Foreign Investors की भारतीय बाज़ार में जोरदार वापसी, इन 5 Sectors पर लगा रहे हैं बड़ा दांव !

चिराग ठाकुर

• 02:39 PM • 16 Aug 2026

चार महीने की बिकवाली के बाद विदेशी निवेशक फिर भारतीय शेयर बाजार में लौट रहे हैं. जानिए जुलाई-अगस्त में पैसा किन सेक्टरों में गया और आगे क्या संकेत हैं.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

मार्च से जून के बीच करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये बाजार से निकले

जुलाई में 20,200 करोड़ की खरीदारी हुई, अगस्त में रफ्तार बनी रही

चुनिंदा खरीद में उपभोक्ता सेवा, स्वास्थ्य, आईटी और धातु शेयर शामिल

2026 की शुरुआत में जिस Foreign Money ने भारतीय शेयर बाजार पर लगातार दबाव बनाया था, वही पैसा अब वापस लौटता नजर आ रहा है. जुलाई में FPIs यानी Foreign Portfolio Investors करीब ₹20,200 करोड़ के Net Buyers रहे और अगस्त के पहले पखवाड़े में ही उन्होंने भारतीय Equities में ₹16,621 करोड़ लगा दिए हैं.

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यानी विदेशी निवेशकों की Selling से Buying की तरफ शिफ्ट अब लगातार दूसरे महीने दिखाई दे रही है. लेकिन इस कहानी में सिर्फ पैसा लौटने की बात नहीं है. असली सवाल यह है कि Foreign Investors अब India में क्या खरीद रहे हैं?

चार महीने तक जारी रही थी भारी बिकवाली

2026 के शुरुआती महीनों में FPI का रुख भारतीय बाजार के लिए काफी मुश्किल रहा.

  • मार्च: करीब ₹1.17 लाख करोड़ की बिकवाली.
  • अप्रैल: करीब ₹60,847 करोड़ की निकासी.
  • मई: करीब ₹32,963 करोड़ की बिकवाली.
  • जून: करीब ₹49,340 करोड़ की निकासी.

यानी सिर्फ मार्च से जून के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय Equities से करीब ₹2.4 लाख करोड़ बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई.

लेकिन जुलाई में तस्वीर अचानक बदल गई.

जुलाई से शुरू हुआ Foreign Money का U-Turn

जुलाई में FPIs ने करीब ₹20,200 करोड़ का निवेश किया. इसके बाद अगस्त के पहले 15 दिनों में ही करीब ₹16,621 करोड़ भारतीय शेयरों में आ चुके हैं.

इसका मतलब साफ है कि विदेशी निवेशकों का Sentiment कुछ हद तक सुधरा है.

हालांकि एक बात ध्यान रखना जरूरी है. पूरे 2026 के हिसाब से FPIs अभी भी बड़े Net Sellers हैं. इसलिए इसे अभी पूरी तरह Trend Reversal कहना जल्दबाजी होगी.

फिर भी लगातार दो महीने की Buying बाजार के लिए एक Positive Signal जरूर है.

आखिर Foreign Investors को India में क्या दिखा?

विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव के पीछे तीन बड़े कारण नजर आते हैं.

1. Valuation का आकर्षण

लंबी Selling के बाद बाजार के कुछ हिस्सों में Valuation पहले की तुलना में ज्यादा आकर्षक हो गए हैं. ऐसे में विदेशी निवेशकों को कुछ Stocks में दोबारा Entry का मौका दिखाई दे रहा है.

2. Corporate Earnings की मजबूती

भारतीय कंपनियों की Earnings में अभी भी मजबूती बनी हुई है. Global Uncertainty के बावजूद अगर कंपनियों की Profit Growth और Business Performance टिकाऊ रहती है, तो India की Investment Story विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनती है.

3. US Rate Cut की उम्मीद

अगर अमेरिका में Interest Rates में कटौती की उम्मीद मजबूत होती है, तो US Assets से मिलने वाला Return कम आकर्षक हो सकता है. ऐसे माहौल में Global Investors Emerging Markets की तरफ पैसा बढ़ा सकते हैं और India इसका बड़ा Beneficiary बन सकता है.

अब किन Sectors पर है Foreign Investors की नजर?

यहां सबसे दिलचस्प बदलाव दिखाई देता है. FPIs इस बार Blind Buying नहीं कर रहे हैं. वे चुनिंदा Sectors में पैसा लगा रहे हैं.

जुलाई में Foreign Buying में खास तौर पर:

  • Consumer Services
  • Healthcare
  • Consumer Durables
  • Metals & Mining
  • IT

जैसे Sectors में दिलचस्पी देखने को मिली.

यानी Foreign Investors की नजर सिर्फ शेयर बाजार की तेजी पर नहीं, बल्कि India की Domestic Consumption Story पर भी है.

अगर Consumer Spending बढ़ता है, तो इसका फायदा Consumption से जुड़ी कंपनियों की Sales और Earnings को मिल सकता है. यही उम्मीद इन Sectors को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बना रही है.

क्या यह Buying आगे भी जारी रहेगी?

यही सबसे बड़ा सवाल है.

क्योंकि Global Markets में अभी भी कई बड़े Risk मौजूद हैं. US Treasury Yields, Dollar Index और Crude Oil की चाल FPI Flows को प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा Geopolitical Tensions भी बाजार का मूड कभी भी बदल सकते हैं.

इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि Foreign Investors ने पूरी तरह India का रुख पकड़ लिया है.

लेकिन तस्वीर पहले से जरूर बदली है. चार महीने की भारी Selling के बाद लगातार दो महीने की Buying यह संकेत दे रही है कि Foreign Investors अब India में फिर से मौके तलाश रहे हैं.

अगर US Rate Cuts की उम्मीद मजबूत होती है, Crude नियंत्रण में रहता है और भारतीय कंपनियों की Earnings दमदार बनी रहती हैं, तो जुलाई-अगस्त की यह Buying महज Temporary Bounce नहीं, बल्कि Indian Equities में Foreign Money की बड़ी Comeback Story की शुरुआत बन सकती है.