विदेशी फंड्स ने खोज लिया अगला बड़ा दांव? Sensex-Nifty से की 5 गुना तक ज्यादा कमाई !

चिराग ठाकुर

• 11:12 AM • 14 Aug 2026

जून तिमाही में कुछ बड़े विदेशी फंड्स ने सेंसेक्स और निफ्टी को पीछे छोड़ा. जानिए कैसे सही मिडकैप, स्मॉलकैप और नए दौर की कंपनियों ने कमाई बढ़ाई.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

जून तिमाही में कई बड़े विदेशी फंड भारत में टिके रहे

प्राइम डाटाबेस के मुताबिक शीर्ष एफपीआई पोर्टफोलियो 10 से 37 फीसदी बढ़े

बैंक और आईटी दबे रहे, छोटे शेयरों में तेज उछाल दिखा

Iran crisis के बाद जब कई विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे थे, तब कुछ बड़े ग्लोबल फंड्स ने भारत में अपना भरोसा बनाए रखा. जून तिमाही खत्म होने तक उनका यह फैसला काफी फायदेमंद साबित हुआ. Prime Database के आंकड़ों के मुताबिक, टॉप 20 FPIs में से करीब 75 फीसदी के भारतीय पोर्टफोलियो की घोषित वैल्यू 10 से 37 फीसदी तक बढ़ी. यह बढ़त Sensex और Nifty के प्रदर्शन से काफी ज्यादा रही.

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Sensex-Nifty से काफी आगे निकले कुछ विदेशी फंड्स

अप्रैल से जून के बीच Sensex करीब 6.3 फीसदी और Nifty लगभग 6.8 फीसदी चढ़ा. इसके मुकाबले कुछ बड़े विदेशी निवेशकों के भारतीय पोर्टफोलियो की वैल्यू 37 फीसदी तक बढ़ गई.

हालांकि यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा. पोर्टफोलियो वैल्यू में बढ़ोतरी को सीधे निवेश पर मिला रिटर्न नहीं माना जा सकता. इसमें शेयरों की कीमत बढ़ने के साथ नए निवेश से आई रकम और पोर्टफोलियो में बदलाव का भी असर हो सकता है.

फिर भी आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान सही शेयर चुनने वाले विदेशी निवेशकों ने बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया.

असली गेमचेंजर बने Midcap और Smallcap शेयर

इस पूरी कहानी की सबसे अहम वजह Stock Picking रही.

जून तिमाही में बाजार के सभी शेयर एक जैसी रफ्तार से नहीं बढ़े. कुछ बड़े बैंक और IT शेयरों पर दबाव रहा, जबकि Midcap, Smallcap और New-age कंपनियों में अच्छी तेजी देखने को मिली.

Broad market के आंकड़े इसकी तस्वीर और साफ करते हैं.

  • BSE Mid-cap 150 करीब 17 फीसदी चढ़ा.
  • BSE SmallCap 250 में करीब 24.5 फीसदी की तेजी आई.
  • इसके मुकाबले Sensex करीब 6.3 फीसदी और Nifty 6.8 फीसदी बढ़े.

यानी जिस निवेशक ने broader market में सही शेयरों की पहचान की, उसके लिए रिटर्न का मौका काफी बड़ा था.

किन विदेशी फंड्स को हुआ फायदा?

बेहतर प्रदर्शन करने वाले विदेशी निवेशकों में Capital Group, Fidelity, Goldman Sachs, GQG Partners और Nalanda जैसे बड़े नाम शामिल रहे.

Market experts के मुताबिक, हाल की बिकवाली का असर खास तौर पर उन कंपनियों पर पड़ा जिनका Nifty और Sensex में ज्यादा वजन है. दूसरी तरफ कई Midcap, Smallcap और New-age कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया. यही वजह है कि भारत में अब सिर्फ बड़े इंडेक्स की दिशा देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता.

भारत बन रहा है Stock Pickers' Market ?

जून तिमाही के आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भारतीय बाजार तेजी से Stock Pickers' Market बन रहा है. इसका मतलब है कि बाजार के ऊपर जाने से ज्यादा अहम यह हो सकता है कि आपने उस बाजार में कौन सा शेयर चुना.

एक ही सेक्टर की दो कंपनियों के रिटर्न में बड़ा अंतर हो सकता है. इसलिए individual stocks में निवेश करने वालों के लिए कंपनी की earnings, valuation, growth prospects और business quality को समझना बेहद जरूरी है. इंडेक्स बाजार की broad direction बता सकता है, लेकिन कई बार असली outperformance इंडेक्स के बाहर के शेयरों से आता है.

एशिया में भारत सबसे आगे नहीं था

जून तिमाही में भारत ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन Taiwan और South Korea जैसे बाजारों ने इससे कहीं ज्यादा रिटर्न दिया.

Dollar terms में:

  • China: 22.2%
  • Taiwan: 46.3%
  • South Korea: 64.24%
  • MSCI Emerging Markets: 23%

बाद में East Asian markets में AI से जुड़े शेयरों में कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिली.

निवेशकों के लिए क्या है बड़ा सबक?

इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा takeaway यही है कि सिर्फ Nifty और Sensex की चाल देखकर निवेश का फैसला करना काफी नहीं है.

अगर individual stocks में निवेश किया जा रहा है, तो कंपनी की कमाई, वैल्यूएशन, ग्रोथ की संभावना, सेक्टर का outlook और बिजनेस की क्वालिटी को भी देखना होगा. जून तिमाही में कुछ बड़े विदेशी फंड्स ने इंडेक्स के बड़े नामों से आगे जाकर Midcap, Smallcap और New-age कंपनियों में मौके तलाशे. इसी वजह से उनके पोर्टफोलियो ने benchmark से बेहतर प्रदर्शन किया.

बाजार वही था, लेकिन शेयरों का चुनाव अलग था. और इसी चुनाव ने रिटर्न में बड़ा अंतर पैदा कर दिया.