अगर आप शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग करते हैं, तो आपके लिए यह बड़ा बदलाव है. 3 अगस्त से F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) वाले शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय करने का तरीका बदल गया है. अब इन शेयरों का क्लोजिंग भाव आखिरी 30 मिनट की औसत कीमत से नहीं, बल्कि Closing Auction के जरिए तय होगा. इस बदलाव का मकसद बाजार बंद होने से ठीक पहले होने वाली बड़ी खरीद-बिक्री के असर को कम करना और क्लोजिंग प्राइस को ज्यादा पारदर्शी बनाना है.
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क्या बदल रहा है
अभी तक किसी शेयर का क्लोजिंग भाव दोपहर 3 बजे से 3:30 बजे के बीच हुए सौदों के औसत भाव से तय होता था. 3 अगस्त से फ्यूचर्स और ऑप्शंस वाले शेयरों में यह तरीका बदलेगा. इन शेयरों के लिए अलग क्लोजिंग ऑक्शन होगा और उसी से आखिरी आधिकारिक भाव तय होगा.यह क्लोजिंग भाव बाजार के कई अहम कामों में इस्तेमाल होता है. इसी के आधार पर इंडेक्स का बंद स्तर तय होता है, म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो का हिसाब बनता है और डेरिवेटिव सौदों का निपटान होता है.
पहले कैसे तय होती थी क्लोजिंग प्राइस?
अब तक किसी शेयर की क्लोजिंग प्राइस दोपहर 3:00 बजे से 3:30 बजे के बीच हुए ट्रेड की औसत कीमत के आधार पर तय होती थी. लेकिन इस दौरान कई बार बड़े ऑर्डर डालकर क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित करने की शिकायतें सामने आती थीं.
अब कैसे होगी Closing Price तय?
अब F&O शेयरों में सामान्य ट्रेडिंग 3:15 बजे बंद हो जाएगी. इसके बाद Closing Auction शुरू होगा. इस दौरान
- खरीद और बिक्री के ऑर्डर जमा किए जाएंगे
- तुरंत ट्रेड नहीं होगा
- एक्सचेंज ऐसी एक कीमत निकालेगा, जहां सबसे ज्यादा खरीद और बिक्री के ऑर्डर मैच हो सकें
- वही कीमत उस शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस होगी
ऑक्शन में क्या होंगे नियम?
- निवेशक 3:25 बजे तक मार्केट और लिमिट दोनों तरह के ऑर्डर दे सकेंगे
- 3:25 बजे के बाद केवल नए लिमिट ऑर्डर ही स्वीकार होंगे
- पहले से दिए गए मार्केट ऑर्डर में बदलाव या कैंसिल नहीं किया जा सकेगा
- ऑक्शन 3:28 से 3:30 बजे के बीच किसी भी समय रैंडम तरीके से बंद होगा, ताकि आखिरी सेकेंड में बड़े ऑर्डर डालकर कीमत प्रभावित न की जा सके
- 3% से ज्यादा नहीं बदल सकेगी कीमत
3% से ज्यादा नहीं बदल सकेगी कीमत
ऑक्शन में तय होने वाली कीमत आमतौर पर 3:00 बजे से 3:15 बजे के बीच के औसत ट्रेडिंग प्राइस से 3% ऊपर या नीचे ही रह सकेगी। इससे अचानक बड़े उतार-चढ़ाव पर रोक लगेगी.
म्यूचुअल फंड निवेशकों को क्या फायदा?
इस बदलाव से खासतौर पर इंडेक्स और पैसिव म्यूचुअल फंड को फायदा होगा. अब वे अपने बड़े ऑर्डर क्लोजिंग ऑक्शन में देकर आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस के करीब ट्रेड कर पाएंगे. इससे उनके पोर्टफोलियो की ट्रैकिंग बेहतर होगी और Tracking Error कम होने की उम्मीद है.
F&O ट्रेडर्स के लिए क्या बदलेगा?
कैश मार्केट में F&O शेयरों की ट्रेडिंग 3:15 बजे बंद हो जाएगी, लेकिन फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग 3:40 बजे तक जारी रहेगी. इससे डेरिवेटिव ट्रेडर्स को क्लोजिंग प्राइस आने के बाद अपनी पोजिशन संभालने के लिए कुछ अतिरिक्त समय मिलेगा.
किन लोगों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
- इंट्राडे ट्रेडर्स
- F&O ट्रेडर्स
- प्रोप ट्रेडिंग फर्म
- बड़े संस्थागत निवेशक
वहीं, गैर-F&O शेयरों में निवेश करने वाले आम निवेशकों को इस बदलाव का बहुत ज्यादा असर महसूस नहीं होगा.
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