन पर भी पड़ा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 में अब तक निफ्टी का रिटर्न करीब 13.87 फीसदी निगेटिव रहा है. यह आंकड़ा दिखाता है कि बाजार के सामने दबाव सिर्फ घरेलू निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली तक सीमित नहीं है. विदेशी निवेशकों के बड़े पैमाने पर पैसा निकालने से भी बाजार की चाल प्रभावित हो रही है.

क्या विदेशी निवेशकों की बिकवाली जल्द थमेगी?

विदेशी निवेशकों की बिकवाली कब रुकेगी, इसका कोई निश्चित समय बताना मुश्किल है. इसके लिए यह देखना होगा कि भारतीय शेयर बाजार में निवेश का आकर्षण कितना बढ़ता है और दूसरे बाजारों में मिलने वाले रिटर्न की स्थिति क्या रहती है. वीके विजयकुमार के मुताबिक, जब तक अमेरिका के बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव जारी रह सकता है. ऐसे में केवल एक-दो कारोबारी सत्रों में बाजार की तेजी को विदेशी निवेशकों की वापसी का संकेत मानना जल्दबाजी होगी. भारतीय शेयरों की कीमतें अगर निवेश के लिहाज से आकर्षक होती हैं और संभावित रिटर्न के मुकाबले जोखिम कम नजर आता है, तो विदेशी निवेशक दोबारा खरीदारी पर विचार कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए बाजार की स्थिति और वैश्विक संकेतों में सुधार भी जरूरी होगा.

कच्चे तेल की कीमतें भी रहेंगी अहम

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं. अगर कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है. इसलिए आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर भी रहेगी. इसके साथ ही भारत और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं. Bajaj Broking के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट ऑफ रिसर्च पबित्रो मुखर्जी के मुताबिक, ये सभी संकेत आने वाले हफ्ते में बाजार की चाल के लिए अहम रहेंगे. अगर महंगाई के आंकड़े राहत देते हैं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आती है और कच्चे तेल की कीमतें नरम पड़ती हैं, तो बाजार को सहारा मिल सकता है. इसके उलट, इन मोर्चों पर दबाव बने रहने से विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहने का जोखिम रहेगा. हालांकि, वैश्विक संकेत बेहतर होने पर भी विदेशी निवेशक तुरंत बड़े पैमाने पर खरीदारी शुरू कर देंगे, इसकी गारंटी नहीं है. भारतीय शेयरों का वैल्यूएशन, संभावित रिटर्न और निवेश से जुड़ा जोखिम भी उनके फैसले को प्रभावित करेंगे.

निफ्टी के लिए 22,350 का स्तर क्यों है अहम?

बाजार की दिशा समझने के लिए निफ्टी के अहम तकनीकी स्तरों पर भी नजर रखनी होगी. SBI Securities के हेड ऑफ टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,350 से 22,330 का स्तर तत्काल सपोर्ट जोन की तरह काम कर सकता है. सपोर्ट जोन वह स्तर होता है, जहां गिरावट के दौरान खरीदारी आने और बाजार को सहारा मिलने की संभावना रहती है. अगर निफ्टी इस दायरे के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में इंडेक्स 22,200 के स्तर की ओर जा सकता है. वहीं, तेजी की तरफ 22,660 से 22,680 का स्तर अहम रुकावट बन सकता है. यह जोन निफ्टी के 10 दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA के आसपास है. अगर निफ्टी इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो शॉर्ट कवरिंग के चलते बाजार में और रिकवरी देखने को मिल सकती है. इस स्थिति में अगला स्तर 22,820 हो सकता है. शॉर्ट कवरिंग का मतलब है कि जिन ट्रेडर्स ने बाजार में गिरावट की उम्मीद में बिकवाली की थी, वे अपनी पोजिशन बंद करने के लिए शेयर या इंडेक्स दोबारा खरीदते हैं. इससे बाजार में तेजी को सहारा मिल सकता है. हालांकि, केवल एक दिन की बढ़त को मजबूत रिकवरी का संकेत मानने के बजाय लगातार खरीदारी और ऊंचे स्तरों पर बाजार के टिके रहने पर ध्यान देना जरूरी होगा.

निवेशकों को अब किन संकेतों पर रखनी चाहिए नजर?

फिलहाल भारतीय शेयर बाजार के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं. पहली, अमेरिका में बॉन्ड की ऊंची यील्ड. दूसरी, कच्चे तेल की महंगी कीमतें. तीसरी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली. आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड, ब्रेंट क्रूड की कीमतें और अमेरिका-ईरान के बीच होने वाले घटनाक्रम बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे. साथ ही, निफ्टी के सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर भी कारोबार की दिशा समझने में मदद कर सकते हैं. विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकने के लिए केवल बाजार में थोड़े समय की तेजी पर्याप्त नहीं होगी. निवेश के लिहाज से आकर्षक कीमतें, बेहतर संभावित रिटर्न और वैश्विक हालात में सुधार भी अहम होंगे. ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच इन संकेतों पर नजर रखें और केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर जल्दबाजी में फैसला न लें.

डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है. इसमें दिए गए विशेषज्ञों के विचार निवेश की सलाह नहीं हैं. शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें.

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