भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े अमेरिकी मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है. अमेरिका की एक संघीय अदालत ने न्याय विभाग यानी Department of Justice (DOJ) के उस फैसले पर अतिरिक्त जानकारी मांगी है, जिसमें अडानी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई थी. अदालत अब यह स्पष्ट करना चाहती है कि इस फैसले के पीछे किसी तरह का वादा, समझौता या कोई अन्य व्यवस्था तो नहीं थी.
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15 जुलाई तक देना होगा शपथपत्र के साथ जवाब
न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गरौफिस ने गौतम अडानी को 15 जुलाई 2026 तक दो सवालों के जवाब शपथपत्र के साथ दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने साफ किया है कि जवाब लिखित और शपथ के तहत दिए जाएं.
जज ने दो प्रमुख सवाल पूछे हैं.
- पहला, क्या केस वापस लेने के फैसले के संबंध में किसी व्यक्ति की ओर से कोई वादा, प्रस्ताव, मांग, स्वीकार्यता या लाभ की जानकारी है.
- दूसरा, क्या केस खत्म करने के बदले किसी तरह का कोई समझौता किया गया था.
मामला आखिर किस आरोप से जुड़ा है?
यह पूरा मामला वर्ष 2024 के आखिर में सामने आए उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें अमेरिकी अभियोजकों ने दावा किया था कि भारत में सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए 250 मिलियन डॉलर से अधिक की कथित रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी. हालांकि गौतम अडानी इन आरोपों से लगातार इनकार करते रहे हैं और उन्होंने किसी भी तरह की गलत गतिविधि से अपना संबंध नहीं माना है.
अडानी के वकील ने क्या कहा?
गौतम अडानी की ओर से पैरवी कर रहे वकील रॉबर्ट जिउफ्रा जूनियर ने इस नए आदेश पर कोई टिप्पणी नहीं की. हालांकि इससे पहले उनकी ओर से अदालत में कहा गया था कि इस पूरे मामले में कानूनी और तथ्यात्मक दोनों स्तर पर कई कमजोरियां मौजूद हैं. इसी आधार पर केस खत्म करने की मांग की गई थी.
DOJ ने केस वापस लेने की क्या वजह बताई?
अमेरिकी न्याय विभाग ने मई में कहा था कि वह इस आपराधिक मामले पर आगे सरकारी संसाधन खर्च नहीं करना चाहता. इसके बाद अदालत ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि केस वापस लेने का आधार क्या है. सरकार की ओर से बाद में दायर जवाब में कहा गया कि यह मामला शुरू से ही जटिल विदेशी अधिकार क्षेत्र से जुड़ा था और इसमें सबूत जुटाने में असाधारण कठिनाइयां थीं. साथ ही यह भी कहा गया कि संबंधित सिक्योरिटीज में किसी निवेशक का वित्तीय नुकसान नहीं हुआ.
क्या 10 अरब डॉलर के निवेश का कोई संबंध था?
सरकार की ओर से अदालत में यह भी स्पष्ट किया गया कि केस वापस लेने का फैसला केवल मामले की कानूनी समीक्षा के आधार पर लिया गया था. इसमें गौतम अडानी की ओर से अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने की सार्वजनिक घोषणा का कोई प्रभाव नहीं था. गौरतलब है कि अमेरिकी चुनावों के बाद गौतम अडानी ने अमेरिका में बड़े निवेश की योजना का ऐलान किया था. बाद में उनकी कानूनी टीम ने भी अदालत में अपनी दलीलों के दौरान इस निवेश योजना का उल्लेख किया था.
अब आगे क्या होगा?
अब इस मामले में सबसे अहम तारीख 15 जुलाई 2026 होगी. इसी दिन तक गौतम अडानी को अदालत के दोनों सवालों के शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने हैं. इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि DOJ की ओर से केस वापस लेने की प्रक्रिया पर आगे क्या रुख अपनाया जाए. फिलहाल अमेरिकी न्याय विभाग यह दोहरा चुका है कि उसका फैसला पूरी तरह कानूनी समीक्षा पर आधारित था. वहीं अदालत अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का बाहरी प्रभाव, वादा या समझौता शामिल नहीं था.
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