FPI Return: 4 महीने बाद विदेशी निवेशकों की वापसी, क्या शेयर बाजार में आएगी नई तेजी?

चिराग ठाकुर

• 01:03 PM • 02 Aug 2026

चार महीने की बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों ने जुलाई में भारतीय बाजार में जोरदार खरीदारी की. जानिए इस बदलाव की वजहें और आगे किन संकेतों पर नजर रहेगी.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

मार्च से जून तक लगातार निकासी ने बाजार पर भारी दबाव बनाया

गिरावट के बाद कई बड़े शेयर विदेशी फंड्स को सस्ते लगे

जून तिमाही में कई कंपनियों खासकर आईटी का प्रदर्शन बेहतर रहा

करीब चार महीने तक लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जुलाई में फिर से खरीदारी का रुख अपनाया है. जुलाई के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में करीब ₹20,200 करोड़ का निवेश किया. लंबे समय बाद आई इस खरीदारी ने बाजार में एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि क्या विदेशी निवेशकों का भरोसा भारत पर लौट रहा है या यह सिर्फ एक अस्थायी बदलाव है. हालांकि, जुलाई की यह वापसी राहत जरूर देती है, लेकिन पूरे साल की तस्वीर अभी भी पूरी तरह सकारात्मक नहीं कही जा सकती. विदेशी निवेशकों की ओर से पहले चार महीनों में की गई भारी बिकवाली का असर अब भी आंकड़ों में साफ दिखाई देता है.

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चार महीने तक लगातार बिकवाली के बाद बदला रुख

जुलाई से पहले विदेशी निवेशक लगातार चार महीनों तक भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे थे. मार्च में सबसे ज्यादा करीब ₹1.17 लाख करोड़ की निकासी दर्ज की गई. इसके बाद अप्रैल में ₹60,847 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़ और जून में ₹49,340 करोड़ की बिकवाली हुई. यानी मार्च से जून तक विदेशी निवेशकों ने लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाला. ऐसे में जुलाई में हुई खरीदारी बाजार के लिए एक अहम बदलाव मानी जा रही है.

आखिर विदेशी निवेशक वापस क्यों लौटे?

विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं. इनमें सबसे अहम वजह भारतीय शेयरों की वैल्यूएशन है.

1. गिरावट के बाद आकर्षक हुए शेयर

पिछले कुछ महीनों के दौरान बाजार में आई गिरावट के बाद कई बड़ी कंपनियों के शेयर पहले की तुलना में आकर्षक स्तर पर पहुंच गए. इससे विदेशी निवेशकों को दोबारा निवेश का अवसर दिखाई दिया और उन्होंने खरीदारी शुरू की.

2. कंपनियों के बेहतर नतीजों ने बढ़ाया भरोसा

जून तिमाही के दौरान कई कंपनियों के वित्तीय नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे. खासतौर पर आईटी सेक्टर का प्रदर्शन निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया. इससे कंपनियों की कमाई को लेकर भरोसा बढ़ा और विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी फिर भारतीय बाजार की ओर बढ़ी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बनी कुछ चिंताओं में भी कमी आने से निवेशकों का नजरिया बेहतर हुआ.

3. भारत अपेक्षाकृत स्थिर बाजार के रूप में उभरा

वैश्विक स्तर पर कई बाजारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. ऐसे माहौल में भारत अपेक्षाकृत अधिक स्थिर बाजार के रूप में सामने आया. इसी वजह से विदेशी फंड्स का रुझान एक बार फिर भारतीय बाजार की ओर बढ़ा. रुपये में अपेक्षाकृत स्थिरता और अमेरिकी डॉलर पर दबाव कम होने से भी भारत जैसे उभरते बाजारों को फायदा मिला.

क्या जुलाई की खरीदारी से पूरी तस्वीर बदल गई?

जुलाई में विदेशी निवेशकों की वापसी जरूर हुई है, लेकिन इससे पूरे साल की तस्वीर पूरी तरह नहीं बदल जाती. साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब ₹2.54 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी कर चुके हैं. यानी जुलाई की खरीदारी के बावजूद विदेशी निवेशकों का कुल निवेश अभी भी निगेटिव बना हुआ है. ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि विदेशी निवेशकों का भरोसा पूरी तरह लौट आया है.

अब किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?

आने वाले समय में विदेशी निवेशकों के रुख को कई घरेलू और वैश्विक कारक प्रभावित कर सकते हैं. सबसे पहले बाजार की नजर कंपनियों के Q1FY27 के नतीजों पर रहेगी. अगर कंपनियों की कमाई उम्मीद से बेहतर रहती है, तो विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ सकती है.

इसके अलावा 5 अगस्त को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक का फैसला भी बाजार के लिए अहम रहेगा. ब्याज दरों और महंगाई को लेकर RBI का रुख निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है. साथ ही कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया से जुड़े भू-राजनीतिक हालात भी विदेशी निवेशकों के फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

क्या आगे भी जारी रहेगी विदेशी खरीदारी?

फिलहाल जुलाई के आंकड़े यह संकेत जरूर देते हैं कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में दोबारा दिलचस्पी दिखानी शुरू की है. हालांकि, यह सिर्फ एक महीने का ट्रेंड है. आने वाले हफ्तों में कॉरपोरेट नतीजे, RBI का फैसला और वैश्विक आर्थिक हालात यह तय करेंगे कि विदेशी निवेशकों की खरीदारी आगे भी जारी रहती है या नहीं.

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि चार महीने बाद विदेशी निवेशकों की वापसी भारतीय शेयर बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है. लेकिन यह लंबी अवधि की तेजी की शुरुआत है या सिर्फ अस्थायी राहत, इसका जवाब आने वाले समय में ही मिलेगा.