करीब 18 महीने बाद भारत फिर से विदेशी निवेशकों की नजर में आता दिख रहा है. सिटीग्रुप, गोल्डमैन सैक्स, बार्कलेज और मैक्वैरी जैसी बड़ी निवेश फर्मों का कहना है कि भारत के शेयर और बॉन्ड बाजार में विदेश से पैसा आने का रुझान फिर बढ़ रहा है.इस बदलाव की बड़ी वजह भारत की मजबूत आर्थिक हालत, रुपये में सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट मानी जा रही है. बाजार के हाल के आंकड़े भी दिखाते हैं कि विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे वापस लौट रहा है.
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18 महीने बाद बदला रुख
पिछले डेढ़ साल में निवेशकों का ध्यान उन बाजारों की तरफ ज्यादा था, जहां एआई से जुड़ी कंपनियों का दबदबा था. दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान तनाव के कारण तेल महंगा हुआ, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर दबाव बढ़ा. इसका असर रुपये पर भी पड़ा और विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से दूरी बनाई.अब हालात कुछ बदलते दिख रहे हैं. तेल की कीमतों में नरमी आई है, रुपया संभला है और भारत की आर्थिक तस्वीर पहले से बेहतर मानी जा रही है. इसी वजह से विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर बनता दिख रहा है.
Citi ने क्या कहा?
Citigroup इंडिया के CEO के. बालासुब्रमण्यम का कहना है कि भारत को लेकर पिछले 18 महीनों से बना नकारात्मक माहौल तेजी से खत्म हो रहा है. उनके मुताबिक निवेशकों का भरोसा वापस लौट रहा है क्योंकि देश का राजकोषीय घाटा घट रहा है और रुपये में भी मजबूती आई है
Goldman Sachs और Barclays भी हुए पॉजिटिव
Goldman Sachs ने भारत को लेकर अपना नजरिया पहले से ज्यादा सकारात्मक किया है. वहीं Barclays का मानना है कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था में निवेश करने का यह सही समय हो सकता है
Macquarie Capital Securities का कहना है कि लंबे समय की सुस्ती के बाद अब विदेशी ग्राहकों की ओर से भारत को लेकर पूछताछ बढ़ने लगी है
बाजार में दिखने लगा असर
विदेशी निवेशकों की वापसी का असर बाजार में भी नजर आने लगा है
- जून में भारतीय शेयर बाजार ने उभरते बाजारों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया
- विदेशी निवेशकों ने सरकारी बॉन्ड में रिकॉर्ड 4.4 अरब डॉलर का निवेश किया
- शेयर बाजार से विदेशी निकासी पिछले चार महीनों में सबसे कम रही
- रुपया जून में एशिया की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा
AI की रेस में भारत को मिल सकता है फायदा
अब निवेशकों को यह भी लगने लगा है कि केवल AI आधारित बाजारों पर दांव लगाना जोखिम भरा हो सकता है. दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में निवेश का जोखिम बढ़ने के बाद कई फंड मैनेजर चीन और भारत जैसे बड़े बाजारों की ओर दोबारा रुख कर सकते हैं.
भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव भी कम
भारतीय शेयर बाजार की एक बड़ी खासियत इसकी अपेक्षाकृत कम अस्थिरता (Volatility) भी है. 2026 की पहली छमाही में निफ्टी में 1% या उससे अधिक की चाल वाले दिन कई दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले कम रहे। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है.
कच्चे तेल की कीमतों से मिला बड़ा सहारा
ब्रेंट क्रूड की कीमतें जून तिमाही में करीब 30% गिर चुकी हैं और युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच गई हैं. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, इसलिए सस्ते तेल का सीधा फायदा अर्थव्यवस्था को मिलता है. Citigroup ने इसी वजह से भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाया है। वहीं Goldman Sachs का मानना है कि कम तेल कीमतों से महंगाई और राजकोषीय दबाव घटेगा, जिससे भारतीय सरकारी बॉन्ड आकर्षक बनेंगे.
सरकार और RBI के कदमों का असर
सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड पर टैक्स हटाने जैसे कदम उठाए हैं. वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं. इन फैसलों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है
अभी भी बने हुए हैं कुछ जोखिम
- कमजोर मानसून और El Nino का खतरा
- खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका
- अमेरिकी डॉलर की मजबूती
- लंबे समय तक ऊंची अमेरिकी ब्याज दरें
ये सभी कारक आने वाले महीनों में विदेशी निवेश के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं
आगे का रास्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में विदेशी निवेश की वापसी अभी शुरुआती दौर में है. अगर कच्चे तेल की कीमतें काबू में रहती हैं, रुपये में स्थिरता बनी रहती है और सरकार सुधारों की रफ्तार जारी रखती है, तो आने वाले महीनों में भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश और बढ़ सकता है. करीब 7 प्रतिशत आर्थिक बढ़त, अपेक्षाकृत स्थिर बाजार और नीतिगत समर्थन भारत को फिर से वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बना रहे हैं.
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